भारत सरकार ने बैंकों को AI मॉडल Claude Mythos से जुड़े संभावित साइबर खतरों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। यह मॉडल तेजी से सॉफ्टवेयर की कमजोरियां ढूंढकर उनका गलत इस्तेमाल कर सकता है, जिससे बैंकिंग सिस्टम पर खतरा बढ़ सकता है। सरकार ने इसे लेकर बैठक कर बैंकों को सुरक्षा मजबूत करने को कहा है। फिलहाल यह शुरुआती चेतावनी है, लेकिन आगे AI के लिए सख्त नियम लागू हो सकते हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ चैटबॉट या प्रोडक्टिविटी टूल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह साइबर सिक्योरिटी और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए भी बड़ा मुद्दा बन चुका है। हाल के दिनों में Anthropic के नए AI मॉडल Claude Mythos को लेकर दुनिया भर के रेगुलेटर्स और बैंक चिंतित नजर आ रहे हैं, और भारत भी इस खतरे को गंभीरता से ले रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत सरकार ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में बैंकों को सलाह दी गई कि वे Mythos जैसे एडवांस AI मॉडल से जुड़े संभावित साइबर खतरों के लिए पूरी तरह सतर्क रहें। केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बैंकों से अपने IT सिस्टम, नेटवर्क सिक्योरिटी और कस्टमर डेटा प्रोटेक्शन को “प्रो-एक्टिव मोड” में लाने के निर्देश दिए गए। सरकार की चिंता की एक बड़ी वजह यह है कि Anthropic ने खुद माना है कि Mythos जैसे AI मॉडल कुछ साइबर सिक्योरिटी टास्क में इंसानों से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। यह मॉडल सॉफ्टवेयर की पुरानी और नई कमजोरियों को तेजी से खोज सकता है और उनके लिए एक्सप्लॉइट तैयार कर सकता है। रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि टेस्टिंग के दौरान इस मॉडल तक अनऑथराइज्ड एक्सेस की घटना हुई, जिससे इसके दुरुपयोग की आशंका और बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई सेंट्रल बैंक और रेगुलेटर्स इस मॉडल को लेकर सतर्क हैं। कुछ संस्थान इसे डिफेंसिव साइबर सिक्योरिटी के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं, ताकि सिस्टम की कमजोरियों को पहले ही पकड़ा जा सके। लेकिन साथ ही यह डर भी है कि अगर ऐसा शक्तिशाली AI गलत हाथों में चला गया, तो बैंकिंग और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े साइबर हमले हो सकते हैं। भारत में RBI और NPCI पहले से ही डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा के लिए कड़े मानक लागू कर चुके हैं। लेकिन Mythos जैसे AI मॉडल अपनी स्पीड और स्केल की वजह से गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। ये कुछ ही समय में हजारों कमजोरियों को स्कैन और एक्सप्लॉइट कर सकते हैं, जिससे साइबर खतरे और बढ़ सकते हैं। आम ग्राहकों के लिए इसका मतलब है कि साइबर फ्रॉड के खतरे अब सिर्फ बढ़ेंगे ही नहीं, बल्कि ज्यादा एडवांस भी हो सकते हैं। फिशिंग, मालवेयर, अकाउंट हैकिंग और डेटा ब्रीच जैसी घटनाएं पहले से ज्यादा स्मार्ट और खतरनाक बन सकती हैं। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल यह सिर्फ एक “अर्ली वार्निंग” और तैयारी का चरण है। Claude Mythos को अभी भारत में पब्लिक-फेसिंग टूल के रूप में इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी गई है। कुल मिलाकर यह कदम दिखाता है कि भारत AI को सिर्फ इनोवेशन या स्टार्टअप के नजरिए से नहीं देख रहा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता के नजरिए से भी गंभीरता से ले रहा है। आने वाले समय में हाई-कैपेबिलिटी AI मॉडल्स के लिए सख्त नियम, लाइसेंसिंग, थर्ड-पार्टी ऑडिट और रिस्क असेसमेंट जैसे कदम देखने को मिल सकते हैं, खासकर तब जब इनका इस्तेमाल बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर या पब्लिक पॉलिसी में किया जाएगा।
Continue Reading29 अप्रैल 2026
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1 मई 2026