अमेरिका-ईरान संघर्ष भले ही तकनीकी रूप से खत्म बताया जा रहा है, लेकिन 1 मई की War Powers डेडलाइन ने ट्रम्प प्रशासन को मुश्किल में डाल दिया है। अब या तो युद्ध पूरी तरह खत्म करना होगा या कांग्रेस से मंजूरी लेनी होगी।
अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी के अंत में शुरू हुआ सैन्य तनाव, अप्रैल की शुरुआत में घोषित युद्धविराम के बाद अब तकनीकी रूप से “खत्म” माना जा रहा है। ट्रम्प प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, पिछले करीब तीन हफ्तों से दोनों देशों के बीच कोई सीधा गोलीबारी वाला टकराव नहीं हुआ है, इसलिए War Powers Resolution के हिसाब से “hostilities” समाप्त मानी जा रही हैं।
लेकिन इसी बीच आज 1 मई की अहम संवैधानिक डेडलाइन आ गई है, जिसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर दबाव बढ़ा दिया है। इस डेडलाइन के तहत उन्हें या तो सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह खत्म घोषित करना होगा या फिर कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी लेकर इसे आगे बढ़ाना होगा।
Continue Reading1 मई 2026
अब तक कांग्रेस से कोई स्पष्ट अनुमति नहीं मिली है, जबकि अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बनाए रखी है और ईरान पर दबाव बनाने के लिए बंदरगाहों की नाकेबंदी जैसे कदम जारी हैं। दूसरी तरफ, ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने फिर से हमले शुरू किए तो उसका जवाब “लंबा और दर्दनाक” होगा, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि चूंकि फिलहाल युद्धविराम लागू है और सक्रिय लड़ाई नहीं हो रही, इसलिए War Powers कानून की 60 दिन की सीमा उन पर सीधे लागू नहीं होती। लेकिन इस दलील ने अमेरिकी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
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कई सांसदों का मानना है कि अगर सैनिक तैनात हैं, नाकेबंदी जारी है और सैन्य दबाव बना हुआ है, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है। वहीं प्रशासन के समर्थक कहते हैं कि जब तक खुले तौर पर युद्ध नहीं हो रहा, तब तक इसे “पूर्ण युद्ध” नहीं कहा जा सकता और राष्ट्रपति को रणनीतिक दबाव बनाए रखने का अधिकार है।
इस पूरे विवाद का असर आम लोगों पर भी साफ दिख रहा है। तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक बाजार में कीमतों को ऊंचाई पर पहुंचा दिया, हालांकि हाल में थोड़ी राहत जरूर मिली है। मध्य पूर्व में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति रोजमर्रा की जिंदगी, रोजगार और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही है, जबकि दुनिया भर के लोग महंगे ईंधन और बढ़ती महंगाई का बोझ झेल रहे हैं।
Continue Reading30 अप्रैल 2026
अब सबकी नजर इस बात पर है कि 1 मई की डेडलाइन के बाद ट्रम्प प्रशासन और अमेरिकी कांग्रेस क्या फैसला लेते हैं, क्योंकि यही आने वाले दिनों में हालात की दिशा तय करेगा।
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30 अप्रैल 2026