उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में एक आक्रामक गिलहरी ने 18–20 लोगों को काट लिया। रेस्क्यू टीम ने काफी मशक्कत के बाद उसे पकड़ा, जबकि वन विभाग अलर्ट पर है।
उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी से एक हैरान करने वाली लेकिन गंभीर खबर सामने आई है। कैंपस में घूम रही एक छोटी सी गिलहरी ने अचानक आक्रामक रूप ले लिया और देखते ही देखते 18 से 20 लोगों को काट लिया। इस घटना में कॉलेज के डीन समेत कई छात्र और स्टाफ घायल हुए हैं। सोशल मीडिया पर इस गिलहरी को ‘आतंकी गिलहरी’ तक कहा जाने लगा, लेकिन मामला मजाक से कहीं ज्यादा गंभीर बन चुका है।
शुरुआत में किसी ने इस गिलहरी के व्यवहार को गंभीरता से नहीं लिया। छात्रों ने इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन जब लगातार कई लोगों के काटे जाने की घटनाएं सामने आने लगीं, तब प्रशासन तुरंत एक्टिव हुआ। घायल लोगों को फौरन नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें एंटी-रेबीज़ इंजेक्शन और जरूरी ट्रीटमेंट दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक सभी की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन एहतियात के तौर पर आगे की डोज़ लेना जरूरी बताया गया है।
Continue Reading1 मई 2026
इस पूरी घटना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा रहा गिलहरी को पकड़ना। वन विभाग और रेस्क्यू टीम को मौके पर बुलाया गया। टीम ने जाल और केज ट्रैप का इस्तेमाल किया, लेकिन गिलहरी इतनी फुर्तीली थी कि वह लंबे समय तक पेड़ों और बिल्डिंग के बीच भागती रही। इससे रेस्क्यू ऑपरेशन काफी मुश्किल हो गया और टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार लगातार कोशिशों के बाद गिलहरी को सुरक्षित पकड़ लिया गया, ताकि उसकी हेल्थ जांची जा सके और आगे किसी खतरे से बचा जा सके।
कैंपस के छात्रों के लिए यह घटना बेहद चौंकाने वाली रही। आमतौर पर यूनिवर्सिटी कैंपस में कुत्ते या बंदरों की शिकायतें सुनने को मिलती हैं, लेकिन एक छोटी सी गिलहरी का इस तरह लोगों पर हमला करना असामान्य है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा व्यवहार किसी बीमारी, इंफेक्शन या डर की वजह से हो सकता है, जिससे जानवर असामान्य और आक्रामक हो जाता है।
Continue Reading1 मई 2026
यह घटना एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है—क्या हमारे शहरी और अर्धशहरी कैंपस वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट के लिए तैयार हैं? कैंपस में मौजूद पेड़-पौधे, ग्रीन एरिया और खुले कूड़ेदान अक्सर छोटे-बड़े जानवरों को आकर्षित करते हैं। अगर इन जानवरों की गतिविधियों और हेल्थ पर समय-समय पर ध्यान न दिया जाए, तो ऐसे छोटे लेकिन खतरनाक टकराव बढ़ सकते हैं।
अब यूनिवर्सिटी प्रशासन और वन विभाग मिलकर आगे की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसमें कैंपस में वाइल्डलाइफ सर्वे, छात्रों के लिए अवेयरनेस कैंपेन और इमरजेंसी हेल्पलाइन जैसी पहल शामिल हो सकती हैं। छात्रों को यह भी सलाह दी जा रही है कि वे जानवरों को खाना न खिलाएं और उन्हें छेड़ने से बचें।
Continue Reading30 अप्रैल 2026
इस घटना से आम लोगों के लिए भी एक जरूरी सीख निकलती है। चाहे जानवर छोटा हो या बड़ा, अगर उसका व्यवहार असामान्य लगे तो तुरंत दूरी बनाना ही समझदारी है। ‘क्यूट’ समझकर पास जाना कभी-कभी खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत प्रशासन या वन विभाग को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
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