OpenAI अब भारत के हायर एजुकेशन सेक्टर में बड़े स्तर पर एंट्री कर रहा है। कंपनी छह बड़े कॉलेजों और संस्थानों के साथ मिलकर AI को पढ़ाई के मुख्य सिस्टम में शामिल करेगी और अगले एक साल में 1 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स व फैकल्टी तक पहुंचेगी। भारत पहले ही ChatGPT का दूसरा सबसे बड़ा यूज़र बेस है। अब OpenAI कैंपस एक्सेस, फैकल्टी ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन के जरिए AI स्किल्स को मजबूत करना चाहता है। Google और Microsoft भी भारत में AI ट्रेनिंग बढ़ा रहे हैं। साफ है कि मुकाबला सिर्फ AI टूल्स देने का नहीं, बल्कि यह तय करने का है कि AI कैसे पढ़ाया और इस्तेमाल किया जाएगा।
OpenAI भारत के हायर एजुकेशन सेक्टर में एंट्री कर रहा है, जब देश AI स्किल्स को बड़े स्तर पर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। OpenAI अब भारत में अपना दायरा बढ़ा रहा है और देश के बड़े कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ के साथ पार्टनरशिप कर रहा है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब भारत AI स्किल्स को तेजी से बढ़ाना चाहता है और दुनिया के सबसे बड़े टैलेंट मार्केट्स में से एक में अपनी मजबूत पकड़ बनाना चाहता है। बुधवार को OpenAI ने बताया कि वह भारत के छह पब्लिक और प्राइवेट हायर-एजुकेशन संस्थानों के साथ साझेदारी कर रहा है। इनमें टॉप इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, मेडिकल और डिजाइन इंस्टीट्यूट शामिल हैं। लक्ष्य है कि अगले एक साल में 1 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स, फैकल्टी और स्टाफ तक पहुंच बनाई जाए। यह पहल सिर्फ कंज्यूमर यूज़ पर फोकस नहीं करती। इसका मकसद AI को सीधे अकादमिक सिस्टम के मुख्य कामों में जोड़ना है। इससे साफ है कि OpenAI यह प्रभावित करना चाहता है कि AI कैसे पढ़ाया जाए, कैसे नियंत्रित किया जाए और कैसे सामान्य तरीके से इस्तेमाल किया जाए, खासकर दुनिया के सबसे बड़े हायर-एजुकेशन सिस्टम्स में से एक में। OpenAI पहले ही अपने ChatGPT चैटबॉट के जरिए भारत में बड़ी कंज्यूमर ऑडियंस बना चुका है। CEO Sam Altman के मुताबिक, भारत में ChatGPT के 10 करोड़ से ज्यादा मंथली एक्टिव यूज़र्स हैं। अमेरिका के बाद भारत कंपनी का दूसरा सबसे बड़ा यूज़र बेस बन चुका है। यह ऐलान ऐसे समय पर हुआ है जब कई बड़ी AI कंपनियां भारत में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर रही हैं। इस हफ्ते नई दिल्ली में AI Impact Summit भी हो रहा है। पहले चरण के पार्टनर्स में भारत के कुछ सबसे प्रभावशाली संस्थान शामिल हैं, जैसे Indian Institute of Technology Delhi, Indian Institute of Management Ahmedabad और All India Institute of Medical Sciences New Delhi। इनके साथ प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ और स्पेशलाइज्ड डिजाइन स्कूल भी जुड़े हैं। ChatGPT बनाने वाली कंपनी ने कहा कि यह साझेदारी इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, हेल्थकेयर और क्रिएटिव फील्ड्स तक फैलेगी। भारत पहले ही एजुकेशन में AI इस्तेमाल के लिए एक अहम टेस्टिंग ग्राउंड बन चुका है। पिछले महीने Google ने कहा था कि उसकी Gemini लर्निंग टूल्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारत में हो रहा है। इसी तरह Microsoft ने इस हफ्ते ऐलान किया कि वह अपने Elevate स्किलिंग प्रोग्राम को भारत में बढ़ाएगा, ताकि स्कूलों, वोकेशनल इंस्टीट्यूट्स और हायर-एजुकेशन संस्थानों के टीचर्स को AI ट्रेनिंग दी जा सके। यह काम सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर AI स्किल्स विकसित करने के लिए किया जाएगा। OpenAI ने कहा कि इन पार्टनरशिप्स के तहत कैंपस स्तर पर ChatGPT Edu टूल्स की पहुंच, फैकल्टी ट्रेनिंग और जिम्मेदार इस्तेमाल के फ्रेमवर्क शामिल होंगे। कंपनी का फोकस AI को कोडिंग, रिसर्च, एनालिटिक्स और केस एनालिसिस जैसे मुख्य अकादमिक कामों में शामिल करने पर है, न कि सिर्फ अलग से टूल एक्सेस देने पर। दो पार्टनर संस्थान—Indian Institute of Management Ahmedabad और Manipal Academy of Higher Education—OpenAI समर्थित सर्टिफिकेशन भी शुरू करेंगे। इसके अलावा, OpenAI भारतीय एड-टेक प्लेटफॉर्म्स जैसे Physics Wallah, upGrad और HCL GUVI के साथ भी काम करेगा, ताकि कैंपस के बाहर भी AI ट्रेनिंग पहुंचाई जा सके। ये प्लेटफॉर्म्स AI की बेसिक समझ और ChatGPT के यूज़-केस पर स्ट्रक्चर्ड कोर्स लॉन्च करेंगे, जो स्टूडेंट्स और शुरुआती करियर प्रोफेशनल्स के लिए होंगे। OpenAI India में एजुकेशन हेड राघव गुप्ता ने कहा कि एजुकेशनल संस्थान तेजी से आगे बढ़ रहे AI टूल्स और लोगों के असल इस्तेमाल के बीच की खाई को कम करने का एक “महत्वपूर्ण रास्ता” हैं, क्योंकि पूरी अर्थव्यवस्था में स्किल्स की मांग बदल रही है। पिछले साल OpenAI ने राघव गुप्ता को, जो पहले Coursera के एशिया-पैसिफिक मैनेजिंग डायरेक्टर थे, भारत और एशिया-पैसिफिक के लिए एजुकेशन हेड के रूप में नियुक्त किया था। साथ ही AI स्किल्स बढ़ाने पर फोकस करते हुए Learning Accelerator प्रोग्राम भी शुरू किया गया था। एजुकेशन सेक्टर में इस तरह की तेज़ हलचल दिखाती है कि AI कंपनियां अब सिर्फ कंज्यूमर टूल्स या कॉरपोरेट क्लाइंट्स तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। वे उन संस्थानों की तरफ बढ़ रही हैं जो स्किल्स, नियम और लंबे समय की अपनाने की प्रक्रिया को तय करते हैं। भारत जैसे देशों के लिए मुकाबला सिर्फ AI तक पहुंच का नहीं है, बल्कि यह भी है कि बड़े स्तर पर AI को कैसे पढ़ाया, नियंत्रित और लागू किया जाए — और यह तय कौन करेगा।
Continue Reading30 अप्रैल 2026
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30 अप्रैल 2026
1 मई 2026
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