भारत में स्मार्टफोन खरीदने का ट्रेंड बदल रहा है, जहां 89% यूजर्स अब AI फीचर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं और सिर्फ स्पेसिफिकेशन नहीं, बल्कि ओवरऑल एक्सपीरियंस पर ध्यान दे रहे हैं। साथ ही लोग लंबे समय तक चलने वाले फोन चाहते हैं, जिससे मार्केट अब एक्सपीरियंस-ड्रिवन और AI-केंद्रित होता जा रहा है।
भारत में स्मार्टफोन खरीदने का तरीका तेजी से बदल रहा है। Flipkart और Counterpoint Research की “Smartphone Insights Report 2026” के मुताबिक अब करीब 89% भारतीय यूजर्स फोन खरीदते समय AI फीचर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। यानी अब AI सिर्फ एक एक्स्ट्रा फीचर नहीं, बल्कि यूजर्स की बेसिक जरूरत बन चुका है। रिपोर्ट बताती है कि बाजार अब “स्पेसिफिकेशन-ड्रिवन” से “एक्सपीरियंस-ड्रिवन” फेज में पहुंच चुका है। पहले लोग RAM, स्टोरेज, कैमरा मेगापिक्सल और प्रोसेसर स्पीड पर ध्यान देते थे, लेकिन अब फोकस रियल लाइफ यूज पर है—जैसे कैमरा क्वालिटी, बैटरी बैकअप, ऐप परफॉर्मेंस, नेटवर्क स्टेबिलिटी और UI की स्मूदनेस। AI का रोल यहां सबसे अहम बन गया है। आज यूजर्स वॉइस असिस्टेंट, फोटो ऑटो-एन्हांस, स्मार्ट सर्च, चैट समरी, सोशल मीडिया एडिटिंग और ट्रांसलेशन जैसे फीचर्स का रोजमर्रा में इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार AI अब “डिफरेंशिएटर” नहीं बल्कि “बेसलाइन फीचर” बन चुका है। यानी अगर किसी फोन में AI का अच्छा अनुभव नहीं है, तो यूजर्स उसे नजरअंदाज भी कर सकते हैं। एक और बड़ा बदलाव यह है कि अब लोग हर साल फोन बदलने के बजाय लंबे समय तक इस्तेमाल करने वाले डिवाइस चुन रहे हैं। यूजर्स चाहते हैं कि फोन 3-4 साल तक स्मूद चले, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट मिले और रीसेल वैल्यू भी अच्छी बनी रहे। इसी वजह से मिड-रेंज फोन में भी 2-3 साल के मेजर अपडेट और 4 साल तक सिक्योरिटी अपडेट की डिमांड बढ़ रही है। इस ट्रेंड का असर कंपनियों की मार्केटिंग स्ट्रेटेजी पर भी दिख रहा है। अब ब्रांड सिर्फ “12GB RAM” या “108MP कैमरा” जैसे टैगलाइन पर नहीं, बल्कि “AI-पावर्ड कैमरा”, “स्मार्ट बैटरी” और “पर्सनलाइज्ड UI” जैसे एक्सपीरियंस-आधारित फीचर्स पर जोर दे रहे हैं। साथ ही लोकल लैंग्वेज AI फीचर्स—जैसे वॉइस टाइपिंग, रियल-टाइम ट्रांसलेशन और कंटेंट रिकमेंडेशन—टियर-2 और टियर-3 शहरों में खास भूमिका निभा सकते हैं। यह बदलाव भारतीय डेवलपर इकोसिस्टम के लिए भी बड़ा मौका है। अब ऐप डेवलपर्स को अपने प्रोडक्ट्स को AI-फर्स्ट सोच के साथ डिजाइन करना होगा, ताकि यूजर्स को बेहतर और पर्सनलाइज्ड अनुभव मिल सके, खासकर कम इंटरनेट वाले इलाकों में भी। आने वाले 2-3 साल में उम्मीद है कि बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन्स में भी ऑन-डिवाइस जनरेटिव AI, स्मार्ट फोटोग्राफी और लोकल लैंग्वेज मॉडल्स तेजी से पहुंचेंगे। जो कंपनियां AI को सिर्फ मार्केटिंग नहीं बल्कि गहराई से अपने प्रोडक्ट में शामिल करेंगी, वही इस नए “एक्सपीरियंस-ड्रिवन” मार्केट में आगे रहेंगी।
Continue Reading28 अप्रैल 2026
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29 अप्रैल 2026