जोधपुर के 1000+ सरकारी स्कूलों में AI आधारित कॉपी जांच शुरू हो गई है। सिर्फ 3 दिनों में 70 हजार छात्रों की 3 लाख कॉपियां जांची गईं, जिससे शिक्षा प्रणाली तेज और ज्यादा स्मार्ट बनी है।
जोधपुर जिले के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ-साथ टेक्नोलॉजी का भी बड़ा रोल देखने को मिल रहा है। शिक्षा विभाग ने एक नया और इनोवेटिव कदम उठाते हुए छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए Artificial Intelligence (AI) सिस्टम लागू कर दिया है। यह व्यवस्था फिलहाल जिले के 1000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में लागू की गई है और खासतौर पर कक्षा 6 से 9 तक के छात्रों के लिए इस्तेमाल हो रही है।
अधिकारियों के अनुसार, इस नई तकनीक की मदद से सिर्फ तीन दिनों के अंदर करीब 70 हजार छात्रों की लगभग 3 लाख कॉपियां जांच ली गईं। पहले यही काम करने में कई हफ्ते लग जाते थे। अब यह पूरी प्रक्रिया बेहद तेज, सटीक और आसान हो गई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
यह पहल ‘योग्यता आधारित मूल्यांकन और स्कूल रिपोर्टिंग प्रायोगिक परियोजना’ के दूसरे चरण का हिस्सा है। इसकी शुरुआत अक्टूबर 2025 में जोधपुर ब्लॉक के 54 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी, जहां करीब 3000 छात्रों पर इसका परीक्षण किया गया। जब इसके परिणाम सकारात्मक आए, तो इसे पूरे जिले में लागू कर दिया गया। अब हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के सरकारी स्कूलों में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे मुख्य विषयों की कॉपियां AI के जरिए जांची जा रही हैं।
Continue Reading1 मई 2026
इस प्रक्रिया में शिक्षक एक खास मोबाइल ऐप का उपयोग करते हैं, जिससे वे छात्रों की कॉपियों को स्कैन करते हैं। स्कैन होते ही ये कॉपियां क्लाउड आधारित AI सिस्टम तक पहुंच जाती हैं, जहां एल्गोरिदम तय मानकों के आधार पर उनका मूल्यांकन करता है। यह सिस्टम सिर्फ कुल अंक ही नहीं देता, बल्कि हर प्रश्न और हर स्किल के हिसाब से डिटेल एनालिसिस भी तैयार करता है। जैसे अगर कोई छात्र गणित में अच्छा है लेकिन भाषा में कमजोर है, तो यह रिपोर्ट कार्ड में साफ दिखाई देता है।
जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि इस तकनीक से शिक्षकों का काफी समय बच रहा है। अब उन्हें कॉपियां जांचने में घंटों या दिनों का समय नहीं देना पड़ता, जिससे वे पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने और कमजोर छात्रों पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं। पहले जहां टेस्ट कॉपियां जांचने में हफ्तों लग जाते थे, अब वही काम कुछ ही दिनों में पूरा हो रहा है और डेटा तुरंत उपलब्ध हो जाता है।
Continue Reading27 अप्रैल 2026
अभिभावकों के लिए भी यह बदलाव काफी फायदेमंद है। अब उन्हें सिर्फ नंबरों वाला रिपोर्ट कार्ड नहीं मिलता, बल्कि एक पूरी डिटेल रिपोर्ट मिलती है, जिसमें बच्चे की ताकत, कमजोरी और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्र साफ नजर आते हैं। इससे वे बच्चों के लिए बेहतर फैसले ले सकते हैं, जैसे किस विषय में ज्यादा ध्यान देना है या कहां एक्स्ट्रा प्रैक्टिस की जरूरत है।
हालांकि, कुछ शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने इस पर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि पूरी तरह AI पर निर्भर रहना थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि भाषा और भाव की बारीकियां मशीन हर बार सही तरीके से समझ नहीं पाती। फिलहाल इस सिस्टम को ‘ह्यूमन इन द लूप’ मोड में रखा गया है, यानी अंतिम निर्णय और निगरानी शिक्षक ही करते हैं। साथ ही, AI को लगातार बेहतर बनाने के लिए फीडबैक भी लिया जा रहा है।
Continue Reading30 अप्रैल 2026
आने वाले समय में राज्य सरकार इस मॉडल को राजस्थान के अन्य जिलों में भी लागू करने पर विचार कर रही है। अगर जोधपुर में इसके सकारात्मक परिणाम लगातार सामने आते हैं, तो यह सरकारी स्कूलों की पूरी तस्वीर बदल सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि अब सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी बिना अतिरिक्त खर्च के प्राइवेट स्कूल जैसी स्मार्ट और डेटा आधारित शिक्षा का फायदा मिलने लगेगा।
Disclaimer:
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30 अप्रैल 2026