जोधपुर के लूणवपुरा गांव में ANTF ने अवैध MD ड्रग फैक्ट्री पर बड़ी कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। करीब 90 करोड़ रुपये का कच्चा माल बरामद हुआ है और अब interstate ड्रग नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।
जोधपुर में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को बड़ी कामयाबी मिली है। लूणवपुरा गांव के पास खेतों के बीच संचालित अवैध MD ड्रग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पर छापा मारकर पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन विषग्रहन’ के तहत बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक कार्रवाई तड़के करीब साढ़े तीन बजे की गई, जब टीम गुप्त सूचना के आधार पर ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए मौके पर पहुंची।
छापेमारी के दौरान आरोपियों ने भागने की कोशिश की और फायरिंग भी की, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। हालांकि इस दौरान किसी पुलिसकर्मी को चोट नहीं लगी, जबकि दो आरोपी भागने के दौरान घायल हो गए। मौके से 176.63 किलो MD ड्रग बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल बरामद किया गया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 90 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह बरामदगी अब तक की बड़ी कार्रवाईयों में से एक मानी जा रही है।
जांच में सामने आया है कि खेतों के बीच बने एक अलग-थलग भवन में यह फैक्ट्री संचालित की जा रही थी, ताकि किसी को शक न हो और लंबे समय तक नेटवर्क गुपचुप तरीके से चलता रहे। यहां केमिकल रिएक्टर, मिक्सिंग यूनिट और पैकेजिंग से जुड़ा बेसिक सेटअप भी मिला है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि यह केवल छोटी अवैध लैब नहीं, बल्कि व्यवस्थित सिंथेटिक ड्रग उत्पादन केंद्र के तौर पर काम कर रही थी।
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पुलिस को शक है कि मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। शुरुआती पूछताछ में interstate सिंडिकेट की आशंका सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कच्चा माल कहां से आता था, तैयार ड्रग किन राज्यों में भेजी जाती थी और इसके पीछे कौन फाइनेंसर या बड़े नेटवर्क जुड़े हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और कई अन्य नाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
जोधपुर और आसपास के इलाकों में पहले भी सिंथेटिक ड्रग्स की छोटी-मोटी बरामदगी होती रही है, लेकिन पूरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का पकड़ा जाना यह दिखाता है कि नशा तस्करी का नेटवर्क कितनी गहराई तक फैल चुका है। यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब फोकस सिर्फ सप्लाई चेन के निचले स्तर पर नहीं, बल्कि उसके स्रोत पर वार करने का दिख रहा है।
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स्थानीय लोगों के लिए भी यह खुलासा चौंकाने वाला है। गांवों और आबादी के पास ऐसी फैक्ट्रियों का संचालन सिर्फ कानून व्यवस्था ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा माना जाता है। केमिकल लीकेज, आग लगने का जोखिम और अपराधियों की मौजूदगी जैसे कई खतरे इससे जुड़े रहते हैं। ऐसे में इस कार्रवाई को लोगों ने राहत भरी खबर के तौर पर देखा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह ऑपरेशन कई संदेश देता है। पहला, पुलिस अब ड्रग्स के रिटेल नेटवर्क से आगे बढ़कर उत्पादन और सप्लाई की जड़ों तक पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है। दूसरा, अगर जांच में interstate या बड़े गिरोहों तक कड़ियां जुड़ती हैं, तो आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं। तीसरा, इस केस में मजबूत चार्जशीट, फोरेंसिक सबूत और तेज कानूनी कार्रवाई बेहद अहम होगी, ताकि आरोपी कानून की पकड़ से बच न सकें।
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अब नजर इस पर है कि क्या इस कार्रवाई के बाद राजस्थान में सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ और बड़ा स्पेशल ड्राइव शुरू होगा। फिलहाल जोधपुर में हुई यह रेड नशा माफिया के खिलाफ बड़ा प्रहार मानी जा रही है, जिसने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि ड्रग नेटवर्क के खिलाफ लड़ाई अब और तेज होने वाली है।
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