भारत और जर्मनी के बीच करीब 8 अरब डॉलर की पनडुब्बी डील जल्द साइन हो सकती है। जर्मन रक्षा मंत्री के अनुसार अगले 3 महीनों में समझौता होने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट में जर्मनी की TKMS और भारत की मझगांव डॉक शामिल हैं, जिससे भारत की नौसेना और समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी।
भारत और जर्मनी के बीच लंबे समय से चल रही पनडुब्बी (Submarine) डील अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा है कि दोनों देशों के बीच करीब 8 अरब डॉलर (लगभग 66,000 करोड़ रुपये) की इस बड़ी डील पर जल्द ही हस्ताक्षर हो सकते हैं। जल्द हो सकती है डील साइन जर्मन रक्षा मंत्री ने भरोसा जताते हुए कहा कि वह इस समझौते को जल्द साइन करने को लेकर “काफी आश्वस्त” हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले तीन महीनों के भीतर इस डील पर औपचारिक मुहर लग सकती है। यह बयान उस समय आया जब भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जर्मनी के दौरे पर थे और बर्लिन में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। कौन-कौन सी कंपनियां शामिल?
यह पनडुब्बी प्रोजेक्ट कई महीनों से तैयार किया जा रहा है और इसमें: जर्मनी की प्रमुख वॉरशिप निर्माता कंपनी TKMS (Thyssenkrupp Marine Systems) भारत की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (Mazagon Dock Shipbuilders) मुख्य भूमिका निभा रही हैं। डील क्यों है अहम?
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यह डील भारत की नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके तहत अत्याधुनिक पनडुब्बियों का निर्माण और सहयोग होगा, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा और रक्षा क्षमता मजबूत होगी। लंबे समय से चल रही थी बातचीत यह समझौता पिछले कई महीनों से चर्चा में है और अब यह अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और गहरा करने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है। निष्कर्ष अगर यह डील तय समय में साइन हो जाती है, तो यह भारत-जर्मनी रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई देगी और भारतीय नौसेना को आधुनिक तकनीक से लैस करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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