जोधपुर में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त अभियान शुरू किया है, जिसमें चालान और ज़ब्ती की कार्रवाई हो रही है। इसके बावजूद अवैध खनन पर्यावरण, सड़कों और भूजल के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। सरकार नई तकनीक से रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर चुनौतियां बनी हुई हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की सुरक्षा, रोजमर्रा की जिंदगी और गांवों की हालत पर पड़ रहा है।
जोधपुर लोकल: अवैध खनन पर सख्ती, प्रशासन की कार्रवाई तेज जोधपुर जिले में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने हाल के दिनों में अभियान तेज कर दिया है। राजस्थान की दैनिक बुलेटिन में भी इसे आज की बड़ी खबरों में शामिल किया गया। स्थानीय स्तर पर खनन माफिया और ट्रैक्टर-ट्रॉली ऑपरेटरों पर नजर रखते हुए कई जगह चालान और ज़ब्ती की कार्रवाई सामने आई है, हालांकि आधिकारिक आंकड़े अभी सीमित ही जारी किए गए हैं। राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में अवैध बजरी, पत्थर और खनिज का खनन लंबे समय से पर्यावरण और सरकारी राजस्व दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकारी बुलेटिन में संकेत दिया गया कि इस तरह के खनन से न सिर्फ सड़क और बुनियादी ढांचे को नुकसान होता है, बल्कि जमीन का संतुलन और जल स्रोत भी प्रभावित होते हैं। प्रशासन की तरफ से राजस्व, खनन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमें सीमावर्ती इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय भारी वाहन बिना नंबर प्लेट या धुंधली नंबर प्लेट के साथ चलते हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। कई बार जब ग्रामीण विरोध करते हैं तो टकराव की स्थिति बन जाती है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कार्रवाई के दौरान छोटे ट्रैक्टर चालकों पर ज्यादा दबाव डाला जाता है, जबकि बड़े नेटवर्क पर उतनी सख्ती नहीं दिखती। सरकार का कहना है कि सैटेलाइट मैपिंग, ड्रोन सर्वे और डिजिटल रिकॉर्ड जैसे उपायों से अवैध खनन पर रोक लगाने की कोशिश हो रही है, लेकिन ज़मीन पर हालात अभी पूरी तरह ठीक नहीं हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जब तक रॉयल्टी रेट, परमिट की जटिल प्रक्रिया और निर्माण क्षेत्र में बढ़ती मांग जैसी मूल वजहों को नहीं सुधारा जाएगा, तब तक सिर्फ छापेमारी से स्थायी समाधान मुश्किल रहेगा। आम लोगों पर इसका सीधा असर सड़कों की हालत, पर्यावरण और भूजल पर पड़ता है। जहां ज्यादा अवैध खनन होता है, वहां जमीन धंसने, धूल प्रदूषण और भारी वाहनों की वजह से हादसों का खतरा बढ़ जाता है। गांवों के रास्ते खराब होने से बच्चों की पढ़ाई, किसानों के काम और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है। इसलिए जोधपुर में चल रहा यह अभियान सीधे आम लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
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1 मई 2026
29 अप्रैल 2026