नेपाल में बाढ़ के बाद तमिलनाडु के कई तीर्थयात्रियों के लापता होने का मामला विधानसभा में पहुंच गया है। सरकार ने 20 लोगों के सुरक्षित होने की जानकारी दी है, जबकि बाकी लोगों से संपर्क और उनकी तलाश जारी है। इस मुद्दे पर TVK सरकार और DMK के बीच सदन में तीखी बहस हुई।
नेपाल में बाढ़ के बाद तमिलनाडु के कई तीर्थयात्रियों के लापता होने का मामला अब तमिलनाडु विधानसभा तक पहुंच गया है। सरकार ने 20 लोगों के सुरक्षित होने की जानकारी दी है, जबकि बाकी लोगों की तलाश और उनसे संपर्क की कोशिश जारी है।
चेन्नई, 28 अगस्त। नेपाल में आई फ्लैश फ्लड के बाद तमिलनाडु के तीर्थयात्रियों के लापता होने को लेकर गुरुवार को तमिलनाडु विधानसभा में सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। विपक्षी DMK ने सरकार से लापता लोगों की सही जानकारी और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर जवाब मांगा।
मामले पर चर्चा शुरू होने से पहले स्कूल शिक्षा मंत्री राज मोहन ने नेपाल में फंसे और लापता तीर्थयात्रियों को लेकर सरकार की ओर से किए जा रहे काम की जानकारी देने की कोशिश की। इस पर DMK के सदस्यों ने सवाल उठाया कि Calling Attention Motion पर चर्चा से पहले सरकार को बयान देने की अनुमति क्यों दी जा रही है।
विधानसभा अध्यक्ष JCD प्रभाकर ने इस दौरान पिछली DMK सरकार के समय हुई करूर त्रासदी का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विधानसभा में बयान दिया था। बाद में अध्यक्ष ने विपक्ष के Calling Attention Motion को पहले लेने की अनुमति दे दी।
अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे मामलों में यह देखना जरूरी है कि जनता से जुड़े मुद्दे सदन में उठाए जाएं। उनका कहना था कि बहस का आधार यह नहीं होना चाहिए कि किसी मुद्दे को पहले किसने उठाया।
उदयनिधि स्टालिन ने सरकार से मांगा जवाब विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि नेपाल की घटना की तुलना करूर की घटना से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि करूर मामले में मुख्यमंत्री खुद सदन में मौजूद थे और उन्होंने बयान दिया था, जबकि इस बार मुख्यमंत्री सदन में मौजूद नहीं थे।
उदयनिधि ने सरकार से नेपाल में मौजूद तमिलनाडु के लोगों की जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि कितने तीर्थयात्री प्रभावित हुए हैं और कितने लोगों को अब तक सुरक्षित निकाला गया है।
उन्होंने हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी। इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि लापता लोगों की तलाश के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं और क्या किसी अधिकारी को इस काम की जिम्मेदारी दी गई है।
विपक्ष के नेता ने यह भी सवाल किया कि क्या तमिलनाडु सरकार का कोई दल नेपाल भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि कई परिवार अपने परिजनों से संपर्क नहीं होने के कारण परेशान हैं।
उदयनिधि ने यह भी पूछा कि सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज जस्टिस शिवज्ञानम भी प्रभावित लोगों में शामिल हैं या नहीं।
सरकार ने 20 लोगों के सुरक्षित होने की जानकारी दी Calling Attention Motion का जवाब देते हुए मंत्री राज मोहन ने बताया कि तमिलनाडु सरकार विदेश मंत्रालय और नेपाल में मौजूद भारतीय दूतावास के संपर्क में है। सरकार नेपाल की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।
मंत्री के अनुसार, तमिलनाडु के 10 जिलों से 57 लोग कैलाश यात्रा के लिए नेपाल गए थे। इनके साथ पुडुचेरी के तीन लोग भी थे। इनमें से 20 तमिल तीर्थयात्रियों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।
बताया गया कि ये लोग नेपाल में Armed Police Force के एक कैंप में रुके हुए हैं। तमिलनाडु सरकार इन लोगों को दूसरे रास्ते से काठमांडू लाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि बाढ़ के बाद यात्रा को लेकर परेशानी बनी हुई है।
सरकार के अनुसार, बाकी 34 लोगों के बारे में जानकारी मिलने में समय लग रहा था। उनके ठिकाने का पता लगाने और उनसे संपर्क करने की कोशिश लगातार जारी है।
49 और तमिल तीर्थयात्रियों की जानकारी जुटाई जा रही मंत्री ने विधानसभा में एक दूसरे समूह की भी जानकारी दी। चेन्नई की महादेव कैलाश यात्रा एजेंसी 49 अन्य तमिल तीर्थयात्रियों को नेपाल लेकर गई थी।
सरकार इस समूह के लोगों की स्थिति का पता लगा रही है। साथ ही उनकी आगे की यात्रा की योजना और वे इस समय कहां हैं, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है।
नेपाल में बाढ़ के बाद रास्तों और संपर्क व्यवस्था पर असर पड़ा है। इसी वजह से कई लोगों से तुरंत संपर्क नहीं हो पा रहा है। तमिलनाडु सरकार विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के साथ मिलकर लोगों की जानकारी लेने की कोशिश कर रही है।
परिवारों को अपनों के लौटने का इंतजार नेपाल में फंसे और लापता बताए जा रहे लोगों के परिवार तमिलनाडु में अपने परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। सरकार की ओर से सुरक्षित लोगों की जानकारी मिलने के बाद कुछ परिवारों को राहत मिली है, लेकिन जिन लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है, उनके परिवारों की चिंता बनी हुई है।
इस पूरे मामले को लेकर विधानसभा में सरकार से साफ जानकारी देने की मांग की गई। DMK ने लापता लोगों की संख्या, बचाव की कोशिशों और परिवारों को दी जा रही मदद के बारे में सवाल उठाए हैं। सरकार ने कहा है कि नेपाल में मौजूद लोगों की जानकारी जुटाने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की कोशिश जारी है।
फिलहाल सरकार की नजर उन लोगों तक पहुंचने पर है, जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है। वहीं, सुरक्षित बताए गए तीर्थयात्रियों को काठमांडू लाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
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