कोविड-19 को लेकर हुई एक नई स्टडी में वैज्ञानिकों को ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि बीमारी के दौरान शरीर में पहले से मौजूद कुछ वायरस दोबारा सक्रिय हो सकते हैं। यह अध्ययन खास इसलिए है क्योंकि वायरल रिएक्टिवेशन के संकेत केवल उन मरीजों में नहीं मिले, जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली पहले से कमजोर थी, बल्कि कुछ ऐसे लोगों में भी दिखे जिनमें इम्यून सिस्टम कमजोर होने के स्पष्ट संकेत नहीं थे।
नई स्टडी में वैज्ञानिकों को पता चला है कि कोविड-19 के दौरान शरीर में पहले से मौजूद कुछ पुराने वायरस फिर से सक्रिय हो सकते हैं। अमेरिका के 20 अस्पतालों में भर्ती 1,154 मरीजों की जांच में करीब 47.9 प्रतिशत मरीजों में ऐसे संकेत मिले।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोविड हर व्यक्ति के शरीर में छिपे वायरस को जगा देता है। वैज्ञानिकों ने अभी यह भी साबित नहीं किया है कि इन वायरस की वजह से कोविड ज्यादा गंभीर हुआ या Long Covid हुआ।
शरीर में छिपे रहते हैं कुछ वायरस
कुछ वायरस शरीर में जाने के बाद पूरी तरह खत्म नहीं होते। वे शरीर की कोशिकाओं में शांत अवस्था में रह सकते हैं।
आमतौर पर शरीर की रोगों से लड़ने वाली ताकत यानी इम्यून सिस्टम इन वायरस को कंट्रोल में रखती है। लेकिन जब शरीर किसी गंभीर बीमारी या बहुत ज्यादा तनाव से गुजरता है, तो कुछ पुराने वायरस फिर से सक्रिय हो सकते हैं।
इसे वायरल रिएक्टिवेशन कहा जाता है।
इसका मतलब नया वायरस शरीर में आना नहीं है। इसका मतलब है कि शरीर में पहले से मौजूद पुराना वायरस फिर से सक्रिय होने लगा है।
1,154 कोविड मरीजों पर हुई जांच
स्टडी में अमेरिका के 20 अस्पतालों में भर्ती 1,154 कोविड मरीजों को शामिल किया गया था। इन मरीजों की बीमारी के दौरान और उसके बाद 12 महीने तक जानकारी ली गई।
वैज्ञानिकों ने मरीजों के खून, नाक के स्वैब और सांस की नली से जुड़े कुछ नमूनों की जांच की। जांच में कोरोना वायरस के अलावा दूसरे वायरस के संकेत तलाशे गए।
नतीजे में करीब 47.9 प्रतिशत मरीजों में कम से कम एक पुराने वायरस के फिर से सक्रिय होने के संकेत मिले।
कौन से वायरस सक्रिय हुए?
जांच में कई वायरस के संकेत मिले। इनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
Epstein-Barr virus यानी EBV Cytomegalovirus यानी CMV Herpes simplex virus-1 यानी HSV-1 Anelloviridae परिवार के वायरस
सभी वायरस एक ही समय पर सक्रिय नहीं हुए। स्टडी के अनुसार EBV बीमारी के शुरुआती समय में ज्यादा दिखाई दिया, जबकि HSV-1 और CMV बाद के समय में ज्यादा देखे गए।
क्या पुराने वायरस से कोविड गंभीर हुआ?
यह बात अभी साफ नहीं है।
स्टडी में पुराने वायरस के सक्रिय होने और गंभीर कोविड के बीच संबंध देखा गया। कुछ मरीजों में वायरस के सक्रिय होने के संकेत खराब स्वास्थ्य परिणामों से भी जुड़े थे।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पुराने वायरस ने ही कोविड को गंभीर बनाया।
संभव है कि गंभीर कोविड की वजह से शरीर पर ज्यादा दबाव पड़ा हो और इसी कारण पुराने वायरस सक्रिय हुए हों। यह भी संभव है कि दोनों के बीच किसी तरह का संबंध हो।
इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि वायरस के सक्रिय होने से कोविड गंभीर हुआ।
क्या Long Covid से भी संबंध है?
स्टडी में कुछ वायरस के सक्रिय होने और लंबे समय तक बनी रहने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के बीच भी संबंध देखा गया।
इससे वैज्ञानिकों को Long Covid को समझने के लिए एक नई दिशा मिल सकती है। लेकिन अभी यह साबित नहीं हुआ है कि शरीर में छिपे पुराने वायरस ही Long Covid का कारण हैं।
इस बारे में आगे और शोध की जरूरत है।
कमजोर इम्यून सिस्टम वालों में ही ऐसा नहीं हुआ
इस स्टडी की एक खास बात यह रही कि पुराने वायरस के सक्रिय होने के संकेत केवल कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीजों में ही नहीं मिले।
कुछ ऐसे मरीजों में भी ये संकेत दिखाई दिए, जिनमें इम्यून सिस्टम कमजोर होने के साफ संकेत नहीं थे।
इससे वैज्ञानिकों के सामने यह सवाल आया है कि कोविड के दौरान शरीर की बीमारी से लड़ने वाली व्यवस्था में होने वाले बदलाव पुराने वायरस को किस तरह प्रभावित करते हैं।
आम लोगों को क्या समझना चाहिए?
इस स्टडी का सीधा मतलब यह नहीं है कि कोविड होने पर शरीर के सभी पुराने वायरस सक्रिय हो जाएंगे।
अभी तक केवल इतना पता चला है कि अस्पताल में भर्ती कुछ कोविड मरीजों में पहले से मौजूद वायरस के दोबारा सक्रिय होने के संकेत मिले। इन संकेतों का गंभीर बीमारी और कुछ लंबे समय की स्वास्थ्य समस्याओं से संबंध भी देखा गया।
लेकिन यह साफ नहीं है कि पुराने वायरस बीमारी को बढ़ाते हैं या गंभीर बीमारी की वजह से पुराने वायरस सक्रिय होते हैं।
इसलिए इस खोज को अभी शुरुआती वैज्ञानिक जानकारी के तौर पर देखना चाहिए। आगे के बड़े अध्ययनों से ही पता चलेगा कि इन पुराने वायरस का कोविड और Long Covid में वास्तव में कितना रोल है।
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