राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने लोगों से भारतीय हैंडलूम कपड़े खरीदने और पहनने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे देश के बुनकरों और उनके परिवारों को मदद मिलेगी और भारत की पुरानी हथकरघा परंपरा को आगे बढ़ाने में भी सहयोग मिलेगा।
देश में हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से भारतीय हथकरघा यानी हैंडलूम को अपनाने की अपील की है। पीएम मोदी ने कहा कि जिस तरह लोग फ्रेंडशिप डे को अपने दोस्तों के साथ खास तरीके से मनाते हैं, उसी तरह राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को भी उत्साह के साथ मनाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश के जरिए लोगों से भारतीय हैंडलूम सामान खरीदने और पहनने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा बहुत पुरानी है और इसके पीछे देश के लाखों बुनकर परिवारों की मेहनत जुड़ी हुई है। एक हैंडलूम कपड़ा केवल पहनने की चीज नहीं है, बल्कि उसके पीछे एक बुनकर का हुनर, मेहनत और परिवार की रोजी-रोटी भी जुड़ी होती है।
पीएम मोदी ने लोगों से क्या अपील की? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को केवल एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहिए। लोगों को इस दिन भारतीय हैंडलूम कपड़े खरीदने और इस्तेमाल करने की कोशिश करनी चाहिए।
उन्होंने फ्रेंडशिप डे का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह लोग अपने दोस्तों के साथ इस दिन को खास बनाते हैं, उसी तरह हैंडलूम डे पर भी भारतीय बुनकरों के काम को सम्मान दिया जा सकता है। इसके लिए लोग साड़ी, कुर्ता, शर्ट, दुपट्टा या दूसरे हैंडलूम कपड़े खरीद सकते हैं। इससे सीधे तौर पर उन लोगों को फायदा मिलता है जो कपड़े बनाने और बुनने का काम करते हैं।
पीएम मोदी की अपील का एक मकसद लोगों को यह समझाना भी है कि स्थानीय सामान खरीदना केवल खरीदारी नहीं है। इससे देश के छोटे कारीगरों और बुनकरों का काम आगे बढ़ता है।
एक कपड़े के पीछे बुनकर की मेहनत भारत के अलग-अलग हिस्सों में बुनकर लंबे समय से हथकरघे पर कपड़े तैयार करते आ रहे हैं। हर इलाके की अपनी अलग पहचान और कपड़े बनाने का तरीका है। कई परिवार पीढ़ियों से इस काम से जुड़े हुए हैं।
हथकरघे पर कपड़ा तैयार करना आसान काम नहीं है। इसमें काफी समय और मेहनत लगती है। बुनकर धागे को तैयार करने से लेकर कपड़ा बनाने तक कई काम करते हैं। इसके बाद कपड़े को बाजार तक पहुंचाया जाता है।
ऐसे में जब कोई व्यक्ति हैंडलूम का कपड़ा खरीदता है तो उसका फायदा केवल दुकानदार तक नहीं रहता। इससे उस काम से जुड़े बुनकर और दूसरे लोग भी कमाई करते हैं। पीएम मोदी ने इसी मेहनत को देखते हुए लोगों से भारतीय हैंडलूम को ज्यादा अपनाने की बात कही है।
7 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय हथकरघा दिवस? राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है। इस दिन का संबंध वर्ष 1905 के स्वदेशी आंदोलन से है। 1905 में देश में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। उस समय लोगों से विदेशी सामान छोड़कर देश में बने सामान को अपनाने की अपील की गई थी। इसी वजह से 7 अगस्त का दिन भारतीय हथकरघा और स्वदेशी सामान से जुड़ा हुआ है।
भारत सरकार ने वर्ष 2015 से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाना शुरू किया। इसके बाद हर साल इस दिन बुनकरों और हैंडलूम से जुड़े लोगों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग कार्यक्रम और अभियान चलाए जाते हैं। इस दिन लोगों को भारतीय कपड़ों और हथकरघा सामान के इस्तेमाल के बारे में बताया जाता है। साथ ही बुनकरों की मेहनत और उनके काम को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है।
हैंडलूम और 'वोकल फॉर लोकल' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से लोगों से स्थानीय सामान खरीदने की अपील करते रहे हैं। इसे 'वोकल फॉर लोकल' यानी स्थानीय सामान के लिए आवाज उठाने की मुहिम से भी जोड़ा जाता है। हैंडलूम इस मुहिम का एक अहम हिस्सा है। भारत में बने कपड़े खरीदने से देश के छोटे कारोबारियों, कारीगरों और बुनकरों को काम मिलता है।
जब किसी बुनकर का बनाया कपड़ा बाजार में बिकता है तो इससे उसके परिवार की कमाई होती है। अगर ऐसे सामान की मांग बढ़ती है तो बुनकरों के काम को भी बढ़ावा मिल सकता है। इसी वजह से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर लोगों को भारतीय कपड़े खरीदने और इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
युवाओं तक पहुंचने की कोशिश पीएम मोदी का यह संदेश सोशल मीडिया पर वीडियो के जरिए सामने आया है। इसका एक खास पहलू यह भी है कि संदेश को युवाओं तक आसानी से पहुंचाने की कोशिश की गई है। आज बड़ी संख्या में युवा सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में वीडियो के जरिए हैंडलूम की बात युवाओं तक पहुंचाना आसान हो सकता है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में हैंडलूम को केवल पुराने समय की चीज के तौर पर देखने के बजाय इसे आज की जिंदगी से जोड़ने की कोशिश की। युवा अगर भारतीय कपड़ों को अपने पहनावे में शामिल करते हैं तो इससे हैंडलूम को नए खरीदार मिल सकते हैं। हैंडलूम कपड़ों को अलग-अलग तरह से पहना जा सकता है। इसे रोजमर्रा के कपड़ों से लेकर खास मौकों पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
बुनकर परिवारों के लिए क्यों जरूरी है हैंडलूम? भारत में बहुत से परिवार सीधे या किसी न किसी रूप में कपड़े और बुनाई के काम से जुड़े हुए हैं। ऐसे परिवारों के लिए यह काम कमाई का एक जरिया है। अगर बाजार में हैंडलूम कपड़ों की मांग बनी रहती है, तो बुनकरों के काम को भी सहारा मिलता है। इसके उलट अगर लोग ऐसे कपड़े खरीदना कम कर देते हैं तो इस काम से जुड़े परिवारों के सामने कमाई की परेशानी बढ़ सकती है।
इसी कारण राष्ट्रीय हथकरघा दिवस जैसे अवसरों पर लोगों को बुनकरों के काम को समझने और भारतीय कपड़े खरीदने के लिए कहा जाता है। यह दिन बुनकरों को सम्मान देने के साथ-साथ उनके काम को बाजार से जोड़ने का भी मौका देता है।
भारतीय हथकरघा की खास पहचान भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग तरह के हथकरघा कपड़े बनाए जाते हैं। यहां कपड़ों के रंग, डिजाइन और बनाने के तरीके में काफी विविधता देखने को मिलती है।
कई जगहों पर बुनकर अपने पुराने तरीकों से कपड़े तैयार करते हैं। इन तरीकों की जानकारी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती रही है। इस वजह से हथकरघा केवल कपड़ा बनाने का काम नहीं है। इसके साथ कई परिवारों की पुरानी परंपरा और उनकी रोजी-रोटी भी जुड़ी हुई है।
जब लोग ऐसे कपड़े खरीदते हैं, तो उन्हें एक ऐसा सामान मिलता है जिसके पीछे किसी कारीगर की मेहनत होती है।
फ्रेंडशिप डे से क्यों जोड़ा पीएम मोदी ने? प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को लोगों के लिए आसान और याद रखने वाला बनाने के लिए फ्रेंडशिप डे का उदाहरण दिया। फ्रेंडशिप डे पर लोग अपने दोस्तों के साथ समय बिताते हैं, उन्हें याद करते हैं और अपनी दोस्ती को खास बनाते हैं। इसी तरह पीएम मोदी ने लोगों से कहा कि हैंडलूम डे पर भी भारतीय बुनकरों के काम को याद किया जाए और उनके बनाए सामान को खरीदा जाए। इस तरह राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को केवल सरकारी कार्यक्रम की जगह आम लोगों से जोड़ने की कोशिश की गई है।
'लोकल के लिए वोकल' बनने का मौका हैंडलूम डे पर भारतीय सामान खरीदना 'लोकल के लिए वोकल' की सोच से भी जुड़ा है। इसका मतलब है कि देश में बने सामान को ज्यादा महत्व दिया जाए और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा दिया जाए। अगर लोग अपनी जरूरत के कुछ कपड़े भारतीय बुनकरों से खरीदते हैं, तो इससे स्थानीय बाजार को फायदा हो सकता है। इससे बुनकरों को अपने काम के लिए ग्राहक मिलते हैं और उनके बनाए सामान की पहचान बढ़ती है।
यह काम केवल 7 अगस्त तक सीमित नहीं है। लोग सालभर भारतीय हैंडलूम कपड़ों को अपनी खरीदारी का हिस्सा बना सकते हैं। युवाओं के लिए भी खास संदेश राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर युवाओं को भी भारतीय कपड़ों से जुड़ने का मौका मिलता है। आज युवा फैशन को लेकर काफी सजग हैं और अलग-अलग तरह के कपड़े पहनना पसंद करते हैं। ऐसे में हैंडलूम को नए अंदाज में अपनाया जा सकता है। भारतीय कपड़ों में पारंपरिक रंग और डिजाइन के साथ आधुनिक पहनावे का मेल भी किया जा सकता है।
इससे हैंडलूम को नई पीढ़ी के बीच पहचान मिल सकती है और पुराने बुनाई के काम को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का संदेश राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का मुख्य संदेश यही है कि भारतीय बुनकरों और उनके काम को सम्मान दिया जाए। इसके साथ लोगों को देश में बने कपड़े खरीदने और स्थानीय काम को बढ़ावा देने के लिए भी प्रेरित किया जाता है।
पीएम मोदी ने अपने वीडियो संदेश के जरिए इसी बात को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है। उन्होंने हैंडलूम को दोस्ती दिवस से जोड़कर इसे आम लोगों के लिए और आसान तरीके से समझाने की कोशिश की।
7 अगस्त को मनाया जाने वाला यह दिन उन लाखों लोगों की मेहनत को याद करने का मौका है, जो कपड़े बनाने और बुनाई के काम से जुड़े हैं।
अगर लोग भारतीय हैंडलूम कपड़े खरीदते और पहनते हैं, तो इससे बुनकरों के काम को बाजार मिल सकता है। साथ ही भारत की पुरानी बुनाई की परंपरा को आगे बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। इस राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर पीएम मोदी की अपील का सीधा संदेश है कि भारतीय सामान खरीदें, अपने देश के बुनकरों की मेहनत को पहचानें और 'लोकल के लिए वोकल' बनें।
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