छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CGPSC पेपर लीक मामले में पूर्व IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक करना लाखों युवाओं की मेहनत और भविष्य से खिलवाड़ है। मामले की जांच सीबीआई कर रही है और इस केस में कई अन्य आरोपी भी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CGPSC भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में पूर्व IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर लीक करना बहुत गंभीर अपराध है, क्योंकि इससे लाखों युवाओं की मेहनत और भविष्य पर असर पड़ता है।
रायपुर, 7 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CGPSC भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में गिरफ्तार पूर्व IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करना केवल कानून तोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि यह लाखों मेहनती युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अदालत ने साफ कहा कि ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि हर साल लाखों छात्र सरकारी नौकरी पाने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। कई उम्मीदवार कई साल तक तैयारी करते हैं और परिवार भी उनके सपनों को पूरा करने के लिए हर तरह का सहयोग देता है। अगर कोई व्यक्ति परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक कर देता है, तो ईमानदारी से मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भरोसा टूट जाता है। यही वजह है कि ऐसे अपराध समाज पर गहरा असर डालते हैं।
इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, जीवन किशोर ध्रुव वर्ष 2020 से 2022 तक छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में सचिव के पद पर थे। आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2021 की मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने बेटे सुमित ध्रुव तक पहुंचाए। जांच एजेंसी का कहना है कि इससे सुमित ध्रुव को परीक्षा में अनुचित लाभ मिला और बाद में उसका चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हो गया।
सीबीआई ने अदालत में बताया कि जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज मिले हैं। एजेंसी का दावा है कि आरोपी के घर से ऐसे कागज बरामद हुए, जिनका संबंध परीक्षा के प्रश्नपत्र और उत्तरों से था। इसके अलावा कई लोगों के बयान और दूसरे दस्तावेज भी जांच का हिस्सा हैं। एजेंसी का कहना है कि इन सभी बातों से मामले की जांच आगे बढ़ी है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि जीवन किशोर ध्रुव को केवल इसलिए आरोपी बनाया गया क्योंकि उस समय वह CGPSC के सचिव थे। उनके वकील ने कहा कि उन्होंने अपने दोनों बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी पहले ही आयोग को दे दी थी। साथ ही उन्होंने परीक्षा से जुड़े गोपनीय काम से खुद को अलग कर लिया था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि यदि किसी तरह की गड़बड़ी होती तो दोनों बेटों को फायदा मिलता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक बेटा परीक्षा में सफल नहीं हो सका, जबकि दूसरे की रैंक भी सबसे ऊपर नहीं थी।
दूसरी ओर, सीबीआई ने इन दलीलों का विरोध किया। एजेंसी ने कहा कि मामला केवल एक उम्मीदवार या एक अधिकारी तक सीमित नहीं है। यह पूरे भर्ती सिस्टम की साख से जुड़ा मामला है। अगर ऐसे मामलों में सख्ती नहीं दिखाई गई, तो सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कम हो सकता है। इसी वजह से आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इस समय उपलब्ध दस्तावेज और जांच की स्थिति को देखते हुए आरोपी को राहत देना सही नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी माना कि मामला काफी गंभीर है और इसकी जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।
यह मामला पिछले काफी समय से चर्चा में है। CGPSC भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद जांच शुरू हुई थी। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। जांच के दौरान कई लोगों से पूछताछ की गई और कई दस्तावेजों की जांच भी हुई।
इस मामले में केवल जीवन किशोर ध्रुव ही नहीं, बल्कि पूर्व CGPSC अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी, उनके रिश्तेदार, पूर्व परीक्षा नियंत्रक, एक उद्योगपति और उनके परिवार के कुछ सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसी इन सभी की भूमिका की अलग-अलग जांच कर रही है।
सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना किसी भी राज्य के लिए बहुत जरूरी माना जाता है। जब परीक्षा निष्पक्ष होती है, तभी योग्य उम्मीदवारों को मौका मिलता है। लेकिन अगर पेपर लीक जैसी घटनाएं होती हैं, तो मेहनत करने वाले छात्रों का मनोबल टूटता है और पूरी भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ जाती है।
पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग राज्यों में भी कई भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। ऐसे मामलों के बाद परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और लाखों उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी। इससे छात्रों का समय, पैसा और मेहनत तीनों प्रभावित हुए।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने साफ किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है और प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। कोर्ट का मानना है कि ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई होना जरूरी है, ताकि सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बना रहे।
फिलहाल इस मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि फिलहाल उपलब्ध तथ्यों और जांच की स्थिति को देखते हुए आरोपी को जमानत देने का आधार नहीं बनता।
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