सोशल मीडिया पर दावा है कि अब हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा और फ्री UPI खत्म हो जाएगा। फैक्ट-चेक में सामने आया कि यह दावा भ्रामक है। मौजूदा चर्चा बड़े व्यापारियों पर MDR लागू करने तक सीमित है, जबकि छोटे मर्चेंट, आम यूजर्स और P2P ट्रांजैक्शन पर फीस प्रस्तावित नहीं बताई गई है।
सोशल मीडिया और WhatsApp पर पिछले कुछ दिनों से एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि अब हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा और फ्री UPI की सुविधा खत्म होने वाली है। इस दावे को लेकर आम यूजर्स और छोटे दुकानदारों के बीच चिंता बढ़ी है, क्योंकि UPI लंबे समय से आसान और बिना फीस वाले डिजिटल पेमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक, “हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा” कहना सही नहीं है। जिन बदलावों पर चर्चा हो रही है, उनका संबंध merchant discount rate यानी MDR से है और यह प्रस्ताव सभी UPI यूजर्स या सभी तरह के ट्रांजैक्शन पर लागू करने के लिए नहीं बताया गया है।
क्या है वायरल दावा? वायरल मैसेज में कहा जा रहा है कि सरकार ने फैसला किया है कि आगे से हर UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लिया जाएगा। इस दावे के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति किसी दुकान पर UPI से भुगतान करता है या अपने दोस्त और परिवार के किसी सदस्य को पैसे भेजता है, तो उसे भी चार्ज देना पड़ेगा। यानी दावा यह है कि UPI अब पूरी तरह फ्री नहीं रहेगा। यह मैसेज खास तौर पर छोटे दुकानदारों और आम यूजर्स के बीच चिंता का कारण बन रहा है। UPI का इस्तेमाल रोजमर्रा की छोटी-बड़ी पेमेंट के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है, इसलिए अगर हर ट्रांजैक्शन पर फीस लगने की बात सही होती, तो इसका सीधा असर आम लोगों और डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल पर पड़ सकता था। लेकिन उपलब्ध जानकारी इस वायरल दावे से अलग तस्वीर पेश करती है।
MDR को लेकर क्या चर्चा है?
Economic Times की टेक रिपोर्ट्स और अन्य विश्वसनीय अपडेट्स के मुताबिक, UPI पर merchant discount rate यानी MDR को दोबारा लागू करने पर विचार किया जा रहा है। MDR वह शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में व्यापारी से जुड़े ट्रांजैक्शन पर लगाया जा सकता है। मौजूदा चर्चा में इसे हर व्यक्ति और हर UPI ट्रांजैक्शन पर लागू करने की बात नहीं कही गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्ताव उन व्यापारियों तक सीमित हो सकता है जिनका सालाना कारोबार करीब 1 करोड़ से 1.
5 करोड़ रुपये या उससे अधिक है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर MDR से जुड़ा प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका दायरा मुख्य रूप से बड़े मर्चेंट्स तक सीमित रखने की बात सामने आई है।
क्या हर दुकानदार पर लगेगा चार्ज? नहीं। उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसा नहीं कहा गया है कि हर दुकानदार को UPI पेमेंट लेने पर MDR देना होगा। प्रस्तावित व्यवस्था में सालाना 1–1.
5 करोड़ रुपये या उससे अधिक टर्नओवर वाले बड़े व्यापारियों को शामिल किए जाने की बात कही गई है। छोटे व्यापारियों को इससे बाहर रखने का इरादा बताया गया है। इसलिए सोशल मीडिया पर यह कहना कि “अब हर दुकानदार से UPI पेमेंट पर चार्ज लिया जाएगा” उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सही नहीं है।
क्या दोस्त या परिवार को पैसे भेजने पर भी फीस लगेगी? वायरल दावे का एक बड़ा हिस्सा यह भी है कि UPI के जरिए दोस्त, परिवार या किसी दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर भी चार्ज लगेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं बताया गया है। Peer-to-peer यानी P2P ट्रांजैक्शन पर फीस लगाने की बात सामने नहीं आई है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति अपने दोस्त को पैसे भेजता है, परिवार के सदस्य को रकम ट्रांसफर करता है या किसी अन्य व्यक्ति को व्यक्तिगत भुगतान करता है, तो ऐसे P2P ट्रांजैक्शन के लिए फीस प्रस्तावित नहीं बताई गई है। यानी वायरल मैसेज में जिस तरह सभी UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगने की बात कही जा रही है, उपलब्ध जानकारी उससे मेल नहीं खाती।
छोटे मर्चेंट और रोजमर्रा की पेमेंट का क्या होगा? रिपोर्ट्स के मुताबिक, छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए UPI को फ्री रखने का इरादा है। छोटी दुकानों, रोजमर्रा की खरीदारी और आम लोगों के बीच होने वाले डिजिटल भुगतान में UPI का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में छोटे मर्चेंट और सामान्य यूजर्स पर शुल्क का बोझ न पड़े, इस दिशा में व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट की पहुंच और उसके इस्तेमाल को प्रभावित होने से बचाना भी बताया गया है।
MDR की दर कितनी हो सकती है? मौजूदा चर्चाओं के अनुसार, बड़े मर्चेंट्स पर MDR लागू करने की स्थिति में इसकी दर सीमित हो सकती है। रिपोर्ट्स में संभावित MDR दर करीब 5 से 7 बेसिस पॉइंट होने की बात कही गई है। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि इसे अंतिम दर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक MDR की अंतिम दर और इसे लागू करने की तारीख जैसी तकनीकी जानकारियां अभी स्पष्ट नहीं हैं। इसलिए इस हिस्से में फिलहाल सावधानी बरतना जरूरी है।
क्या UPI पूरी तरह से पेड होने वाला है? उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसका जवाब नहीं है। वायरल दावा यह संदेश देता है कि UPI के हर इस्तेमाल पर शुल्क लगने वाला है। लेकिन रिपोर्ट्स में जिस प्रस्ताव की चर्चा है, वह बड़े व्यापारियों पर MDR लागू करने से संबंधित है। P2P ट्रांजैक्शन के लिए फीस प्रस्तावित नहीं बताई गई है। छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए भी UPI को फ्री रखने का इरादा बताया गया है। इसलिए “फ्री UPI खत्म हो गया” कहना सही तस्वीर नहीं बताता।
Fact-Check: दावा कितना सही? निष्कर्ष: दावा गलत और भ्रामक है। यह बात सही है कि UPI पर MDR को लेकर चर्चा चल रही है। लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना कि अब हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक गलत है। मौजूदा चर्चाओं के अनुसार: MDR लागू करने का प्रस्ताव बड़े व्यापारियों तक सीमित हो सकता है। करीब 1–1.
5 करोड़ रुपये या उससे अधिक सालाना टर्नओवर वाले मर्चेंट्स को इसके दायरे में लाने की बात सामने आई है। छोटे व्यापारियों पर यह व्यवस्था लागू करने की बात नहीं कही गई है। दोस्त या परिवार को पैसे भेजने जैसे P2P ट्रांजैक्शन पर फीस प्रस्तावित नहीं बताई गई है। आम उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के UPI भुगतान को फ्री रखने का इरादा बताया गया है। संभावित MDR दर करीब 5–7 बेसिस पॉइंट हो सकती है, लेकिन अंतिम दर अभी स्पष्ट नहीं है। MDR कब और किस अंतिम नियम के तहत लागू होगा, इसकी पूरी जानकारी भी अभी सामने नहीं आई है।
आम लोगों को क्या ध्यान रखना चाहिए? वित्तीय मामलों से जुड़े किसी भी वायरल मैसेज पर तुरंत भरोसा करना सही नहीं है। खासकर तब, जब मैसेज में “अब से हर पेमेंट पर चार्ज” या “फ्री सुविधा खत्म” जैसे बड़े दावे किए जा रहे हों। ऐसी खबरों को WhatsApp फॉरवर्ड या सोशल मीडिया पोस्ट के बजाय विश्वसनीय न्यूज रिपोर्ट्स और आधिकारिक घोषणाओं से जांचना चाहिए। अगर UPI से जुड़ी ऐसी कोई बड़ी नीति लागू होती है, तो उसके बारे में RBI, वित्त मंत्रालय या संबंधित आधिकारिक संस्थाओं की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में मुख्य अनिश्चितता MDR की अंतिम दर और इसे लागू करने की तारीख जैसी तकनीकी बातों को लेकर है। लेकिन “हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा” वाला दावा उपलब्ध रिपोर्ट्स के आधार पर सही नहीं है।
अंतिम फैसला Fact-Check: गलत और भ्रामक दावा। UPI के हर ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाए जाने की बात सही नहीं है। जिन प्रस्तावों की रिपोर्टिंग हुई है, उनका फोकस बड़े व्यापारियों पर MDR लागू करने पर है। छोटे मर्चेंट, आम उपभोक्ता और P2P ट्रांजैक्शन को इस प्रस्ताव से अलग रखने की बात सामने आई है। इसलिए “अब हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा” और “फ्री UPI खत्म हो गया” जैसे वायरल दावों को फिलहाल सही खबर नहीं माना जा सकता। MDR की अंतिम दर और लागू होने की तारीख को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।
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