सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया गया था कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका से "Cockroach Janata Party" के संस्थापक को भारत भेजने की मांग की है। फैक्ट-चेक वेबसाइट Alt News की जांच में यह वीडियो डीपफेक निकला। जांच में पाया गया कि असली वीडियो के ऑडियो और विजुअल्स में AI की मदद से छेड़छाड़ की गई थी। विदेश मंत्रालय की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान भी जारी नहीं किया गया है। फैक्ट-चेक का निष्कर्ष है कि वायरल दावा पूरी तरह फर्जी है और लोगों को ऐसे वीडियो शेयर करने से पहले उनकी सत्यता जांचने की सलाह दी गई है।
सोशल मीडिया पर हाल ही में एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका से "Cockroach Janata Party" नामक एक ऑनलाइन राजनीतिक व्यंग्य समूह के संस्थापक को भारत भेजने की मांग की है। वीडियो को लाखों लोगों ने देखा और कई यूज़र्स ने इसे सच मानकर शेयर भी किया। हालांकि जांच में यह दावा पूरी तरह फर्जी निकला।
फैक्ट-चेक करने वाली वेबसाइट Alt News ने वायरल वीडियो की पड़ताल के बाद बताया कि यह एक डीपफेक वीडियो है। जांच में पाया गया कि वीडियो में इस्तेमाल की गई क्लिप विदेश मंत्री के किसी पुराने कार्यक्रम की थी, लेकिन उसके ऑडियो और कुछ विजुअल हिस्सों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से बदलाव किया गया था। असली वीडियो में "Cockroach Janata Party" या उसके संस्थापक का कोई जिक्र नहीं था।
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जांच के दौरान वायरल वीडियो के फ्रेम्स की तुलना मूल वीडियो से की गई। इसके अलावा ऑडियो की तकनीकी जांच में भी कई गड़बड़ियां सामने आईं। विशेषज्ञों को आवाज और होंठों की गतिविधि के बीच अंतर दिखाई दिया, जो अक्सर डीपफेक कंटेंट में देखने को मिलता है। इसी आधार पर वीडियो को फर्जी और भ्रामक घोषित किया गया।
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि विदेश मंत्रालय या भारत सरकार की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग और सार्वजनिक रिकॉर्ड में भी इस तरह की किसी मांग का उल्लेख नहीं मिला।
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यह घटना दिखाती है कि AI आधारित डीपफेक तकनीक अब पहले से कहीं ज्यादा उन्नत हो चुकी है। पहले इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल मनोरंजन या सोशल मीडिया कंटेंट तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब राजनीतिक और कूटनीतिक मामलों में भी इसका उपयोग किया जा रहा है। इससे गलत जानकारी तेजी से फैल सकती है और लोगों में भ्रम पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर वीडियो पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। अगर कोई वीडियो किसी बड़े नेता, सरकारी फैसले या संवेदनशील मुद्दे से जुड़ा हो और असामान्य लगे, तो उसे शेयर करने से पहले विश्वसनीय समाचार संस्थानों, आधिकारिक सरकारी स्रोतों या फैक्ट-चेक प्लेटफॉर्म से जांच लेना जरूरी है।
डिजिटल युग में फर्जी वीडियो और गलत जानकारी बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे मामलों में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। यह मामला भी इसी बात की याद दिलाता है कि तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से लोगों को डिजिटल साक्षरता और तथ्य जांच की आदत भी विकसित करनी होगी।
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फैक्ट-चेक का निष्कर्ष साफ है— विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा अमेरिका से "Cockroach Janata Party" के संस्थापक को भारत भेजने की मांग करने का दावा पूरी तरह झूठा है। वायरल वीडियो AI की मदद से बनाया गया डीपफेक है और इसका वास्तविक घटनाओं या किसी आधिकारिक बयान से कोई संबंध नहीं है।
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3 जून 2026