CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर एक 19 वर्षीय एथिकल हैकर ने दावा किया है कि वह मात्र 30 मिनट में संबंधित पोर्टल में प्रवेश कर परीक्षक स्तर की पहुंच हासिल करने में सफल रहा। उसके अनुसार सिस्टम में ऐसी सुरक्षा खामियां थीं जिनके जरिए परीक्षकों की प्रोफाइल, ईमेल, बैंक विवरण और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच संभव थी। हालांकि CBSE ने अंकों में किसी तरह की हेराफेरी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस दावे ने शिक्षा क्षेत्र में साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञ स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट, पेनिट्रेशन टेस्टिंग और मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों की जरूरत पर जोर दे रहे हैं ताकि छात्रों और शिक्षकों का भरोसा डिजिटल प्रणालियों पर बना रहे।
CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। 19 वर्षीय एक एथिकल हैकर ने दावा किया है कि वह महज 30 मिनट में बोर्ड से जुड़े एक डिजिटल इवैल्यूएशन पोर्टल में प्रवेश कर परीक्षक स्तर की पहुंच हासिल करने में सफल रहा। युवक का कहना है कि वह परीक्षकों की प्रोफाइल, ईमेल, बैंक विवरण और यहां तक कि अंकों में बदलाव से जुड़े विकल्पों तक पहुंच सकता था। हालांकि CBSE ने किसी बड़े स्तर की गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस दावे ने डिजिटल शिक्षा प्रणाली और सरकारी पोर्टलों की साइबर सुरक्षा पर गंभीर बहस छेड़ दी है। भारत में शिक्षा व्यवस्था तेजी से डिजिटल हो रही है। परीक्षा आवेदन से लेकर परिणाम जारी करने और कॉपियों के मूल्यांकन तक कई प्रक्रियाएं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित की जा रही हैं। इन बदलावों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, समय की बचत करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। लेकिन हाल ही में सामने आए एक दावे ने इस डिजिटल व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
19 वर्षीय एक एथिकल हैकर ने दावा किया है कि उसने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जुड़े एक डिजिटल मूल्यांकन पोर्टल की सुरक्षा में गंभीर खामियां खोजी हैं। युवक का कहना है कि वह केवल 30 मिनट के भीतर सिस्टम में प्रवेश कर परीक्षक स्तर की पहुंच हासिल करने में सफल हो गया था। रिपोर्टों के अनुसार युवक ने बताया कि पोर्टल तक पहुंच बनाने के बाद वह कई संवेदनशील जानकारियां देख सकता था। इनमें परीक्षकों की प्रोफाइल, ईमेल पते, बैंक से संबंधित जानकारी और अन्य प्रशासनिक विवरण शामिल थे। उसने यह भी दावा किया कि सिस्टम में ऐसे विकल्प मौजूद थे जिनके जरिए अंकों से संबंधित जानकारी तक पहुंच बनाई जा सकती थी। हालांकि अभी तक किसी भी छात्र के अंकों में बदलाव या बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दावे सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल एक पोर्टल की कमजोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन सकता है।
युवक ने बताया कि उसने फरवरी महीने में ही इन खामियों की जानकारी संबंधित एजेंसियों को दे दी थी। उसके अनुसार उसने भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In), CBSE और पोर्टल संचालित करने वाली कंपनी को संभावित सुरक्षा जोखिमों की सूचना भेजी थी। दावे के मुताबिक उसकी ओर से कई तकनीकी कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया, लेकिन अब तक केवल एक प्रमुख खामी को ही ठीक किया गया है। उसने आरोप लगाया कि अन्य कई कमजोरियां अब भी सिस्टम में मौजूद हो सकती हैं।
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2 जून 2026
डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जाता है। पारंपरिक तरीके में जहां उत्तर पुस्तिकाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने में समय और संसाधन खर्च होते थे, वहीं डिजिटल प्रणाली के जरिए मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है। CBSE सहित कई शैक्षणिक संस्थानों ने डिजिटल मूल्यांकन को अपनाया है ताकि परिणामों में देरी कम हो और परीक्षकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कार्य करने की सुविधा मिल सके। लेकिन ऐसी प्रणालियों की सफलता पूरी तरह उनकी सुरक्षा पर निर्भर करती है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म में सबसे महत्वपूर्ण पहलू एक्सेस कंट्रोल होता है। इसका अर्थ यह है कि कौन व्यक्ति किस जानकारी तक पहुंच सकता है और उसकी सीमाएं क्या हैं। यदि इस व्यवस्था में कमजोरी हो तो कोई भी अनधिकृत व्यक्ति संवेदनशील डेटा तक पहुंच सकता है।
युवक का दावा है कि पोर्टल में रोल-बेस्ड एक्सेस कंट्रोल पर्याप्त मजबूत नहीं था। रोल-बेस्ड एक्सेस कंट्रोल वह प्रणाली होती है जिसमें उपयोगकर्ता की भूमिका के अनुसार उसकी पहुंच निर्धारित की जाती है। उदाहरण के लिए छात्र, शिक्षक, परीक्षक और प्रशासक सभी की अलग-अलग अनुमति होती है। यदि ऐसी प्रणाली में खामी हो तो कोई उपयोगकर्ता अपने निर्धारित अधिकारों से अधिक जानकारी तक पहुंच बना सकता है। यही कारण है कि दुनिया भर के बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म इस स्तर पर विशेष ध्यान देते हैं।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि कुछ संवेदनशील API तक पहुंच अपेक्षा से अधिक खुली हुई थी। API यानी एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस वे माध्यम होते हैं जिनके जरिए विभिन्न सॉफ्टवेयर एक-दूसरे से जानकारी साझा करते हैं। यदि इनकी सुरक्षा मजबूत न हो तो डेटा लीक या अनधिकृत पहुंच का खतरा बढ़ सकता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा केवल लॉगिन पेज तक सीमित नहीं होती। डेटा एन्क्रिप्शन, सर्वर सुरक्षा, ऑडिट ट्रेल, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और लगातार निगरानी जैसी कई परतें मिलकर सुरक्षा ढांचा तैयार करती हैं। इस मामले में युवक ने दावा किया कि कुछ जगहों पर एन्क्रिप्शन और ऑडिट ट्रेल से जुड़ी कमियां भी मौजूद थीं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। फिर भी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आरोपों की गंभीर जांच की जानी चाहिए। भारत पिछले कुछ वर्षों में तेजी से डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, कराधान और सरकारी सेवाओं सहित लगभग हर क्षेत्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ा है। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ी हैं।
Continue Reading3 जून 2026
हाल के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों से डेटा लीक और साइबर हमलों की खबरें सामने आती रही हैं। स्वास्थ्य रिकॉर्ड, वित्तीय जानकारी और दूरसंचार डेटा से जुड़े कई मामलों ने यह दिखाया है कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा बन चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी और अर्ध-सरकारी पोर्टलों में करोड़ों लोगों की जानकारी मौजूद होती है। ऐसे में यदि किसी सिस्टम में सुरक्षा खामी होती है तो उसका प्रभाव लाखों उपयोगकर्ताओं तक पहुंच सकता है। CBSE का मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे छात्रों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। हर वर्ष लाखों विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होते हैं और उनके परिणाम आगे की पढ़ाई तथा करियर को प्रभावित करते हैं। इसी वजह से छात्रों और अभिभावकों के बीच दो प्रमुख सवाल चर्चा में हैं। पहला, क्या किसी स्तर पर अंकों में छेड़छाड़ संभव थी? दूसरा, क्या छात्रों और परीक्षकों की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह सुरक्षित है?
अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार बोर्ड की ओर से किसी बड़े स्तर की हेराफेरी की पुष्टि नहीं की गई है। न ही ऐसी कोई आधिकारिक सूचना सामने आई है जिससे यह संकेत मिले कि छात्रों के परिणाम प्रभावित हुए हैं। फिर भी साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट आवश्यक हो सकता है। यदि किसी बाहरी एजेंसी द्वारा सिस्टम की समीक्षा की जाती है तो संभावित खामियों की पहचान और सुधार अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। कई विशेषज्ञ नियमित पेनिट्रेशन टेस्टिंग की भी वकालत कर रहे हैं। पेनिट्रेशन टेस्टिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अधिकृत साइबर विशेषज्ञ सिस्टम पर नियंत्रित तरीके से हमले की कोशिश करते हैं ताकि कमजोरियों का पता लगाया जा सके।
दुनिया की कई बड़ी तकनीकी कंपनियां इसी उद्देश्य से बग बाउंटी कार्यक्रम चलाती हैं। इन कार्यक्रमों के तहत एथिकल हैकर्स को सुरक्षा खामियां खोजने और रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इससे साइबर अपराधियों के पहले कमजोरियों को दूर करने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में भी सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए जिम्मेदार डिस्क्लोजर और बग रिपोर्टिंग व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है। इससे सुरक्षा शोधकर्ताओं और संस्थाओं के बीच बेहतर सहयोग संभव होगा। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि डिजिटल परिवर्तन के साथ साइबर सुरक्षा को समान महत्व देना आवश्यक है। केवल नई तकनीक अपनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसकी सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
Continue Reading2 जून 2026
शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार आने वाले वर्षों में और बढ़ने की संभावना है। ऑनलाइन मूल्यांकन, डिजिटल प्रमाणपत्र, वर्चुअल लर्निंग और AI आधारित शिक्षा प्रणालियां तेजी से विकसित हो रही हैं। ऐसे में मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा भविष्य की आवश्यकता बन चुका है।
फिलहाल CBSE पोर्टल को लेकर सामने आए दावों की चर्चा जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह जरूर दिखा दिया है कि डिजिटल शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। आने वाले समय में यही तय करेगा कि छात्र, शिक्षक और अभिभावक डिजिटल प्रणालियों पर कितना भरोसा कर पाते हैं।
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3 जून 2026