फरवरी 2026 में दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों, टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य AI को अधिक लोगों और देशों तक पहुंचाना, डिजिटल असमानता कम करना और जिम्मेदार AI विकास को बढ़ावा देना था। समिट में AI गवर्नेंस, ओपन डेटा प्लेटफॉर्म, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और स्किल डेवलपमेंट जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घोषित योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो भारत AI, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और डिजिटल रोजगार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
फरवरी 2026 में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit 2026 को भारत के डिजिटल और तकनीकी भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। 30 से अधिक देशों की भागीदारी वाले इस सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास, वैश्विक सहयोग, डिजिटल संप्रभुता, डेटा सुरक्षा और कौशल विकास जैसे विषयों पर चर्चा हुई। अब समिट के कई फैसलों और घोषणाओं का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा है, जिससे भारत वैश्विक AI इकोसिस्टम में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
फरवरी 2026 में आयोजित India AI Impact Summit भले ही समाप्त हो चुका हो, लेकिन उसकी गूंज अब भी तकनीकी उद्योग, नीति निर्माताओं और स्टार्टअप जगत में सुनाई दे रही है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस पांच दिवसीय कार्यक्रम को भारत के AI क्षेत्र के सबसे बड़े आयोजनों में गिना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक तकनीकी सम्मेलन नहीं था, बल्कि भारत की डिजिटल रणनीति और भविष्य की आर्थिक दिशा का संकेत भी था।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा IndiaAI मिशन की ओर से आयोजित इस समिट में दुनिया भर से सरकारी प्रतिनिधि, तकनीकी कंपनियों के प्रमुख, शोधकर्ता, स्टार्टअप संस्थापक और निवेशक शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया और सैकड़ों सत्रों के माध्यम से AI के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
समिट की सबसे बड़ी खासियत इसका विषय था “Democratising AI, Bridging the AI Divide”। इसका सीधा मतलब है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तकनीक केवल कुछ विकसित देशों या बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे, बल्कि इसका लाभ विकासशील देशों और आम लोगों तक भी पहुंचे। यह विचार उस समय और महत्वपूर्ण हो जाता है जब दुनिया में AI तकनीक तेजी से आर्थिक और राजनीतिक शक्ति का नया आधार बनती जा रही है।
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3 जून 2026
3 जून 2026
3 जून 2026
3 जून 2026
भारत लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि तकनीकी विकास का लाभ व्यापक समाज तक पहुंचना चाहिए। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए समिट के तीन प्रमुख स्तंभ तय किए गए—People, Planet और Progress। इन तीन शब्दों के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि AI केवल व्यवसायिक लाभ का साधन नहीं है, बल्कि इसका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।
सम्मेलन के दौरान AI से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें डेटा गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा, डिजिटल संप्रभुता, जिम्मेदार AI, मशीन लर्निंग, जनरेटिव AI और वैश्विक सहयोग प्रमुख रहे। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि AI का भविष्य केवल तकनीकी क्षमता पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगा कि सरकारें और संस्थाएं इसके उपयोग के लिए किस तरह के नियम और ढांचे तैयार करती हैं। AI को लेकर दुनिया भर में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। अमेरिका, चीन, यूरोप और कई अन्य देश इस क्षेत्र में भारी निवेश कर रहे हैं। ऐसे में भारत भी खुद को केवल उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि AI नवाचार और विकास के केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहता है। यही कारण है कि India AI Impact Summit को वैश्विक मंच पर भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के प्रदर्शन के रूप में भी देखा गया।
समिट के दौरान वैश्विक AI गवर्नेंस फ्रेमवर्क पर भी चर्चा हुई। भारत का मानना है कि AI के विकास और उपयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ साझा सिद्धांत होने चाहिए, ताकि तकनीक का उपयोग सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार तरीके से किया जा सके। कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि AI विकास पूरी तरह बाजार शक्तियों पर छोड़ दिया गया तो इससे असमानता और डेटा दुरुपयोग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
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सम्मेलन में ओपन डेटा प्लेटफॉर्म की अवधारणा पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं को गुणवत्तापूर्ण डेटा उपलब्ध कराना है ताकि वे नए AI मॉडल और समाधान विकसित कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा भविष्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण संसाधन बन चुका है और जिस देश के पास बेहतर डेटा इकोसिस्टम होगा, वह AI क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ सकेगा। भारत ने इस मंच पर “विश्वकर्मा भारत क्लाउड” जैसी अवधारणाओं पर भी चर्चा की। इसका उद्देश्य देश के भीतर AI विकास के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराना है। वर्तमान समय में उन्नत AI मॉडल विकसित करने के लिए बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग शक्ति और GPU संसाधनों की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि भारत अपने डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
तकनीकी उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि अब केवल AI के डेमो या पायलट प्रोजेक्ट दिखाने का समय नहीं है। वास्तविक चुनौती इन तकनीकों को बड़े पैमाने पर लागू करने की है। इसके लिए डेटा सेंटर, GPU क्लस्टर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और प्रशिक्षित मानव संसाधन की जरूरत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास AI क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कई महत्वपूर्ण फायदे हैं। देश के पास बड़ी डिजिटल आबादी, विशाल डेटा संसाधन, मजबूत आईटी उद्योग और तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम मौजूद है। इसके अलावा दुनिया के सबसे बड़े तकनीकी प्रतिभा समूहों में से एक भारत में मौजूद है।
समिट में कौशल विकास को भी प्रमुखता दी गई। AI तकनीक के विस्तार के साथ रोजगार बाजार में बड़े बदलाव आने की संभावना है। कई पारंपरिक नौकरियों का स्वरूप बदल सकता है, जबकि नई प्रकार की नौकरियां पैदा होंगी। ऐसे में कर्मचारियों और छात्रों को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करना आवश्यक माना जा रहा है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में AI इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट, मशीन लर्निंग विशेषज्ञ, साइबर सुरक्षा पेशेवर और AI एथिक्स विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ सकती है। भारत इस अवसर का लाभ उठाकर वैश्विक प्रतिभा केंद्र बनने की दिशा में काम कर सकता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश छोटे शहरों की ओर बढ़े हैं। यदि AI आधारित उद्योगों का विस्तार होता है तो इन क्षेत्रों में रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
हालांकि AI के बढ़ते प्रभाव के साथ कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं। डेटा गोपनीयता, एल्गोरिदमिक पक्षपात, गलत सूचना और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मजबूत नियामक ढांचा नहीं बनाया गया तो लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। AI सिस्टम अक्सर बड़े डेटा सेट पर आधारित होते हैं। यदि डेटा में पक्षपात मौजूद हो तो AI के फैसले भी प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि जिम्मेदार AI और नैतिक मानकों को लेकर चर्चा तेज हो रही है। भारत भी इस क्षेत्र में संतुलित नीति बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि नवाचार और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बना रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी AI अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गया है। यह आर्थिक प्रतिस्पर्धा, राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक रणनीतियों का हिस्सा बन चुका है। कई देश AI तकनीक को भविष्य की शक्ति के रूप में देख रहे हैं। इसलिए India AI Impact Summit में वैश्विक सहयोग के साथ-साथ डिजिटल संप्रभुता जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उभरे।
विश्लेषकों का मानना है कि इस सम्मेलन की असली सफलता आने वाले वर्षों में दिखाई देगी। यदि समिट में घोषित योजनाएं जमीन पर उतरती हैं, AI इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होता है और कौशल विकास कार्यक्रम प्रभावी साबित होते हैं, तो भारत वैश्विक AI परिदृश्य में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि India AI Impact Summit 2026 ने भारत को वैश्विक AI चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब नजर इस बात पर होगी कि सम्मेलन में हुई चर्चाएं और घोषणाएं किस हद तक वास्तविक परियोजनाओं, रोजगार अवसरों और तकनीकी नवाचारों में बदल पाती हैं। आने वाले एक-दो वर्षों में ही यह तय होगा कि भारत AI क्रांति का नेतृत्व करने की दिशा में कितना आगे बढ़ पाया है।
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3 जून 2026