जोधपुर में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से करीब 2000 हेक्टेयर प्याज की फसल खराब हो गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। पश्चिमी विक्षोभ के कारण 6 मई तक खराब मौसम का अलर्ट है। इसका असर बाजार में प्याज की कीमतों पर भी पड़ सकता है। गर्मी से राहत मिली है, लेकिन किसानों के लिए यह बड़ा संकट बन गया है।
राजस्थान के जोधपुर और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से मौसम ने ऐसा रुख बदला है, जिसने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। बीते 24 घंटों में आई तेज आंधी, तूफान और ओलावृष्टि ने खासतौर पर प्याज की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 2000 हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज की फसल बर्बाद हो गई है। खेतों में खड़ी या कटाई के लिए तैयार फसल पर ओलों की सीधी मार पड़ी, जिससे प्याज की गांठें खराब होने और सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
यह पूरा मौसम बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के कारण हो रहा है, जिसका असर पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों—जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर और नागौर—में साफ देखने को मिल रहा है। तेज हवाओं के साथ बारिश ने कई खेतों में पानी भर दिया, जिससे सिर्फ प्याज ही नहीं बल्कि अन्य सब्जियों और फसलों को भी नुकसान की आशंका है।
किसानों पर आर्थिक संकट इस नुकसान का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है। कई किसानों ने उधार लेकर खेती की थी, खासकर प्याज जैसी नकदी फसल में निवेश किया था। अब जब फसल ही खराब हो गई, तो वे सीधे कर्ज के दबाव में आ गए हैं। पिछले कुछ सालों से राजस्थान के किसान लगातार मौसम की मार झेल रहे हैं—कभी सूखा, कभी अचानक बारिश, तो कभी ओलावृष्टि।
प्याज किसानों के लिए एक अहम फसल होती है क्योंकि इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है और इससे नियमित आय आती है। जोधपुर मंडी में हाल के दिनों में अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन इस नुकसान ने पूरी गणित बिगाड़ दी। आम लोगों पर असर इस प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। जब बड़े स्तर पर फसल खराब होती है, तो कुछ ही हफ्तों में मंडियों में सप्लाई कम हो जाती है। इसका सीधा असर बाजार में कीमतों पर पड़ता है। प्याज की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ सकता है।
Continue Reading7 मई 2026
जोधपुर से आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों में भी प्याज की सप्लाई जाती है, इसलिए इस नुकसान का असर दूर-दराज के बाजारों में भी देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी दी थी कि 1 से 6 मई तक राजस्थान में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का सिलसिला जारी रह सकता है। जयपुर मौसम केंद्र के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में तेज हवाएं, धूल भरी आंधी, गरज-चमक और बारिश के साथ ओले गिरने की संभावना बनी हुई है।
6 मई तक ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है, जिसमें जयपुर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर समेत कई संभागों को शामिल किया गया है। लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम का यह पैटर्न कुछ दिन और जारी रह सकता है।
मौसम का मिला-जुला असर एक तरफ जहां इस बदलाव से गर्मी से थोड़ी राहत मिली है और तापमान सामान्य के आसपास बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ इससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। तेज आंधी के कारण पेड़ गिरने, बिजली लाइनों के टूटने और ट्रैफिक बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं। ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों और झोपड़ियों को ज्यादा नुकसान का खतरा रहता है, जबकि शहरों में होर्डिंग्स, टीन शेड और ढीले ढांचे उड़ने का जोखिम बढ़ जाता है।
Continue Reading6 मई 2026
किसानों के लिए दोहरी चुनौती किसानों के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल है। एक तरफ बारिश जमीन की नमी बढ़ाने में मदद करती है, जो अगली फसल के लिए अच्छी होती है। लेकिन जब फसल तैयार हो या भंडारण में हो, तब यही बारिश और ओले भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
कई जगहों पर खेतों में रखी फसल भीगने से सड़ने लगी है। गेहूं, चना और अन्य रबी फसलों पर भी असर पड़ने की आशंका है। खुले में रखे अनाज के अंकुरित होने और खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
क्या है समाधान? इस तरह की आपदाओं से बचाव के लिए दो स्तरों पर काम जरूरी है: समय पर मौसम चेतावनी – अगर किसानों को सही समय पर जानकारी मिल जाए, तो वे कटाई या मंडी भेजने के फैसले में बदलाव कर सकते हैं और नुकसान कम कर सकते हैं। तेज मुआवजा प्रक्रिया – फसल बीमा और सरकारी राहत की प्रक्रिया तेज और आसान होनी चाहिए, ताकि किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिल सके।
Continue Reading5 मई 2026
अक्सर देखा गया है कि कागजी प्रक्रिया और सर्वे में देरी के कारण किसान महीनों तक राहत का इंतजार करते हैं।
आगे क्या? संभावना है कि जिला प्रशासन और कृषि विभाग मिलकर नुकसान का सर्वे करेंगे और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करेंगे। अगर सही समय पर मदद मिलती है, तो किसान अगली बुवाई के लिए तैयार हो सकते हैं। लेकिन अगर राहत में देरी हुई, तो छोटे और सीमांत किसानों के लिए हालात और गंभीर हो सकते हैं। उन्हें खेती छोड़कर दूसरे काम की तलाश तक करनी पड़ सकती है।
निष्कर्ष जोधपुर और आसपास के इलाकों में आया यह मौसम बदलाव एक बार फिर दिखाता है कि खेती अब पूरी तरह मौसम पर निर्भर जोखिम भरा काम बनती जा रही है। जहां एक ओर यह बदलाव गर्मी से राहत देता है, वहीं दूसरी ओर किसानों की मेहनत और आम लोगों के बजट पर भारी पड़ता है। ऐसे हालात में जरूरी है कि मौसम पूर्वानुमान, इंफ्रास्ट्रक्चर, और किसान सहायता योजनाओं को और मजबूत बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे नुकसान को कम किया जा सके।
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5 मई 2026