Dr. Sanjay Reddy के अनुसार भारत में डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है और लाखों लोग बिना जांच के इससे अनजान हैं। खराब लाइफस्टाइल, मोटापा और कम फिजिकल एक्टिविटी इसके मुख्य कारण हैं, और अब यह युवाओं में भी तेजी से फैल रही है। बचाव के लिए सही खान-पान, नियमित व्यायाम, वजन कंट्रोल और समय-समय पर जांच जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को इस समस्या से निपटने के लिए एक मजबूत नेशनल प्रिवेंशन प्रोग्राम की जरूरत है।
भारत समेत पूरी दुनिया में डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है और यह अब एक बड़ा पब्लिक हेल्थ चैलेंज बन चुका है। एक इंटरव्यू में Dr.
Sanjay Reddy ने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए भारत को तुरंत एक मजबूत नेशनल डायबिटीज प्रिवेंशन प्रोग्राम की जरूरत है। भारत और दुनिया में डायबिटीज की स्थिति इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार, 2025 तक दुनिया में लगभग 583 मिलियन लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। भारत में यह संख्या 101 मिलियन से ज्यादा है और करीब 11.
Continue Reading1 मई 2026
7% आबादी इससे प्रभावित है। चिंता की बात यह है कि जितने लोग डायबिटीज से ग्रस्त हैं, उतने ही लोग बिना जांच के अनजान रहते हैं। भारत में करीब 120 मिलियन लोग प्रीडायबिटिक हैं, यानी उन्हें भविष्य में डायबिटीज होने का खतरा ज्यादा है। डायबिटीज बढ़ने के कारण डायबिटीज के बढ़ने के पीछे कई कारण हैं— जेनेटिक फैक्टर (परिवार में इतिहास) खराब लाइफस्टाइल कम फिजिकल एक्टिविटी ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाला खाना मोटापा और शहरी जीवन आजकल बच्चे भी कम खेलते हैं और ज्यादा स्क्रीन टाइम बिताते हैं, जिससे भविष्य में जोखिम और बढ़ रहा है। युवाओं में तेजी से बढ़ रहा खतरा पहले टाइप-2 डायबिटीज 40 साल के बाद ज्यादा दिखती थी, लेकिन अब 20–40 उम्र के लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है। कम उम्र में डायबिटीज होने का मतलब है कि व्यक्ति को लंबे समय तक बीमारी झेलनी पड़ती है और जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। शुरुआती लक्षण और जांच की जरूरत डायबिटीज अक्सर बिना लक्षण के होती है। कुछ मामलों में प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, वजन घटना, थकान या धुंधला दिखना जैसे लक्षण दिखते हैं, लेकिन ये बहुत कम लोगों में होते हैं। इसलिए 30 साल के बाद या जिन लोगों को जोखिम है, उन्हें नियमित जांच करानी चाहिए। बचाव के उपाय डायबिटीज से बचाव के लिए जरूरी है— संतुलित आहार नियमित व्यायाम (150–170 मिनट/सप्ताह) वजन नियंत्रण कम कार्बोहाइड्रेट और ज्यादा फाइबर अच्छी नींद और कम स्क्रीन टाइम धूम्रपान और शराब से दूरी ब्लड शुगर और व्यवहार लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) से पसीना, चक्कर, कन्फ्यूजन और अजीब व्यवहार हो सकता है। वहीं लंबे समय तक हाई शुगर दिमाग पर असर डाल सकती है और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है। क्या डायबिटीज ठीक हो सकती है?
Continue Reading27 अप्रैल 2026
विशेषज्ञों के अनुसार “रिवर्सल” शब्द सही नहीं है, लेकिन “रिमिशन” संभव है। अगर व्यक्ति वजन कम करे (लगभग 15%) और सही डाइट व दवाइयां ले, तो कुछ समय के लिए डायबिटीज कंट्रोल में आ सकती है और दवा बंद भी हो सकती है। टाइप-1 डायबिटीज की चुनौती टाइप-1 डायबिटीज बच्चों में ज्यादा होती है और इसमें शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। इसके लिए जीवनभर इंसुलिन लेना जरूरी होता है और इसका मैनेजमेंट शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। फैमिली हिस्ट्री का असर अगर माता-पिता दोनों को डायबिटीज है, तो बच्चों में इसका खतरा 80–90% तक हो सकता है। नई टेक्नोलॉजी और इलाज आजकल CGM (Continuous Glucose Monitoring), इंसुलिन पंप और नई दवाएं जैसे GLP-1 और SGLT2 inhibitors इलाज को बेहतर बना रही हैं। स्टेम सेल थेरेपी पर भी रिसर्च चल रही है, लेकिन यह अभी शुरुआती स्तर पर है। सरकार के लिए जरूरी कदम विशेषज्ञों का मानना है कि— देश में जागरूकता बढ़ानी होगी शुरुआती जांच को बढ़ावा देना होगा लाइफस्टाइल बदलाव पर फोकस करना होगा इलाज को सस्ता बनाना होगा आम लोगों के लिए संदेश सही खान-पान रखें रोज एक्टिव रहें 30 साल के बाद नियमित जांच कराएं दवाइयां समय पर लें रोज कम से कम 1 घंटा अपने स्वास्थ्य को दें निष्कर्ष डायबिटीज अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही, यह हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है। अगर समय रहते जागरूकता, जांच और लाइफस्टाइल में सुधार किया जाए, तो इस बढ़ती समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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1 मई 2026