AI के बढ़ते इस्तेमाल से भारतीय IT सेक्टर में बड़ा बदलाव आ रहा है। इससे कंपनियों की productivity बढ़ रही है, लेकिन पारंपरिक घंटे-आधारित सर्विस मॉडल पर दबाव पड़ रहा है और रेवेन्यू में 2–3% तक गिरावट आ सकती है। वहीं दूसरी तरफ AI नए मौके भी दे रहा है, जैसे जनरेटिव AI, क्लाउड और डेटा से जुड़े काम, जिनमें बड़ा ग्लोबल मार्केट बन रहा है। अब IT प्रोफेशनल्स के लिए नई स्किल्स सीखना जरूरी हो गया है, क्योंकि यही भविष्य में ग्रोथ और जॉब के अवसर तय करेगा।
भारतीय IT सेक्टर तेजी से एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ नई तकनीक नहीं, बल्कि पूरे बिजनेस मॉडल को बदलने वाली ताकत बन चुका है। हाल ही में देश की टॉप IT कंपनियों – TCS, Infosys, HCLTech, Wipro और Tech Mahindra – के FY26 नतीजों से यह साफ हो गया है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल से इंडस्ट्री का ढांचा बदल रहा है।
AI की मदद से कंपनियों की productivity तो बढ़ रही है, लेकिन इसका सीधा असर पारंपरिक effort-based (घंटों पर आधारित) सर्विस मॉडल पर पड़ रहा है। पहले जहां ज्यादा घंटे काम करने पर ज्यादा बिलिंग होती थी, अब वही काम कम समय और कम लोगों से हो रहा है, जिससे इस मॉडल पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में AI पारंपरिक IT सेवाओं के रेवेन्यू में हर साल 2–3% तक की गिरावट (deflation) ला सकता है। यानी कंपनियों को पहले जितना पैसा मिलता था, अब उसी काम के लिए कम रेवेन्यू मिल सकता है।
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हालांकि, यह बदलाव पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। AI नए अवसर भी खोल रहा है। जनरेटिव AI कंसल्टिंग, AI प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन और इंडस्ट्री-विशिष्ट AI सॉल्यूशंस जैसे क्षेत्रों में तेजी से ग्रोथ हो रही है। अनुमान है कि इन नई सेवाओं से 300–400 अरब डॉलर का बड़ा ग्लोबल मार्केट तैयार हो सकता है, जिसमें भारतीय कंपनियां अपनी मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रही हैं।
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर युवाओं और IT प्रोफेशनल्स पर पड़ रहा है। अब सिर्फ बेसिक कोडिंग स्किल्स काफी नहीं हैं। AI टूल्स, क्लाउड प्लेटफॉर्म, डेटा इंजीनियरिंग और डोमेन नॉलेज जैसी स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। जो लोग समय रहते खुद को अपग्रेड कर रहे हैं, उनके लिए नए मौके और बेहतर सैलरी ग्रोथ संभव है। वहीं जो लोग पुराने सपोर्ट या मेंटेनेंस रोल्स तक सीमित रहेंगे, उनके लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
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इंडस्ट्री लेवल पर भी कंपनियां तेजी से अपनी रणनीति बदल रही हैं। पिछले कुछ महीनों में IT कंपनियों ने AI, क्लाउड और स्पेशलाइज्ड स्किल्स वाली कंपनियों का बड़े स्तर पर अधिग्रहण (acquisition) किया है। FY26 की दूसरी छमाही में ही करीब 4 अरब डॉलर की डील्स हो चुकी हैं। इससे साफ है कि कंपनियां अब सिर्फ hiring पर नहीं, बल्कि तैयार टेक्नोलॉजी और स्किल्स खरीदकर तेजी से आगे बढ़ना चाहती हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI भारतीय IT सेक्टर के लिए “make or break” साबित हो सकता है। अगर कंपनियां सही समय पर AI को अपनाकर अपनी सर्विसेज को अपग्रेड करती हैं, तो वे ग्लोबल वैल्यू चेन में ऊपर जा सकती हैं। लेकिन अगर AI का इस्तेमाल सिर्फ लागत घटाने तक सीमित रह गया, तो इससे रोजगार और रेवेन्यू दोनों पर दबाव आ सकता है।
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सरकार और नीति-निर्माताओं के सामने भी बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें शिक्षा, स्किलिंग प्रोग्राम्स और रिसर्च इकोसिस्टम को AI के हिसाब से तैयार करना होगा।
अगर भारत अपने बड़े workforce को AI युग के हिसाब से ढालने में सफल रहता है, तो IT सेक्टर आने वाले वर्षों में भी देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बना रहेगा और विदेशी मुद्रा कमाने के साथ-साथ हाई-स्किल जॉब्स भी देता रहेगा।
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1 मई 2026