23 अप्रैल 2026 को देश में दो तरह का मौसम देखने को मिल रहा है—उत्तर और मध्य भारत में भीषण गर्मी और लू का असर है, जबकि पूर्व और पूर्वोत्तर राज्यों में आंधी-तूफान और भारी बारिश का अलर्ट जारी है। दिल्ली समेत कई इलाकों में तापमान 42–44°C तक जा सकता है। मौसम की इस स्थिति से आम लोग, किसान और मजदूर प्रभावित हो रहे हैं, वहीं विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन से भी जोड़ रहे हैं।
23 अप्रैल 2026 को देशभर में मौसम का दोहरा रूप देखने को मिल रहा है। एक तरफ उत्तर और मध्य भारत के कई इलाके भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं, तो दूसरी ओर पूर्व और पूर्वोत्तर राज्यों में आंधी-तूफान और भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा समेत 12 से ज्यादा राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर और मध्य भारत में गर्मी का कहर राजधानी दिल्ली में तापमान 23 अप्रैल को 42 डिग्री तक पहुंच सकता है, जबकि 24 और 25 अप्रैल को यह 43–44 डिग्री तक जाने की संभावना है। इसे देखते हुए हीटवेव की चेतावनी जारी की गई है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल के गंगा मैदानी क्षेत्र, बिहार और झारखंड के कई हिस्सों में 23 से 26 अप्रैल के बीच लू चलने की आशंका जताई गई है। पूर्व और पूर्वोत्तर में बारिश और तेज हवाएं दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत में मौसम का मिजाज बिल्कुल अलग है। यहां 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कई जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। इससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है। स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए सलाह तेज गर्मी और लू को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचने की सलाह दे रहे हैं। साथ ही ज्यादा पानी, नींबू पानी और ORS जैसे पेय पदार्थ लेने और हल्के, ढीले कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। वहीं जिन इलाकों में आंधी और बारिश का अलर्ट है, वहां बिजली गिरने, पेड़ गिरने और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। किसानों और मजदूरों पर असर यह दोहरा मौसम किसानों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। एक ओर तेज गर्मी खेती और काम के समय को प्रभावित कर रही है, तो दूसरी ओर अचानक बारिश और आंधी फसलों, फल-सब्जियों और ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती है। जलवायु परिवर्तन की ओर इशारा मौसम की ये चरम स्थितियां जलवायु परिवर्तन की ओर भी संकेत देती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अब समय आ गया है कि हीट एक्शन प्लान, बारिश के पानी का संचयन और जलवायु-अनुकूल फसलों जैसी दीर्घकालिक रणनीतियों पर गंभीरता से काम किया जाए। कुल मिलाकर, देश इस समय मौसम के दो अलग-अलग चरम रूपों का सामना कर रहा है, जिससे जनजीवन, कृषि और स्वास्थ्य सभी प्रभावित हो रहे हैं।
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1 मई 2026