जोधपुर साइबर क्राइम टीम ने 5 करोड़ की ATM ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरोह फर्जी डेबिट कार्ड से पैसे निकालकर उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में बदल देता था, जिससे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। पुलिस ने आरोपियों के पास से 95 डेबिट कार्ड, 30 सिम और कई बैंक दस्तावेज बरामद किए।
जोधपुर साइबर क्राइम यूनिट ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ATM कार्ड से जुड़ी करीब 5 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन में पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार किया और उनके पास से भारी मात्रा में फर्जी बैंकिंग सामान बरामद किया।
🔍 कैसे काम करता था गिरोह पुलिस जांच के अनुसार, यह गैंग देशभर के लोगों के बैंक खातों से ठगी की रकम निकालकर उसे ATM के जरिए तुरंत नकद में बदल देता था। इसके बाद इस पैसे को क्रिप्टोकरेंसी, खासकर USDT में बदल दिया जाता था, जिससे मनी ट्रेल को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। यह पूरा ऑपरेशन जोधपुर में किराए के कमरे से चलाया जा रहा था। गिरोह पिछले एक साल से पुलिस की निगरानी में था।
🚨 पुलिस की छापेमारी और गिरफ्तारी रविवार देर रात जोधपुर शहर के अलग-अलग ATM बूथों पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने छापा मारा। इस दौरान तीन आरोपियों — धनराज बिश्नोई (21), भजनलाल बिश्नोई (26) और अक्षय राजपुरोहित (22) — को ATM से लगातार कैश निकालते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
Continue Reading1 मई 2026
📦 क्या-क्या बरामद हुआ छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपियों के पास से मिला: 95 डेबिट कार्ड 30 सिम कार्ड 18 बैंक पासबुक 9 अलग-अलग नामों पर आए पार्सल 11 मोबाइल फोन शुरुआती जांच में सामने आया कि ये डेबिट कार्ड फर्जी KYC के जरिए देशभर से मंगवाए गए थे और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए पूरा नेटवर्क ऑपरेट किया जा रहा था।
⚙️ ठगी का तरीका गिरोह का तरीका बेहद तेज और प्लान्ड था। जैसे ही साइबर फ्रॉड से किसी खाते में पैसा आता, उसे 30 से 60 मिनट के अंदर ATM से निकाल लिया जाता था। इससे पहले कि पीड़ित शिकायत दर्ज कराए, खाते से पूरी रकम साफ हो जाती थी और ट्रांजैक्शन को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था। बाद में इस कैश को क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था, जिससे जांच और भी जटिल हो जाती थी।
Continue Reading27 अप्रैल 2026
⚠️ आम लोगों के लिए चेतावनी इस मामले में ज्यादातर पीड़ित छोटे व्यापारी, सैलरी क्लास और ग्रामीण इलाकों के लोग बताए जा रहे हैं, जो साइबर सुरक्षा के प्रति पूरी तरह जागरूक नहीं थे। ऐसी घटनाएं लोगों का डिजिटल बैंकिंग पर भरोसा कम कर सकती हैं और ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम की रफ्तार पर असर डाल सकती हैं।
📊 बड़ी चुनौतियां और आगे का रास्ता यह केस दो बड़ी समस्याओं को उजागर करता है: फर्जी KYC के जरिए बड़ी संख्या में बैंक खाते खोलना क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए बैंकों को हाई-रिस्क ट्रांजैक्शन पर रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम और मजबूत KYC वेरिफिकेशन लागू करना होगा। साथ ही, आम लोगों के लिए साइबर जागरूकता बेहद जरूरी है ताकि वे संदिग्ध लिंक, कॉल या OTP शेयर करने से बच सकें और किसी भी अनजान ट्रांजैक्शन पर तुरंत बैंक या साइबर सेल को सूचना दे सकें।
Continue Reading1 मई 2026
📌 निष्कर्ष जोधपुर पुलिस की यह कार्रवाई एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार है। लेकिन यह मामला यह भी दिखाता है कि डिजिटल दौर में सतर्क रहना कितना जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान कर सकती है।
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI.
#CyberCrime #JodhpurPolice #ATMScam #DigitalSafety #FraudAlert #IndiaNews #CyberAwareness #StaySafe #OnlineFraud #BreakingNews #NetGramNews
1 मई 2026
27 अप्रैल 2026
1 मई 2026
1 मई 2026