राजस्थान के कई जिलों में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी है, जिसका असर 7–8 अप्रैल तक और 10 अप्रैल तक तापमान पर रहेगा। इस बदलाव से जहां आम लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं किसानों की फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
राजस्थान में इस समय मौसम पूरी तरह बदल चुका है और 4 अप्रैल 2026 को भी कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार सीकर, झुंझुनूं, चूरू, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, जोधपुर और जैसलमेर में तेज आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना है। इस दौरान 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे पेड़ गिरने और कच्चे ढांचों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है। यह पूरा असर एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण देखने को मिल रहा है, जो गुरुवार शाम से एक्टिव हुआ और शुक्रवार को पश्चिमी और उत्तरी जिलों में अपना असर दिखा चुका है। जैसलमेर और श्रीगंगानगर के ग्रामीण इलाकों में गुरुवार रात से ही बारिश का दौर जारी है, जबकि शुक्रवार को कई जगहों पर ओलावृष्टि भी रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के अनुसार 6 अप्रैल से एक और मजबूत सिस्टम सक्रिय होगा, जिसका असर 7 और 8 अप्रैल को पूरे राजस्थान में देखने को मिल सकता है। यानी फिलहाल मौसम से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। IMD के ऑल इंडिया फोरकास्ट के मुताबिक, इस पश्चिमी विक्षोभ का असर सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भी तेज बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। इन राज्यों के किसानों को भी अलर्ट रहने की सलाह दी गई है। हालांकि, इस बदलते मौसम का एक सकारात्मक पहलू भी है। लगातार बादल और बारिश के कारण 10 अप्रैल तक तापमान सामान्य या उससे नीचे रहने की संभावना है, जिससे हीटवेव और लू जैसी स्थिति से फिलहाल राहत मिलेगी। जहां पहले तापमान 40–42 डिग्री तक पहुंच रहा था, अब वह गिरकर 30 के आसपास आ गया है, जिससे आम लोगों को गर्मी से काफी राहत मिली है। लेकिन मौसम में इस बदलाव का असर स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। नमी और ठंडी हवाओं के कारण बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में सर्दी-जुकाम, बुखार और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। डॉक्टरों ने हल्के गर्म कपड़े पहनने और सावधानी बरतने की सलाह दी है। कृषि क्षेत्र में यह मौसम चिंता का कारण बन सकता है। इस समय गेहूं, चना और सरसों की फसल कटाई के करीब है और बारिश व ओलावृष्टि से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को नुकसान हो सकता है। किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि फील्ड सर्वे तेजी से कराया जाए और मौसम आधारित फसल बीमा व इंटरेस्ट सबवेंशन जैसी योजनाओं को तुरंत लागू किया जाए, ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे हालात से निपटने के लिए राज्य स्तर पर मल्टी-हैजार्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम को गांव स्तर तक पहुंचाना जरूरी है। इसमें SMS, WhatsApp बॉट और कम्युनिटी रेडियो के जरिए समय पर अलर्ट और सलाह दी जा सकती है। साथ ही, शहरी क्षेत्रों में ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और कमजोर पेड़ों की पहचान जैसे कदम उठाकर नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
Continue Reading29 अप्रैल 2026
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1 मई 2026