जोधपुर सेंट्रल जेल में छापे के दौरान 13 मोबाइल मिलने से सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। जेल अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है और जांच चल रही है कि फोन अंदर कैसे पहुंचे और कितने इस्तेमाल में थे। यह मामला गंभीर माना जा रहा है क्योंकि पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। मोबाइल के जरिए जेल से अपराध चलने की आशंका है। प्रशासन सख्ती बढ़ा रहा है, लेकिन मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल बने हुए हैं।
जोधपुर लोकल: सेंट्रल जेल में 13 मोबाइल मिले, अधीक्षक पर कार्रवाई जोधपुर सेंट्रल जेल में छापेमारी के दौरान 13 मोबाइल फोन मिलने के बाद जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तलाशी के बाद संबंधित जेल अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आरोप है कि रोज़ा रख रहे कुछ कैदियों की खास निगरानी के दौरान यह मामला सामने आया, जिससे जेल के अंदर से मोबाइल के जरिए आपराधिक नेटवर्क चलने की आशंका फिर चर्चा में आ गई है। फिलहाल जांच इस बात पर फोकस कर रही है कि इतने मोबाइल जेल के अंदर पहुंचे कैसे और इनमें से कितने फोन एक्टिव इस्तेमाल में थे। जोधपुर सेंट्रल जेल पहले भी सुरक्षा में चूक और कैदियों के पास मोबाइल मिलने के मामलों को लेकर सुर्खियों में रह चुकी है, इसलिए इस बार की बरामदगी को सिर्फ “रूटीन” मामला मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। जेल मुख्यालय से भी रिपोर्ट मांगी गई है और संभावना है कि आने वाले दिनों में कुछ और अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। मोबाइल के जरिए रंगदारी, धमकी और बाहरी गैंग से तालमेल जैसी शिकायतें देशभर की जेलों में आम हो गई हैं, इसलिए जोधपुर का यह मामला बड़े स्तर पर भी देखा जा रहा है। जेल प्रशासन का कहना है कि मुलाक़ात, किचन, अस्पताल और निर्माण कार्य जैसे कई मूवमेंट पॉइंट्स पर मोबाइल की तस्करी रोकना चुनौतीपूर्ण है। लेकिन बार-बार मोबाइल मिलने से साफ है कि सर्च और निगरानी के मौजूदा इंतज़ाम काफी नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बॉडी स्कैनर, बेहतर जैमर और स्टाफ की नियमित जांच (ऑडिट) के बिना इस समस्या पर काबू पाना मुश्किल है। आम लोगों के नजरिए से देखें तो जेल के अंदर से चलने वाले आपराधिक नेटवर्क सीधे बाहर की कानून-व्यवस्था पर असर डालते हैं। मोबाइल के जरिए फिरौती कॉल, धमकियां और गवाहों पर दबाव जैसे मामले बढ़ सकते हैं, जिससे आम लोगों की सुरक्षा और न्याय प्रक्रिया दोनों प्रभावित होती हैं। इसलिए जोधपुर की यह घटना सिर्फ “जेल के अंदर की बात” नहीं, बल्कि पूरे शहर की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। फिलहाल प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है, इसलिए किन कैदियों से फोन मिले, वे किन मामलों में बंद हैं या किसी बड़े गैंग से कनेक्शन मिला है या नहीं—यह सब आगे की जांच के बाद ही साफ होगा।
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1 मई 2026