ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम के वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी जेल विकसित किया है, जो दांतों की घिस चुकी या नष्ट हो चुकी सबसे मजबूत परत 'टूथ इनेमल' (Tooth Enamel) को दोबारा उगाने में सक्षम है। यह तकनीक मुंह में मौजूद प्राकृतिक लार (Saliva) से कैल्शियम और फॉस्फेट खींचकर दांतों पर असली इनेमल जैसे क्रिस्टल बनाती है। प्रतिष्ठित जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस (Nature Communications) में प्रकाशित यह खोज दांतों की सड़न, सेंसिटिविटी और कैविटी के इलाज में दुनिया भर के डेंटिस्ट्री इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।
डेंटल साइंस की दुनिया में एक ऐसा ऐतिहासिक आविष्कार सामने आया है, जो दांतों के इलाज के पूरे तरीके को हमेशा के लिए बदल सकता है। अब तक यही माना जाता रहा है कि यदि दांतों की सुरक्षात्मक ऊपरी परत यानी टूथ इनेमल (Tooth Enamel) एक बार घिस जाए या सड़न की वजह से खत्म हो जाए, तो वह कभी दोबारा नहीं बन सकती।
लेकिन ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम (University of Nottingham) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा अनोखा जेल तैयार किया है, जो प्राकृतिक इनेमल को दोबारा उगाने (Regrow Enamel) में पूरी तरह कामयाब रहा है।
यह ऐतिहासिक रिसर्च नेचर कम्युनिकेशंस (Nature Communications) जर्नल में प्रकाशित हुई है। इस अध्ययन को यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम के स्कूल ऑफ फार्मेसी तथा केमिकल एंड एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने मिलकर पूरा किया है।
मानव शरीर में हड्डियां या अन्य मांसपेशियां टूटने-फूटने पर खुद-ब-खुद ठीक हो जाती हैं, क्योंकि उनमें जीवित कोशिकाएं होती हैं। लेकिन दांतों के इनेमल में कोई जीवित कोशिका नहीं होती। एक बार दांत पूरी तरह विकसित हो जाएं, तो शरीर के पास खोए हुए इनेमल को दोबारा बनाने का कोई प्राकृतिक रास्ता नहीं बचता।
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अब तक डेंटिस्ट केवल फ्लोराइड ट्रीटमेंट या कृत्रिम फिलिंग (मसाला भरने) के जरिए दांतों को बचाने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन ये तरीके केवल नुकसान को धीमा कर सकते हैं, इनेमल की मूल संरचना को दोबारा तैयार नहीं कर सकते। दुनिया की आधी आबादी दांतों की सड़न, दर्द और कैविटी की समस्या से जूझ रही है, जिससे निजात दिलाने में यह नई खोज मील का पत्थर बन सकती है।
इस क्रांतिकारी तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी है। इसे क्लिनिक में बिल्कुल पारंपरिक फ्लोराइड पेस्ट की तरह आसानी से दांतों पर लगाया जा सकता है।
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वैज्ञानिकों ने पाया कि यह जेल दांत की दूसरी परत यानी एक्सपोज्ड डेंटिन (Exposed Dentine) पर भी उतना ही असरदार है। जब इनेमल घिस जाता है या मसूड़े पीछे हटते हैं, तो डेंटिन खुल जाता है। डेंटिन में बारीक नलिकाएं होती हैं जो नसों तक सीधी ठंडी-गर्म संवेदना पहुंचाती हैं, जिससे तेज झनझनाहट और दर्द (सेंसिटिविटी) होती है।
यह जेल डेंटिन के ऊपर भी इनेमल जैसी मजबूत खनिज परत बना देता है, जिससे दांतों की सेंसिटिविटी हमेशा के लिए खत्म हो सकती है और फिलिंग की पकड़ भी कई गुना मजबूत हो जाती है।
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अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. अबशर हसन (Dr. Abshar Hasan) ने बताया कि उन्होंने लैब में ब्रश करने, खाना चबाने और खट्टे-एसिडिक खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने जैसी रोजमर्रा की वास्तविक परिस्थितियों में इस नए इनेमल की जांच की। परिणामों में सामने आया कि पुनर्जीवित इनेमल की यांत्रिक शक्ति और मजबूती बिल्कुल असली स्वस्थ इनेमल जैसी ही है।
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रिसर्च का नेतृत्व करने वाले बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अल्वारो माता (Professor Alvaro Mata) के अनुसार, इस तकनीक को बहुत जल्द क्लिनिक और आम मरीजों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। शोधकर्ताओं ने इसके व्यावसायीकरण के लिए 'मिनटेक-बायो' (Mintech-Bio) नाम से एक स्टार्टअप भी शुरू किया है और उम्मीद जताई है कि अगले साल तक इसका पहला कमर्शियल उत्पाद तैयार हो सकता है।
Q1. क्या यह नया जेल सचमुच दांतों के इनेमल को दोबारा उगा सकता है?
उत्तर: जी हां, यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम की रिसर्च के अनुसार, यह प्रोटीन आधारित जेल लार से कैल्शियम और फॉस्फेट लेकर प्राकृतिक इनेमल जैसी ही क्रिस्टल संरचना का दोबारा निर्माण करता है।
Q2. पारंपरिक फ्लोराइड ट्रीटमेंट और इस जेल में क्या अंतर है?
उत्तर: पारंपरिक फ्लोराइड केवल मौजूदा इनेमल को थोड़ा मजबूत करता है या नुकसान धीमा करता है, जबकि यह जेल खो चुके इनेमल को वास्तव में दोबारा री-कंस्ट्रक्ट (पुनर्जीवित) करता है।
Q3. क्या यह जेल दांतों की सेंसिटिविटी (झनझनाहट) को ठीक कर सकता है?
उत्तर: बिल्कुल, यह जेल एक्सपोज्ड डेंटिन (Dentin) पर इनेमल जैसी सुरक्षा परत बना देता है, जिससे ठंडे या गर्म की वजह से नसों में होने वाला दर्द और झनझनाहट बंद हो जाती है।
Q4. यह तकनीक आम लोगों के लिए कब तक उपलब्ध हो सकेगी?
उत्तर: शोधकर्ताओं ने Mintech-Bio स्टार्टअप के जरिए इसे बाजार में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और अगले वर्ष तक इसका पहला क्लिनिकल प्रोडक्ट पेश करने की योजना है।