मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन से जुड़ी फैटी लिवर बीमारी (MASLD) से पीड़ित मरीजों के लिए शराब और सिगरेट का सेवन बेहद घातक साबित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल 'फ्रंटियर्स इन मेडिसिन' में प्रकाशित एक नए शोध के अनुसार, इस लिवर बीमारी से ग्रस्त जो मरीज शराब पीने के साथ-साथ धूम्रपान भी करते हैं, उनमें मौत का जोखिम सामान्य की तुलना में करीब 17 गुना तक बढ़ जाता है। वहीं, शराब का सेवन मृत्यु के समग्र जोखिम को दोगुना से अधिक कर देता है।
मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD), जिसे आम भाषा में मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ा फैटी लिवर कहा जाता है, को लेकर एक चौंकाने वाला वैज्ञानिक अध्ययन सामने आया है। शोध के अनुसार, इस स्थिति से जूझ रहे मरीजों में शराब का सेवन मृत्यु के जोखिम को दोगुना कर देता है, जबकि धूम्रपान (स्मोकिंग) करने वालों में यह खतरा लगभग 17 गुना तक बढ़ जाता है।
यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक पत्रिका 'फ्रंटियर्स इन मेडिसिन' (Frontiers in Medicine) में प्रकाशित हुआ है। यह शोध दक्षिण कोरिया के सूनचुनह्यांग यूनिवर्सिटी सियोल हॉस्पिटल (Soonchunhyang University Seoul Hospital) के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर यंग चांग और उनके सहयोगी शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है।
MASLD लिवर से जुड़ी एक पुरानी और गंभीर स्थिति है, जिसमें लिवर की कोशिकाओं में अत्यधिक वसा (फैट) जमा हो जाता है। यह स्थिति आमतौर पर मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या डिस्लिपिडेमिया (कोलेस्ट्रॉल असंतुलन) जैसी मेटाबॉलिक विकृतियों के साथ विकसित होती है।
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शोध दल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं पोषण परीक्षण सर्वेक्षण में शामिल 7,783 वयस्कों के स्वास्थ्य आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। इस अध्ययन से कैंसर, हृदय रोग और वायरल संक्रमण के पुराने इतिहास वाले व्यक्तियों को अलग रखा गया और इस डेटा को वर्ष 2023 तक के मृत्यु रिकॉर्ड से जोड़कर देखा गया।
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डेटा विश्लेषण से सामने आया कि MASLD से पीड़ित जो मरीज शराब का सेवन करते हैं, उनमें स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में मृत्यु का जोखिम 2.09 गुना (दोगुने से अधिक) पाया गया। वहीं, कैंसर से होने वाली मौतों के मामले में भी गंभीर आंकड़े सामने आए:
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अध्ययन का सबसे डरावना पहलू धूम्रपान को लेकर सामने आया। शोध के मुताबिक, इस लिवर बीमारी के साथ शराब पीने और धूम्रपान करने वाले मरीजों में मृत्यु का जोखिम अत्यधिक बढ़ जाता है। जो मरीज नियमित स्मोकिंग करते हैं, उनमें कभी धूम्रपान न करने वाले मरीजों की तुलना में मौत का खतरा लगभग 17 गुना अधिक पाया गया।
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अध्ययन में यह भी स्पष्ट किया गया कि जो MASLD मरीज शराब नहीं पीते, वे भी पूरी तरह खतरे से बाहर नहीं हैं। उनके मामले में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन), मोटापा और हाई ब्लड शुगर मृत्यु दर को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक साबित हुए।
रिसर्च के अनुसार, मरीज में मौजूद प्रत्येक अतिरिक्त मेटाबॉलिक समस्या हृदय संबंधी रोगों से होने वाली मौत के जोखिम को करीब 1.8 गुना बढ़ा देती है। विशेष रूप से हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त मरीजों में सामान्य रक्तचाप वाले लोगों की तुलना में दिल का दौरा (हार्ट अटैक) या स्ट्रोक जैसी बीमारियों से मरने का खतरा 5.6 गुना अधिक दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि फैटी लिवर की समस्या को केवल एक सामान्य शारीरिक बदलाव मानकर नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। यदि समय रहते शराब, सिगरेट से पूरी तरह दूरी न बनाई जाए और वजन व ब्लड प्रेशर को नियंत्रित न किया जाए, तो यह बीमारी जानलेवा जटिलताओं का रूप ले सकती है।
Q1. MASLD क्या है और यह क्यों होता है?
उत्तर: MASLD का मतलब 'मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज' है। यह लिवर में अत्यधिक फैट जमा होने से होता है, जो आमतौर पर मोटापे, टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप या खराब कोलेस्ट्रॉल के कारण विकसित होता है।
Q2. इस अध्ययन के अनुसार स्मोकिंग फैटी लिवर के मरीजों के लिए कितनी खतरनाक है?
उत्तर: अध्ययन के अनुसार, MASLD से पीड़ित जो मरीज धूम्रपान (सिगरेट) करते हैं, उनमें कभी स्मोकिंग न करने वाले मरीजों की तुलना में मौत का जोखिम 17 गुना अधिक होता है।
Q3. अगर कोई MASLD मरीज शराब नहीं पीता, तो उसे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर: शराब न पीने वाले मरीजों को अपने ब्लड प्रेशर, वजन और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि हाई बीपी होने पर दिल की बीमारी या स्ट्रोक का खतरा 5.6 गुना तक बढ़ जाता है।
Q4. क्या अत्यधिक शराब पीने से कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है?
उत्तर: हां, शोध के अनुसार अधिक मात्रा में शराब पीने वाले MASLD मरीजों में कैंसर से मौत का खतरा कम शराब पीने वालों की तुलना में 7.8 गुना अधिक देखा गया है।
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