अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का 50 करोड़ डॉलर (करीब 4,100 करोड़ रुपये) का नील गेह्रेल्स स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप बुधवार को पृथ्वी के वायुमंडल में समाकर आग के गोले में तब्दील हो गया। इस ऐतिहासिक टेलीस्कोप का जीवनकाल बढ़ाने के लिए भेजा गया रोबोटिक रेस्क्यू मिशन इस साल की शुरुआत में विफल हो गया था, जिसके बाद लगभग 22 साल पुराने इस वैज्ञानिक मिशन का आधिकारिक समापन हो गया।
अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में दो दशकों से अधिक समय तक अहम खोजों का गवाह रहा नासा का नील गेह्रेल्स स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप (Neil Gehrels Swift Observatory) अब इतिहास का हिस्सा बन चुका है।
लगभग 1,452 किलोग्राम (करीब 3,200 पाउंड) वजनी यह अंतरिक्ष वेधशाला बुधवार को अनियंत्रित होकर पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल हुई और अत्यधिक घर्षण के कारण जलकर नष्ट हो गई। इसके साथ ही अंतरिक्ष में दो दशक से चल रहे एक ऐतिहासिक वैज्ञानिक अध्याय का पटाक्षेप हो गया।
Loading...
नासा ने इस उम्रदराज वेधशाला को बचाने और इसके जीवनकाल को आगे बढ़ाने के लिए पूरी कोशिश की थी। इस साल गर्मियों में एजेंसी ने एक विशेष रोबोटिक रेस्क्यू स्पेसक्राफ्ट 'लिंक' (LINK) को वर्जीनिया स्थित नासा के वॉलोप्स फ्लाइट फैसिलिटी से नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन पेगासस एक्सएल रॉकेट के जरिए लॉन्च किया था।
इस मिशन का मुख्य मकसद टेलीस्कोप की कक्षा (Orbit) को दुरुस्त करके इसे नया जीवन देना था। हालांकि, यह बचाव अभियान तकनीकी दिक्कतों के कारण सफल नहीं हो सका और अंततः टेलीस्कोप तेजी से पृथ्वी की कक्षा की ओर गिरने लगा।
Loading...
नासा के वैज्ञानिकों और ट्रैकिंग एजेंसियों के अनुसार, स्विफ्ट वेधशाला ने पृथ्वी के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों (Tropics) के ऊपर वायुमंडल में पुनः प्रवेश (Re-entry) किया। अत्यधिक गति और हवा के घर्षण के कारण वायुमंडल में आते ही इसका बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो गया।
Loading...
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी और स्वतंत्र अनुसंधान संस्था द एयरोस्पेस कॉरपोरेशन लगातार इसकी निगरानी कर रहे थे। एयरोस्पेस कॉरपोरेशन ने इसके पुनः प्रवेश के लिए सुबह 5:19 बजे ईएसटी (भारतीय समयानुसार दोपहर बाद) के आसपास दो घंटे की विंडो का अनुमान लगाया था, जबकि अमेरिकी स्पेस फोर्स ने तड़के 3:30 बजे ईएसटी का समय आंका था।
Loading...
Loading...
वैज्ञानिकों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि पृथ्वी पर इस मलबे से इंसानों को नुकसान पहुंचने की संभावना न के बराबर है। यूएस स्पेस फोर्स (US Space Force) के आकलन के मुताबिक, इस घटना से धरती पर किसी व्यक्ति को चोट पहुंचने या नुकसान होने की संभावना 2,100 में से केवल 1 (1 in 2,100 chance) थी।
ऐसे अधिकांश भारी अंतरिक्ष उपकरण वायुमंडल में ही भस्म हो जाते हैं और बचे हुए छोटे टुकड़े समुद्र या निर्जन क्षेत्रों में गिरते हैं।
Loading...
स्विफ्ट टेलीस्कोप का यह दुखद अंत केवल एक मिशन की समाप्ति नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी की निचली कक्षा में पुराने उपग्रहों की सर्विसिंग और रिपेयरिंग की जटिलताओं को भी उजागर करता है। अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे (Space Debris) और दशकों पुराने उपकरणों को रोबोटिक माध्यम से बचाने के अभियान आज भी बेहद जोखिम भरे और तकनीकी रूप से कठिन साबित हो रहे हैं।
1. नासा का स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप पृथ्वी पर क्यों गिरा?
टेलीस्कोप को बचाने और उसकी कक्षा ऊपर उठाने के लिए भेजा गया रोबोटिक रेस्क्यू मिशन विफल हो गया था, जिसके बाद 22 साल पुराना यह उपग्रह अपनी कक्षा से नीचे खिसकते हुए वायुमंडल में दाखिल हो गया।
2. स्विफ्ट टेलीस्कोप की अनुमानित लागत और वजन कितना था?
इस टेलीस्कोप की लागत करीब 50 करोड़ डॉलर (लगभग 4,100 करोड़ रुपये) थी और इसका कुल वजन लगभग 1,452 किलोग्राम (3,200 पाउंड) था।
3. क्या इसके मलबे से पृथ्वी पर किसी नुकसान की आशंका थी?
अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार, इसके मलबे से किसी भी इंसान को नुकसान पहुंचने की आशंका 2,100 में से मात्र 1 थी, क्योंकि इसका अधिकांश हिस्सा हवा में ही जल गया।
Disclaimer
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI. इस लेख में इस्तेमाल की गई तस्वीरें सिर्फ समझाने के लिए हैं। कुछ तस्वीरों को AI की मदद से एडिट किया गया है।
Published by: Zoya. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.