दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Ltd) ने जुलाई-सितंबर तिमाही (Q2 FY27) में 53 प्रतिशत की सालाना बढ़त के साथ 6,516 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। हालांकि, बढ़ते परिचालन खर्चों और लागत के कारण यह आंकड़ा विश्लेषकों के 70,610 करोड़ रुपये के अनुमान से कम रहा। इसके साथ ही कंपनी के बोर्ड ने शेयरधारकों के लिए 10.25 रुपये प्रति शेयर के दूसरे अंतरिम लाभांश (Dividend) की घोषणा की है, जिसकी रिकॉर्ड डेट 4 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।
सरकारी स्वामित्व वाली कोयला खनन दिग्गज कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Limited) ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के वित्तीय परिणाम जारी कर दिए हैं।
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मजबूत मांग के दम पर कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 53 प्रतिशत बढ़कर 6,516 करोड़ रुपये (लगभग 68.37 करोड़ डॉलर) पर पहुंच गया। हालांकि, विश्लेषकों द्वारा लगाए गए 70,610 करोड़ रुपये के लाभ अनुमान के मुकाबले नतीजे कमजोर साबित हुए हैं।
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कंपनी का परिचालन राजस्व (Revenue from Operations) भी सालाना आधार पर लगभग 20.9 प्रतिशत बढ़कर 44,179 करोड़ रुपये रहा।
भारत की लगभग तीन-चौथाई कोयला आपूर्ति पूरी करने वाली कोल इंडिया को लागत के मोर्चे पर भारी दबाव का सामना करना पड़ा। कंपनी के कुल खर्च 17 प्रतिशत उछलकर 383.98 अरब रुपये (₹38,398 करोड़) हो गए। इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं:
लागत बढ़ने के कारण कंपनी का शुद्ध लाभ मार्जिन (Net Profit Margin) सालाना आधार पर 22 प्रतिशत से घटकर 17 प्रतिशत पर आ गया।
तिमाही के दौरान देश में बिजली की भारी खपत के चलते कोयला आधारित बिजली उत्पादन में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कोल इंडिया के ग्राहकों को होने वाली बिक्री में 12 प्रतिशत का उछाल आया, जिसने कंपनी की 3.8 प्रतिशत की उत्पादन वृद्धि को पीछे छोड़ दिया।
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कंपनी को ई-नीलामी (e-Auction) से भी बेहतर भाव मिला। ई-नीलामी से औसत प्राप्ति बढ़कर 3,082.21 रुपये प्रति टन रही, जो पिछले साल इसी अवधि में 2,973.32 रुपये प्रति टन थी। कंपनी की कुल औसत मूल्य प्राप्ति में भी 159.43 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। कंपनी अपनी कुल बिक्री का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा ई-नीलामी के जरिए बेचती है, जबकि बाकी आपूर्ति दीर्घकालिक अनुबंधों (Fuel Supply Agreements) के तहत होती है।
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वित्तीय नतीजों के साथ ही कोल इंडिया के निदेशक मंडल ने 10 रुपये के फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 10.25 रुपये के दूसरे अंतरिम लाभांश (Interim Dividend) को मंजूरी दी है। कंपनी ने शेयरधारकों की पात्रता तय करने के लिए बुधवार, 4 नवंबर 2026 को रिकॉर्ड डेट (Record Date) तय किया है। पात्र निवेशकों के बैंक खातों में लाभांश का भुगतान 27 नवंबर 2026 या उससे पहले कर दिया जाएगा।
विश्लेषकों का कहना है कि कोल इंडिया का 5 साल का अर्निंग्स ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत रहा है और कंपनी अपने मुनाफे और फ्री कैश फ्लो का एक नियंत्रित हिस्सा ही डिविडेंड के रूप में बांटती है, जिससे इसका डिविडेंड यील्ड लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है।
Q1: सितंबर तिमाही में कोल इंडिया को कितना शुद्ध मुनाफा हुआ?
उत्तर: कोल इंडिया ने जुलाई-सितंबर तिमाही में 6,516 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया, जो पिछले साल की इसी तिमाही से 53 प्रतिशत अधिक है।
Q2: लाभ में 53% की बढ़त के बाद भी इसे अनुमान से कमजोर क्यों माना गया?
उत्तर: बाजार विश्लेषकों ने कंपनी का शुद्ध लाभ 70,610 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था। बुनियादी ढांचे के विकास, गहरी खदानों के खर्च और कर्मचारी लागत में 17% की बढ़ोतरी के कारण मार्जिन घटकर 17% रह गया।
Q3: कोल इंडिया ने कितना डिविडेंड घोषित किया है और रिकॉर्ड डेट क्या है?
उत्तर: कंपनी ने 10.25 रुपये प्रति शेयर के दूसरे अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 4 नवंबर 2026 तय की गई है और भुगतान 27 नवंबर तक होगा।
Q4: कोल इंडिया के शेयर पर डिविडेंड पाने के लिए खरीदारी की अंतिम तारीख क्या है?
उत्तर: शेयर के 4 नवंबर को एक्स-डिविडेंड होने के चलते निवेशकों के लिए डीमैट खाते में शेयर सुनिश्चित करने हेतु 3 नवंबर 2026 तक खरीदारी करना जरूरी था।
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