'यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी' में प्रकाशित नए शोध के अनुसार, हीटेड टोबैको प्रोडक्ट्स (जैसे IQOS) का महज एक बार इस्तेमाल भी रक्त वाहिकाओं, दिल और डीएनए को तत्काल नुकसान पहुंचाता है। जर्मनी के यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर मेंज के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि ये उत्पाद पारंपरिक सिगरेट के मुकाबले किसी भी तरह सुरक्षित नहीं हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है, नसों की कार्यक्षमता घटती है और शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई कमजोर पड़ती है।
तंबाकू कंपनियों द्वारा अक्सर हीटेड टोबैको प्रोडक्ट्स (HTPs) को पारंपरिक सिगरेट के मुकाबले सुरक्षित और कम नुकसानदेह विकल्प बताकर प्रचारित किया जाता है। इन उत्पादों में तंबाकू को जलाने के बजाय सिर्फ गर्म (हीट) किया जाता है।
लेकिन 'यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी' में प्रकाशित एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने इन सभी दावों की हवा निकाल दी है। शोध के अनुसार, हीटेड टोबैको का सिर्फ एक सेशन भी नसों और पूरे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम (दिल और रक्त प्रणाली) को तुरंत मापने योग्य नुकसान पहुंचाता है।
इसके साथ ही यह रक्त कोशिकाओं के डीएनए को भी क्षतिग्रस्त करता है।
यह महत्वपूर्ण अध्ययन जर्मनी के यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर मेंज की शोधकर्ता डॉ. ली स्ट्रॉम (Dr Lea Strohm) के नेतृत्व में किया गया है। डॉ. ली स्ट्रॉम ने बताया कि तंबाकू गर्म करने वाले इन डिवाइसों को कम हानिकारक बताकर बेचा जाता है, लेकिन दिल और शरीर पर पड़ने वाले इनके तत्काल दुष्प्रभावों पर स्वतंत्र वैज्ञानिक साक्ष्य बहुत सीमित थे। इस नए अध्ययन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह उत्पाद शरीर के लिए पूरी तरह असुरक्षित हैं।
इस परीक्षण में 30 स्वस्थ वयस्क स्मोकर्स को शामिल किया गया था, जिनकी औसत उम्र 34 वर्ष थी। अध्ययन में शामिल सभी लोग सामान्य रूप से स्वस्थ थे। शोधकर्ताओं ने परीक्षण से पहले सभी प्रतिभागियों के ब्लड सैंपल लिए, उनके ब्लड प्रेशर की जांच की और दाहिने हाथ की मुख्य धमनी का अल्ट्रासाउंड स्कैन करके रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता को मापा।
इसके बाद, प्रतिभागियों ने एक ही सेशन में लगातार दो तंबाकू स्टिक्स का इस्तेमाल डिवाइस के जरिए किया। इस्तेमाल के तुरंत बाद डॉक्टरों की टीम ने वही सारे मेडिकल टेस्ट दोबारा दोहराए। पहले और बाद के परिणामों की तुलना करने पर बेहद चौंकाने वाले बदलाव सामने आए।
परीक्षण के आंकड़ों से साफ हुआ कि हीटेड टोबैको का धुआं शरीर में जाते ही कई नकारात्मक प्रभाव डालता है:
डॉ. ली स्ट्रॉम के मुताबिक, परिणाम साबित करते हैं कि ये उत्पाद जैविक रूप से निष्क्रिय नहीं हैं। एक बार का संपर्क भी स्वस्थ इंसानों में वैस्कुलर डिस्फंक्शन, मेटाबॉलिक असंतुलन और जेनेटिक डैमेज पैदा करने के लिए काफी है।
इस रिसर्च के सह-लेखक और प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर थॉमस मुंजेल (Professor Thomas Münzel) ने परिणामों पर मुहर लगाते हुए कहा कि यह नतीजे यूरोपियन हार्ट जर्नल की हालिया समीक्षा से पूरी तरह मेल खाते हैं। प्रोफेसर थॉमस मुंजेल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "निकोटीन युक्त कोई भी उत्पाद सुरक्षित नहीं माना जा सकता, चाहे उसे सुलगाकर पिया जाए, गर्म किया जाए, वेप किया जाए या किसी अन्य रूप में शरीर के अंदर लिया जाए।"
प्रोफेसर थॉमस मुंजेल ने आगे समझाया कि भले ही हीटेड टोबैको में तंबाकू जलने से बनने वाले कुछ रसायन कम बनते हों, लेकिन यह शरीर में उतनी ही मात्रा में निकोटीन पहुंचाता है। यह निकोटीन रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाता है, ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और धमनियों में रुकावट (एथेरोस्क्लेरोसिस) को बढ़ावा देता है।
उन्होंने नीति निर्माताओं से अपील की है कि वे 'जले हुए' और 'बिना जले' निकोटीन का भेद करना बंद करें और सभी निकोटीन उत्पादों पर एक समान सख्त नियम लागू करें—जिसमें फ्लेवर पर प्रतिबंध, विज्ञापनों पर रोक और हर जगह नो-स्मोकिंग नियम शामिल होने चाहिए।
FREQUENTLY ASKED QUESTIONS — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: क्या हीटेड टोबैको प्रोडक्ट्स सामान्य सिगरेट से ज्यादा सुरक्षित हैं?
जवाब: बिल्कुल नहीं। नई वैज्ञानिक रिसर्च साबित करती है कि हीटेड टोबैको का एक सेशन भी सामान्य सिगरेट की तरह ही दिल, रक्त वाहिकाओं और डीएनए को तुरंत नुकसान पहुंचाता है।
सवाल 2: हीटेड टोबैको के इस्तेमाल से शरीर की ऑक्सीजन पर क्या असर पड़ता है?
जवाब: परीक्षण में पाया गया कि दिल की तरफ लौटने वाले रक्त में ऑक्सीजन सैचुरेशन स्तर 71% से गिरकर 46% पर आ गया, जिससे शरीर के अंगों को ऑक्सीजन मिलने में बाधा आती है।
सवाल 3: इस अध्ययन के प्रमुख वैज्ञानिक कौन हैं?
जवाब: यह अध्ययन जर्मनी के यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर मेंज की डॉ. ली स्ट्रॉम के नेतृत्व में किया गया, जिसमें वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर थॉमस मुंजेल भी शामिल थे।
सवाल 4: क्या हीटेड टोबैको से डीएनए को भी नुकसान होता है?
जवाब: हां, शोधकर्ताओं ने रक्त कोशिकाओं में तत्काल डीएनए क्षति और गंभीर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के स्पष्ट प्रमाण दर्ज किए हैं।
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