भारत के तेजी से बढ़ते शहरों में खान-पान और पोषण का दोहरा संकट खड़ा हो गया है। आईसीएमआर-इंडियाब (ICMR-INDIAB) अध्ययन के अनुसार, देश के वयस्कों में 11.4% डायबिटीज, 35.5% हाइपरटेंशन और 28.6% मोटापे की समस्या देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बुनियादी ढांचे की कमी, स्ट्रीट वेंडर्स के पास स्वच्छ पानी व स्टोरेज के अभाव और अलग-थलग काम कर रहे सरकारी विभागों के कारण यह स्थिति विकराल हो रही है। इससे निपटने के लिए म्युनिसिपल प्लानिंग और स्वास्थ्य नीतियों के तालमेल की जरूरत है।
नई दिल्ली: भारत में शहरीकरण की रफ्तार के साथ-साथ नागरिकों की थाली और सेहत में भी बड़ा बदलाव आ रहा है। ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरों की आबादी बाजार से खरीदे गए भोजन पर ज्यादा निर्भर है। ऐसे में भोजन की उपलब्धता, उसकी कीमत और सुरक्षा सीधे तौर पर लोगों की सेहत को प्रभावित कर रही है।
स्वास्थ्य शोधकर्ता शोबा सूरी के हालिया विश्लेषण के अनुसार, शहरी भारत में असंतुलित खान-पान, खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और लचर नीतियों के चलते गंभीर लाइफस्टाइल बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR-INDIAB) के अध्ययन के आंकड़े इस संकट की गंभीरता को दर्शाते हैं। देश में वयस्क आबादी के बीच 11.4 प्रतिशत लोग डायबिटीज, 35.5 प्रतिशत हाइपरटेंशन और 28.6 प्रतिशत मोटापे से जूझ रहे हैं। यह स्थिति शहरी इलाकों में और भी अधिक गंभीर है।
आंकड़ों के मुताबिक, 15 से 49 वर्ष की शहरी महिलाओं में अधिक वजन या मोटापे की दर वर्ष 2005-06 के 13 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 30.7 प्रतिशत हो चुकी है। देश के कई समुदायों में अब अल्पपोषण (अंडरन्यूट्रिशन), मोटापा और खान-पान से जुड़ी बीमारियां एक साथ देखने को मिल रही हैं।
भारतीय शहरों में रेहड़ी-पटरी वाले (स्ट्रीट वेंडर्स) लाखों कामकाजी लोगों को कम कीमत पर भोजन उपलब्ध कराते हैं। ये आमतौर पर रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और दफ्तरों के पास मौजूद होते हैं। हालांकि, ये वेंडर्स बुनियादी सुविधाओं के भारी अभाव में काम कर रहे हैं।
Published by: Zoya. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.
Previous Article
Next Article
पुणे में 170 स्ट्रीट-फूड वेंडर्स पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि उनके पास पीने योग्य साफ पानी, खाना सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज, कचरा प्रबंधन और सुरक्षित परिवहन की भारी कमी है।
हालांकि 'स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014' में उनके अधिकारों का कानूनी ढांचा तय किया गया है, लेकिन सुरक्षित संचालन के लिए जमीनी स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराने में बड़ा अंतर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आधुनिक रिटेल आउटलेट्स को बढ़ावा देने और पारंपरिक वेंडर्स पर दंडात्मक कार्रवाई करने से गरीबों के लिए सस्ते भोजन की पहुंच कम हो सकती है।
Loading...
शहरों में भागदौड़ भरी जिंदगी और समय की कमी के चलते अमीर और गरीब दोनों ही वर्ग बाहर के भोजन और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड पैकेज्ड स्नैक्स पर अधिक खर्च कर रहे हैं। हालांकि कम आय वर्ग को बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझना पड़ता है, वहीं संपन्न वर्ग खराब जीवनशैली और प्रोसेस्ड फूड से जुड़े खतरों का शिकार हो रहा है। इसके साथ ही शारीरिक सक्रियता (फिजिकल एक्टिविटी) की कमी शहरी जीवन में स्वास्थ्य जोखिमों को और बढ़ा रही है।
मौजूदा समय में कृषि, खाद्य सुरक्षा, नगर निगम, परिवहन और स्वास्थ्य विभाग एक-दूसरे से तालमेल किए बिना काम कर रहे हैं। भुवनेश्वर का उदाहरण बताता है कि 70 प्रतिशत लोग शहरी खेती (अर्बन फार्मिंग) अपनाना चाहते हैं, लेकिन संस्थागत ढांचे की कमी के कारण केवल 35 प्रतिशत ही ऐसा कर पाते हैं।
Loading...
इस स्थिति को सुधारने के लिए नीति निर्माताओं को कई अहम कदम उठाने की सलाह दी गई है:
Loading...
Loading...
Q1. ICMR-INDIAB अध्ययन के अनुसार भारत में लाइफस्टाइल बीमारियों के ताजा आंकड़े क्या हैं?
उत्तर: अध्ययन के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर वयस्कों में 11.4% लोग डायबिटीज, 35.5% हाइपरटेंशन और 28.6% मोटापे की समस्या से ग्रसित हैं, जो शहरी इलाकों में अधिक तेजी से बढ़ रहा है।
Q2. शहरी महिलाओं में मोटापे की दर में क्या बदलाव आया है?
उत्तर: 15 से 49 वर्ष की शहरी महिलाओं में अधिक वजन या मोटापे की दर वर्ष 2005-06 में 13% थी, जो 2023-24 में बढ़कर 30.7% तक पहुंच गई है।
Q3. भारतीय शहरों में स्ट्रीट फूड वेंडर्स के सामने क्या मुख्य समस्याएं हैं?
उत्तर: वेंडर्स के पास पीने योग्य साफ पानी, खाद्य सामग्री रखने के लिए सुरक्षित तापमान (कोल्ड स्टोरेज), उचित कचरा प्रबंधन और सुरक्षित वेंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है।
Q4. शहरी पोषण संकट को दूर करने के लिए क्या नीतिगत उपाय सुझाए गए हैं?
उत्तर: वेंडिंग जोन में बुनियादी सुविधाएं देना, स्वास्थ्य व नगर निगम नियोजन में तालमेल बिठाना, वेंडर्स को स्वच्छता प्रशिक्षण देना और पैदल व साइकिल चलाने के लिए सुरक्षित रास्ते बनाना प्रमुख उपाय हैं।