हर साल 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस (World Stroke Day) मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस गंभीर न्यूरोलॉजिकल आपातकाल के प्रति जागरूकता फैलाना है। वर्ल्ड स्ट्रोक ऑर्गनाइजेशन द्वारा वर्ष 2026 के लिए 'Every Minute Counts' संदेश दिया गया है। सही समय पर लक्षणों की पहचान, त्वरित चिकित्सीय सहायता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर स्ट्रोक से होने वाले स्थायी नुकसान व जान के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
नई दिल्ली / हेल्थ डेस्क: मस्तिष्क हमारे शरीर का नियंत्रण केंद्र है, जिसे निरंतर ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति की आवश्यकता होती है। जब दिमाग के किसी हिस्से में रक्त संचार अवरुद्ध हो जाता है या रक्तवाहिका फट जाती है, तो ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति पैदा होती है।
इसके प्रति लोगों को सतर्क करने के लिए प्रतिवर्ष 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। वर्ल्ड स्ट्रोक ऑर्गनाइजेशन के अनुसार वर्ष 2026 में भी इसका मुख्य संदेश 'Every Minute Counts' (हर मिनट कीमती है) रखा गया है, ताकि लोग लक्षणों को तुरंत पहचानें और बिना देरी किए अस्पताल पहुंचें।
स्ट्रोक अचानक और किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। समय पर सही उपचार मिलने से मस्तिष्क क्षति, स्थायी विकलांगता और मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक घटाया जा सकता है।
चिकित्सा विज्ञान में मुख्य रूप से स्ट्रोक को दो श्रेणियों में बांटा गया है:
इसके अलावा, ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) जिसे 'मिनी स्ट्रोक' भी कहा जाता है, अल्पकालिक लक्षण पैदा करता है। भले ही इसके लक्षण कुछ मिनटों में ठीक हो जाएं, लेकिन इसे भविष्य के बड़े स्ट्रोक की चेतावनी मानकर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
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स्ट्रोक के लक्षण अचानक उभरते हैं। इनकी पहचान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य 'BE FAST' तरीका बेहद उपयोगी माना जाता है:
यदि किसी व्यक्ति में स्ट्रोक के लक्षण दिख रहे हों, तो तुरंत आपातकालीन एम्बुलेंस को सूचित करें और यह जरूर नोट करें कि लक्षण सबसे पहले किस समय शुरू हुए थे।
सावधानी: मरीज को खुद से कोई भी दवा—विशेष रूप से एस्पिरिन (Aspirin)—बिल्कुल न दें, और न ही कुछ खाने या पीने को दें। यदि स्ट्रोक हैमरेजिक (ब्लीडिंग वाला) हुआ, तो एस्पिरिन स्थिति को और भी घातक बना सकती है। एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध होने पर मरीज को स्वयं निजी वाहन से ले जाने के बजाय पैरामेडिकल टीम की निगरानी में अस्पताल पहुंचाना बेहतर होता है।
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स्ट्रोक के प्रमुख कारणों में अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर सबसे बड़ा कारक है। इसके अलावा निम्नलिखित कारक खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं:
जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाकर स्ट्रोक के ज्यादातर मामलों को टाला जा सकता है:
स्ट्रोक के बाद मरीज की रिकवरी इस बात पर निर्भर करती है कि मस्तिष्क का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हुआ है और इलाज कितनी जल्दी शुरू किया गया था। कई मरीज समय पर उपचार और निरंतर फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी व स्पीच थेरेपी की मदद से सामान्य जीवन में लौट आते हैं। स्ट्रोक के बाद दोबारा अटैक से बचने के लिए नियमित फॉलो-अप और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करना अनिवार्य है।
Q1: विश्व स्ट्रोक दिवस (World Stroke Day) कब मनाया जाता है?
उत्तर: विश्व स्ट्रोक दिवस हर वर्ष 29 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसका मकसद लोगों को स्ट्रोक के लक्षण और रोकथाम के प्रति जागरूक करना है।
Q2: स्ट्रोक की पहचान के लिए BE FAST का क्या मतलब है?
उत्तर: यह एक मेडिकल एक्रोनिम है—B (Balance/संतुलन), E (Eyes/आंखें), F (Face/चेहरा), A (Arms/हाथ), S (Speech/बोली) और T (Time/समय पर त्वरित मदद)।
Q3: क्या स्ट्रोक के मरीज को तुरंत एस्पिरिन देनी चाहिए?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। जब तक अस्पताल में ब्रेन स्कैन द्वारा यह पुष्टि न हो जाए कि स्ट्रोक किस प्रकार का है, तब तक मरीज को एस्पिरिन या कोई अन्य दवा न दें। हैमरेजिक स्ट्रोक में एस्पिरिन जानलेवा हो सकती है।
Q4: मिनी स्ट्रोक (TIA) क्या होता है और क्या यह खतरनाक है?
उत्तर: ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) में लक्षण कुछ समय के लिए आते हैं और फिर ठीक हो जाते हैं। भले ही इसके लक्षण चले जाएं, यह भविष्य में बड़े स्ट्रोक का गंभीर संकेत हो सकता है, इसलिए तुरंत जांच करानी चाहिए।
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