पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), जिसे हाल ही में पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) नाम दिया गया है, अब केवल प्रजनन अंगों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि PMOS से पीड़ित महिलाओं के मस्तिष्क ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म, सोचने-समझने की क्षमता और ब्रेन स्ट्रक्चर में अंतर देखा जा रहा है। हालांकि, यह बदलाव स्थायी हैं या भविष्य में डिमेंशिया जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं, इस पर अभी ठोस वैज्ञानिक प्रमाण जुटाए जा रहे हैं।
पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS), जिसे पूर्व में पीसीओएस (PCOS) के नाम से जाना जाता था, लंबे समय से महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य से जोड़कर ही देखा जाता रहा है।
लेकिन हाल के वर्षों में मेडिकल साइंस ने यह स्पष्ट किया है कि यह केवल अंडाशय (ओवरी) की समस्या नहीं है, बल्कि एक जटिल मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है। इसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस एक मुख्य लक्षण के रूप में सामने आता है, जो अधिकांश मरीजों को प्रभावित करता है।
अब वैज्ञानिकों का ध्यान इस बात पर गया है कि क्या इस सिंड्रोम से जुड़े हार्मोनल और मेटाबॉलिक असंतुलन का असर मस्तिष्क के स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक कार्यों (Cognitive Performance) पर भी पड़ता है। 'जर्नल ऑफ द एंडोक्राइन सोसाइटी' में प्रकाशित एक नए शोध में इस बात की समीक्षा की गई है कि क्या PMOS से ग्रसित महिलाओं में भविष्य में डिमेंशिया या याददाश्त से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।
मस्तिष्क को ठीक से काम करने और न्यूरॉन्स की गतिविधियों के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो मुख्य रूप से ब्रेन ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म से मिलती है।
वर्ष 2015 में 'PLOS ONE' पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पीईटी (PET) स्कैन की मदद से 7 PMOS पीड़ित और 11 गैर-पीड़ित महिलाओं के मस्तिष्क में ग्लूकोज के अवशोषण (Glucose Uptake) की जांच की गई थी।
उस परीक्षण में पाया गया कि PMOS से पीड़ित महिलाओं के दिमाग के कई हिस्सों में ग्लूकोज की खपत कम थी, और यह कमी सीधे तौर पर गंभीर इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ी हुई थी। हालांकि, यह शुरुआती अध्ययन था और इसने यह पूरी तरह साबित नहीं किया था कि इसका असर लंबे समय में दिमागी कार्यप्रणाली पर क्या पड़ेगा।
इसके बाद, वर्ष 2024 में 'न्यूरोलॉजी' जर्नल में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन ने इस जांच को आगे बढ़ाया। शोधकर्ताओं ने 'कार्डिया' (CARDIA) अध्ययन के आंकड़ों का विश्लेषण किया, जिसमें मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं के दिमाग की जांच की गई। इस शोध के परिणाम काफी अहम रहे:
वैज्ञानिकों के अनुसार, इन दिमागी बदलावों के पीछे सबसे मुख्य कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस हो सकता है। यह स्थिति लगभग 75 से 95 प्रतिशत PMOS मरीजों में पाई जाती है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सामान्य प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं, तो शरीर संतुलन बनाने के लिए अधिक मात्रा में इस हार्मोन का निर्माण करता है, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपरइंसुलिनमिया (Hyperinsulinemia) कहा जाता है।
शरीर में मौजूद यह अतिरिक्त इंसुलिन अंडाशय में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) के स्तर को बढ़ा देता है। इसके अलावा, इंसुलिन का मस्तिष्क में भी एक बेहद जरूरी कार्य होता है। यह न्यूरोनल फंक्शन, सिनैप्टिक प्लास्टिसिटी और मेमोरी पाथवे में अहम भूमिका निभाता है। डायबिटीज के मामलों में भी इंसुलिन रेजिस्टेंस को न्यूरोनल मेटाबॉलिज्म के बिगड़ने और याददाश्त की कमजोरी से जोड़कर देखा जाता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा एट बर्मिंघम में रिप्रोडक्टिव एंडोक्रिनोलॉजी और गायनेकोलॉजी के प्रोफेसर तथा इस शोध के वरिष्ठ लेखक रिकार्डो अज़ीज़ (Ricardo Azziz) ने एक महत्वपूर्ण अंतर की ओर इशारा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
"हम सामान्य इंसुलिन रेजिस्टेंस और फेल होते बीटा सेल्स के फंक्शन को एक समान नहीं मान सकते। टाइप 2 डायबिटीज में जहां अग्न्याशय की बीटा कोशिकाएं कमजोर होने से इंसुलिन का उत्पादन धीरे-धीरे घट जाता है, वहीं PMOS में इंसुलिन रेजिस्टेंस आमतौर पर लगातार बने रहने वाले हाइपरइंसुलिनमिया के साथ होता है।"
वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि शुरुआती नतीजे यह संकेत देते हैं कि PMOS महिलाओं के दिमागी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है, लेकिन अभी यह दावा नहीं किया जा सकता कि यह सिंड्रोम सीधे तौर पर दिमाग को नुकसान पहुंचाता है। मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, संवहनी स्वास्थ्य (Vascular Health) और जीवनशैली से जुड़े अन्य कारण भी इन दिमागी अंतरों की वजह हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तय करने के लिए कि क्या खुद PMOS दिमागी स्वास्थ्य में बदलाव का मुख्य कारक है या फिर यह सामान्य मेटाबॉलिक जोखिमों का नतीजा है, व्यापक स्तर पर लॉन्ग-टर्म क्लिनिकल स्टडीज की आवश्यकता है।
प्रश्न 1: PMOS क्या है और इसका पुराना नाम क्या था?
उत्तर: PMOS का पूरा नाम पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) है, जिसे पहले आमतौर पर PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) के नाम से जाना जाता था।
प्रश्न 2: अध्ययनों में PMOS पीड़ित महिलाओं के दिमाग में क्या बदलाव पाए गए हैं?
उत्तर: शोध में पाया गया है कि ऐसी महिलाओं के मस्तिष्क में ग्लूकोज अपटेक कम होता है, उनकी वर्बल मेमोरी और एग्जीक्यूटिव फंक्शन का स्कोर कमजोर रहा है, साथ ही उनके ब्रेन व्हाइट मैटर की इंटीग्रिटी भी कम दर्ज की गई है।
प्रश्न 3: PMOS में इंसुलिन रेजिस्टेंस की क्या भूमिका है?
उत्तर: लगभग 75 से 95 फीसदी PMOS मरीजों में इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है। इससे शरीर में इंसुलिन की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, जिसका प्रभाव मस्तिष्क के उन सिग्नल्स और पाथवे पर पड़ सकता है जो याददाश्त और न्यूरोनल फंक्शन को नियंत्रित करते हैं।
प्रश्न 4: क्या PMOS सीधे तौर पर डिमेंशिया का कारण बनता है?
उत्तर: अभी तक के वैज्ञानिक अध्ययनों में यह सीधे तौर पर साबित नहीं हुआ है कि PMOS से डिमेंशिया होता ही है। विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा, वैस्कुलर हेल्थ और मेटाबॉलिक रिस्क फैक्टर्स की भूमिका समझने के लिए और बड़े अध्ययनों की जरूरत है।
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