बाजार की यह रिकवरी सीधी नहीं रही। दिन के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में बार-बार तेजी और गिरावट का सिलसिला देखने को मिला। कुछ शेयरों में खरीदारी बढ़ने से सूचकांकों को सहारा मिला, जबकि आईटी कंपनियों में बिकवाली, महंगा कच्चा तेल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले को लेकर अनिश्चितता ने बाजार की बढ़त को सीमित रखा।
नई दिल्ली / मुंबई, 28 अक्टूबर 2026 (बुधवार): भारतीय शेयर बाजार में आज जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सुबह कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स लगभग 995 अंक तक टूट गया और एनएसई निफ्टी 50 भी 22,500 के स्तर से नीचे फिसल गया। हालांकि निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने के बाद बाजार ने अपनी गिरावट का एक हिस्सा कम कर लिया।
बाजार की यह रिकवरी सीधी नहीं रही। दिन के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में बार-बार तेजी और गिरावट का सिलसिला देखने को मिला। कुछ शेयरों में खरीदारी बढ़ने से सूचकांकों को सहारा मिला, जबकि आईटी कंपनियों में बिकवाली, महंगा कच्चा तेल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले को लेकर अनिश्चितता ने बाजार की बढ़त को सीमित रखा।
सुबह के निचले स्तर से रिकवरी के बावजूद बाजार में कमजोरी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी। दोपहर लगभग 2:17 बजे उपलब्ध विलंबित आंकड़ों के अनुसार सेंसेक्स 72,968.59 पर था, जो पिछले बंद के मुकाबले लगभग 630 अंक नीचे था।
इसलिए बुधवार के कारोबार को केवल भारी गिरावट या पूरी तरह संभल चुके बाजार के रूप में देखना उचित नहीं होगा। यह फिलहाल गिरावट, निचले स्तर पर खरीदारी और बार-बार बदलती दिशा वाला कारोबारी सत्र है।
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बुधवार सुबह बाजार ने कमजोर शुरुआत की। लगभग 9:15 बजे सेंसेक्स 603 अंक गिरकर 72,995 के आसपास था। वहीं निफ्टी 50 करीब 133 अंक टूटकर 22,616 पर कारोबार कर रहा था।
इसके बाद बिकवाली तेज हुई और सेंसेक्स लगभग 72,604 के निचले स्तर तक पहुँच गया। निफ्टी भी फिसलकर लगभग 22,498 तक आ गया।
आईटी शेयरों में गिरावट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से संबंधित चिंताओं ने निवेशकों की जोखिम लेने की इच्छा कमजोर की।
सुबह लगभग 11:27 बजे तक बाजार में उल्लेखनीय सुधार दिखाई दिया।
इस समय सेंसेक्स 73,047.78 और निफ्टी 22,630.70 पर पहुँच गए थे। सेंसेक्स की गिरावट करीब 551 अंक तथा निफ्टी की गिरावट लगभग 119 अंक रह गई थी।
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सुबह के निचले स्तरों की तुलना में यह महत्वपूर्ण रिकवरी थी।
बाजार में इस सुधार के पीछे कम कीमतों पर खरीदारी, चुनिंदा दिग्गज कंपनियों के शेयरों में मजबूती और पिछले दिन विदेशी निवेशकों की शुद्ध खरीदारी जैसे कारकों की भूमिका रही।
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दोपहर में बाजार की दिशा लगातार बदलती रही।
लगभग 2:17 बजे उपलब्ध विलंबित सेंसेक्स आंकड़े 72,968.59 के स्तर और 0.86 प्रतिशत की गिरावट दिखा रहे थे।
इससे संकेत मिलता है कि बाजार सुबह के निचले स्तर से संभला जरूर था, लेकिन रिकवरी का पूरा लाभ बनाए नहीं रख सका।
इसी तरह के कारोबारी माहौल को बाजार की भाषा में वोलैटिलिटी (Volatility) कहा जाता है, जिसमें शेयरों और सूचकांकों के मूल्य कम समय में बार-बार बदलते हैं।
ध्यान दें: इस रिपोर्ट के आंकड़े अलग-अलग समय के इंट्राडे अपडेट हैं। इन्हें बाजार के अंतिम बंद भाव के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग 115.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया।
पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ने और सऊदी अरब की एक रिफाइनरी पर हमले से संबंधित खबरों ने तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ने, रुपये पर दबाव आने और महंगाई के जोखिम में वृद्धि होने की आशंका रहती है।
इसका प्रभाव विमानन, परिवहन, पेंट, केमिकल और अन्य तेल-निर्भर क्षेत्रों की लागत पर पड़ सकता है।
हालांकि महंगे तेल का प्रभाव अलग-अलग कंपनियों और सेक्टरों पर अलग होता है। कुछ ऊर्जा उत्पादक कंपनियों के लिए ऊँची कीमतें लाभकारी भी हो सकती हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएँ अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है।
यदि इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो तेल परिवहन तथा कीमतों पर प्रभाव पड़ सकता है।
निवेशक ऐसी परिस्थितियों में जोखिम वाले निवेश कम कर सकते हैं। हालांकि सभी भू-राजनीतिक आशंकाओं को वास्तविक या आधिकारिक रूप से पुष्टि की गई सैन्य घटनाओं के समान नहीं मानना चाहिए।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर 2026 को मौद्रिक नीति बैठक निर्धारित है।
भारतीय कारोबार के दौरान निवेशक ब्याज दरों और फेड की भविष्य की नीति से संबंधित संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
सितंबर 2026 से फेडरल फंड्स रेट का लक्षित दायरा 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत रहा है।
यदि फेड महंगाई के जोखिम को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर असर पड़ सकता है।
ऐसे बदलाव उभरते बाजारों, जिनमें भारत भी शामिल है, में विदेशी पूंजी के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।
बुधवार सुबह आईटी शेयरों में तेज बिकवाली दर्ज की गई।
निफ्टी आईटी इंडेक्स में एक समय 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई।
इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक और एमफैसिस जैसे बड़े नाम दबाव में रहे।
सुबह उपलब्ध कारोबारी अपडेट के अनुसार इंफोसिस में करीब 4.4 से 4.7 प्रतिशत, टीसीएस में लगभग 3 प्रतिशत और टेक महिंद्रा में 3 प्रतिशत से अधिक गिरावट देखी गई।
आईटी शेयरों में कमजोरी इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि ये कंपनियाँ प्रमुख बाजार सूचकांकों में पर्याप्त वजन रखती हैं।
वैश्विक बॉन्ड यील्ड, ऊँची ऊर्जा कीमतें और वित्तीय क्षेत्र से संबंधित नियामकीय घटनाक्रम भी बाजार की धारणा पर प्रभाव डाल रहे हैं।
एनबीएफसी कंपनियों के संदर्भ में भारतीय रिजर्व बैंक के प्रस्तावित रिवॉल्विंग क्रेडिट नियम चर्चा का विषय हैं।
बजाज फाइनेंस जैसी कंपनियों को भविष्य में कुछ ऋण उत्पादों की संरचना बदलनी पड़ सकती है। हालांकि इन नियमों से किसी कंपनी को होने वाला वास्तविक वित्तीय प्रभाव अंतिम दिशानिर्देशों और कंपनी की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
इन नियामकीय चिंताओं को बुधवार की पूरी बाजार गिरावट का स्वतंत्र रूप से प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता।
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जब सेंसेक्स और निफ्टी तेजी से नीचे आए, तो कुछ निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों की कम हुई कीमतों पर खरीदारी की।
इसे वैल्यू बाइंग या निचले स्तर पर खरीदारी कहा जाता है।
ऐसी खरीदारी से शेयरों के भाव को सहारा मिल सकता है, खासकर जब गिरावट के बाद बड़े निवेशक गुणवत्ता वाली कंपनियों में अवसर देखते हैं।
हालांकि वैल्यू बाइंग का अर्थ यह नहीं है कि बाजार में आगे गिरावट की संभावना समाप्त हो गई है।
27 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में लगभग 4,240.39 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी।
यह हाल के कारोबारी सत्रों की तुलना में सकारात्मक संकेत था।
इसी दिन घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 1,250 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी।
विदेशी निवेशकों की यह गतिविधि बाजार की धारणा को कुछ समर्थन दे सकती है।
लेकिन यह आंकड़ा 27 अक्टूबर का है, इसलिए इसे 28 अक्टूबर की वास्तविक समय की विदेशी खरीदारी के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
जहाँ आईटी सेक्टर दबाव में रहा, वहीं लार्सन एंड टुब्रो और बजाज ऑटो जैसे चुनिंदा शेयरों ने बाजार को सहारा दिया।
L&T के मजबूत तिमाही नतीजों के बाद कंपनी के शेयर में शुरुआती कारोबार में लगभग 6 प्रतिशत की तेजी देखी गई।
जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ सालाना आधार पर लगभग 32.5 प्रतिशत बढ़कर 5,202.10 करोड़ रुपये रहा।
दूसरी तरफ बजाज ऑटो के शेयरों में भी करीब 3 प्रतिशत की बढ़त देखी गई।
इन बड़े शेयरों में खरीदारी ने सूचकांकों की गिरावट को सीमित करने में मदद की।
निफ्टी 50 के 22,500 के आसपास पहुँचने के बाद निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली।
कुछ बाजार विश्लेषकों ने 22,500 के स्तर को अल्पकालिक तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण माना है।
जब कोई प्रमुख इंडेक्स ऐसे स्तर के नजदीक पहुँचता है, तो शॉर्ट कवरिंग और नई खरीदारी से तेजी से रिकवरी हो सकती है।
शॉर्ट कवरिंग में वे कारोबारी अपनी पहले की बिकवाली वाली पोजीशन बंद करने के लिए खरीदारी करते हैं।
फिर भी 22,500 को निश्चित सपोर्ट या भविष्य की तेजी की गारंटी नहीं माना जा सकता।
भारतीय बाजार की कमजोर शुरुआत के विपरीत कई एशियाई बाजारों में सकारात्मक रुख देखा गया।
दक्षिण कोरिया का कॉस्पी सुबह लगभग 6 प्रतिशत तक चढ़ा। अमेरिकी शेयर बाजार भी पिछले सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे।
इसके अलावा कॉर्पोरेट नतीजों, बड़े ऑर्डर और जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग जैसी घटनाओं ने चुनिंदा कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनाए रखी।
इस तरह बाजार में एक ओर वैश्विक अनिश्चितता के कारण बिकवाली थी, तो दूसरी ओर कंपनी-विशेष सकारात्मक घटनाओं से खरीदारी हो रही थी।
बुधवार को जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग प्रमुख घटनाओं में शामिल रही।
कंपनी के शेयर 1,119 रुपये के आईपीओ मूल्य के मुकाबले लगभग 21.4 प्रतिशत प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए।
इसकी लिस्टिंग लगभग 1,359 रुपये पर हुई।
इतनी बड़ी लिस्टिंग ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया, हालांकि व्यापक बाजार की दिशा तय करने वाले अन्य कारक भी महत्वपूर्ण बने रहे।
बुधवार को व्यापक बाजार में भी अलग-अलग समय पर मिश्रित रुझान दिखाई दिए।
शुरुआती कारोबार में कुछ मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने बड़े सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया था।
हालांकि दिन बढ़ने के साथ बाजार का रुख बदलता रहा और कई छोटे तथा मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव आया।
इससे पता चलता है कि सेंसेक्स या निफ्टी की चाल को ही पूरे शेयर बाजार की स्थिति नहीं मानना चाहिए।
बाजार की वास्तविक मजबूती समझने के लिए बढ़ने और गिरने वाले शेयरों की संख्या, सेक्टोरल प्रदर्शन तथा ट्रेडिंग वॉल्यूम पर भी नजर रखना जरूरी है।
तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव विदेशी मुद्रा बाजार में भी दिखाई दिया।
Reuters की 28 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 95.19 के स्तर पर कमजोर हुआ, जबकि पिछला बंद लगभग 95.1150 था।
हालांकि सरकारी बैंकों की डॉलर बिक्री और संभावित आरबीआई हस्तक्षेप से रुपये की कमजोरी सीमित रही।
भारत के लिए कच्चे तेल की ऊँची कीमतें इसलिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि तेल आयात का भुगतान मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा में किया जाता है।
रुपये में अधिक कमजोरी और महंगे तेल का एक साथ असर आयातित महंगाई का जोखिम बढ़ा सकता है।
बुधवार के कारोबार में एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि निवेशकों की राय और गतिविधियों में स्पष्ट अंतर दिखाई दिया।
एक तरफ अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के कारण निवेशक आईटी तथा अन्य चुनिंदा शेयरों से दूरी बना रहे थे। दूसरी तरफ कुछ निवेशक कम कीमतों पर अच्छी कंपनियों के शेयर खरीद रहे थे।
इससे बाजार में बार-बार खरीदारी और बिकवाली का दौर बना रहा।
इस प्रकार का उतार-चढ़ाव कई परिस्थितियों में बढ़ सकता है:
इसलिए किसी समय सूचकांक में तेज रिकवरी दिखाई देना आवश्यक रूप से पूरे दिन के लिए तेजी का संकेत नहीं होता।
बाजार की अगली दिशा को लेकर निवेशक कुछ प्रमुख तकनीकी स्तरों पर नजर रख सकते हैं।
निफ्टी 50:
22,500 का स्तर आज सुबह की रिकवरी के संदर्भ में महत्वपूर्ण रहा है। यदि निफ्टी इसके नीचे लगातार बना रहता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ने की आशंका हो सकती है।
ऊपर की तरफ 22,650 से 22,750 के बीच का क्षेत्र तत्काल निगरानी योग्य है, क्योंकि पिछले बंद का स्तर 22,749.75 था।
इसके ऊपर 22,825 के आसपास 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) को कुछ तकनीकी विश्लेषकों ने महत्वपूर्ण माना है।
ये स्तर बाजार का निश्चित भविष्य नहीं बताते और वास्तविक ट्रेडिंग में बदलते रहते हैं।
सेंसेक्स:
सेंसेक्स के लिए सुबह का निचला स्तर लगभग 72,604 महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु है।
ऊपर की ओर 73,000 और पिछले बंद 73,598.67 के आसपास बाजार की प्रतिक्रिया पर नजर रखी जा सकती है।
यदि बाजार इन क्षेत्रों के ऊपर टिकता है, तो रिकवरी का संकेत मजबूत हो सकता है। इसके विपरीत दोबारा बिकवाली बढ़ने से सूचकांक पर दबाव लौट सकता है।
बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की दिशा कई अलग-अलग परिस्थितियों से प्रभावित हो रही है।
निवेशकों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव, पश्चिम एशिया से आने वाली खबरें, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का नीतिगत बयान, विदेशी निवेशकों का प्रवाह और घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजे महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को देखते हुए जोखिम प्रबंधन भी जरूरी है।
तेजी से रिकवरी के बाद खरीदारी करना या अचानक गिरावट देखकर शेयर बेच देना, दोनों निर्णय बिना पर्याप्त मूल्यांकन के जोखिमपूर्ण हो सकते हैं।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कंपनी की कमाई, कर्ज, मूल्यांकन, व्यवसाय की गुणवत्ता और अपने निवेश लक्ष्यों का अध्ययन अधिक महत्वपूर्ण है।
28 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में सुबह भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स लगभग 995 अंक तक टूटा और निफ्टी 22,500 के नीचे पहुँचा।
इसके बाद निवेशकों की निचले स्तरों पर खरीदारी और चुनिंदा दिग्गज शेयरों में मजबूती से बाजार में रिकवरी हुई।
हालांकि आईटी शेयरों की कमजोरी, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और वैश्विक नीतिगत अनिश्चितता के कारण कारोबार में बार-बार उतार-चढ़ाव जारी रहा।
बुधवार के कारोबार की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुबह की गिरावट और बाद की रिकवरी दोनों को साथ समझना जरूरी है। बाजार ने कमजोरी से उबरने की कोशिश की, लेकिन सत्यापित दोपहर के आंकड़ों तक पूरी गिरावट की भरपाई नहीं हुई थी।
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Q1. आज शेयर बाजार में सुबह बड़ी गिरावट के बाद रिकवरी क्यों हुई?
उत्तर: निचले स्तरों पर खरीदारी, चुनिंदा बड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़त और पिछले कारोबारी दिन विदेशी निवेशकों की मजबूत शुद्ध खरीदारी जैसे कारकों ने बाजार की धारणा को सहारा दिया।
Q2. क्या सेंसेक्स की 995 अंकों की पूरी गिरावट वापस आ गई?
उत्तर: उपलब्ध सत्यापित दोपहर के आंकड़ों के अनुसार नहीं। सेंसेक्स सुबह के निचले स्तर से ऊपर जरूर आया, लेकिन लगभग 2:17 बजे तक पिछले बंद के मुकाबले करीब 630 अंक नीचे था। बाद में इसमें और बदलाव संभव है।
Q3. निफ्टी बार-बार ऊपर-नीचे क्यों हो रहा है?
उत्तर: खरीदारी और बिकवाली के बीच प्रतिस्पर्धा, वैश्विक बाजार की खबरें, संस्थागत निवेशकों की गतिविधियाँ तथा तकनीकी स्तरों के आसपास ट्रेडिंग के कारण निफ्टी की दिशा बार-बार बदल सकती है।
Q4. क्या 22,500 निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण स्तर है?
उत्तर: आज के शुरुआती कारोबार में 22,500 के आसपास खरीदारी देखी गई थी। इसलिए यह एक महत्वपूर्ण इंट्राडे संदर्भ स्तर है, लेकिन इसे निश्चित सपोर्ट नहीं कहा जा सकता।
Q5. बाजार की रिकवरी में किन शेयरों का योगदान रहा?
उत्तर: सुबह के कारोबार में L&T और बजाज ऑटो जैसे शेयरों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया, जबकि आईटी शेयर दबाव में बने रहे।
Q6. क्या ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डॉलर से ऊपर है?
उत्तर: 28 अक्टूबर की शुरुआती अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में ब्रेंट क्रूड लगभग 115.40 से 115.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास दर्ज किया गया था। कीमत दिनभर बदल सकती है।
Q7. क्या आज बाजार फिर गिर सकता है?
उत्तर: शेयर बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव की भविष्यवाणी निश्चित रूप से नहीं की जा सकती। वैश्विक घटनाक्रम और निवेशकों की गतिविधियों के आधार पर बाजार में तेजी या गिरावट दोनों संभव हैं।
Q8. क्या बाजार में गिरावट के दौरान निवेश करना सही है?
उत्तर: केवल गिरावट के आधार पर निवेश का निर्णय नहीं लेना चाहिए। कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, मूल्यांकन, निवेश अवधि और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता का मूल्यांकन आवश्यक है।
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डेटा अपडेट: 28 अक्टूबर 2026, दोपहर 2 के कारोबार तक उपलब्ध सार्वजनिक स्रोत। सभी सूचकांक स्तर और शेयर मूल्य परिवर्तनशील हैं। अंतिम पुष्टि के लिए NSE तथा BSE के आधिकारिक आंकड़े देखें।
Disclaimer
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