चीन के दो स्वतंत्र अस्पताल कोहोर्ट्स पर आधारित एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने मशीन लर्निंग (XGBoost) मॉडल विकसित किया है, जो नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) से पीड़ित मरीजों में टाइप-2 डायबिटीज होने के जोखिम का पहले ही सटीक पूर्वानुमान लगा सकता है। यह मॉडल कमर की माप, फास्टिंग ग्लूकोज और न्यूट्रोफिल-टू-लिम्फोसाइट रेश्यो जैसे केवल 5 रूटीन क्लिनिकल संकेतकों के आधार पर 0.89 (89%) की बाहरी सत्यापन सटीकता (AUC) दर्ज करता है।
लाइव अपडेट बुलेटिन | तारीख: 28 अक्टूबर 2026
बीजिंग / नई दिल्ली:
नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD)—जिसे अब व्यापक रूप से मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) के रूप में जाना जाता है—से पीड़ित मरीजों के लिए मेडिकल साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। चीन के दो प्रमुख टर्शियरी अस्पतालों के स्वतंत्र डेटा पर आधारित एक नए शोध में वैज्ञानिकों ने मशीन लर्निंग मॉडल की मदद से टाइप-2 डायबिटीज (T2D) के मध्यम-अवधि जोखिम का सटीक अनुमान लगाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
यह अध्ययन प्रतिष्ठित शोध पत्रिका डायबिटोलॉजी एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम (Diabetology & Metabolic Syndrome) में प्रकाशित हुआ है।
आमतौर पर जटिल बीमारियों के लिए महंगे जेनेटिक या विशेष लैब टेस्ट की आवश्यकता होती है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने LASSO रिग्रेशन तकनीक का उपयोग करके ऐसे 5 सामान्य क्लिनिकल वेरिएबल्स की पहचान की है जो किसी भी आम क्लिनिक में आसानी से उपलब्ध होते हैं:
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शोधकर्ताओं ने सात अलग-अलग प्रेडिक्टिव मॉडल्स (लॉजिस्टिक रिग्रेशन, डिसीजन ट्री, रैंडम फॉरेस्ट, XGBoost, LightGBM, सपोर्ट वेक्टर मशीन और आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क यानी ANN) का परीक्षण किया।
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शुरुआती ट्रेनिंग में जहां ANN ने मजबूत प्रदर्शन दिखाया, वहीं स्वतंत्र बाहरी कोहोर्ट (External Validation Cohort) में XGBoost मॉडल ने 0.89 का प्रभावशाली AUC (Area Under the Curve) स्कोर दर्ज किया, जबकि ट्रेनिंग डेटासेट में इसका स्कोर 0.99 था। मॉडल की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने SHAP (Shapley Additive Explanations) का इस्तेमाल किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि प्रत्येक संकेतक ने मरीज के व्यक्तिगत जोखिम निर्धारण में क्या भूमिका निभाई।
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फैटी लिवर और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रहे मरीजों में भविष्य में डायबिटीज की संभावना बहुत अधिक रहती है। इस मॉडल की सहायता से डॉक्टर हाई-रिस्क वाले मरीजों की पहले ही पहचान कर सकेंगे और समय रहते खान-पान, जीवनशैली में बदलाव तथा क्लिनिकल निगरानी शुरू कर सकेंगे।
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हालांकि, शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि यह अध्ययन बायोप्सी-कन्फर्म्ड NAFLD के रेट्रोस्पेक्टिव डेटा पर आधारित है। इसे अस्पतालों में नियमित क्लिनिकल प्रैक्टिस का हिस्सा बनाने से पहले व्यापक और बड़े स्तर पर भावी (Prospective) मल्टी-सेंटर परीक्षणों की आवश्यकता होगी।
Q1: यह AI मॉडल फैटी लिवर के मरीजों में डायबिटीज का अनुमान कैसे लगाता है?
उत्तर: यह मॉडल मशीन लर्निंग (XGBoost) का उपयोग करता है और मरीज की कमर की माप, फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज, ट्राइग्लिसराइड्स, डायबिटीज का फैमिली हिस्ट्री और न्यूट्रोफिल-टू-लिम्फोसाइट रेश्यो (NLR) का विश्लेषण करके जोखिम का स्कोर तय करता है।
Q2: बाहरी परीक्षण में इस AI मॉडल की सटीकता कितनी रही है?
उत्तर: स्वतंत्र अस्पतालों के बाहरी सत्यापन कोहोर्ट (External Validation) में इस मॉडल ने 0.89 का AUC स्कोर दर्ज किया, जो लगभग 89% की उच्च प्रेडिक्टिव सटीकता को दर्शाता है।
Q3: क्या इस जांच के लिए किसी महंगे या विशेष टेस्ट की जरूरत है?
उत्तर: नहीं, मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शामिल सभी पांचों पैमाने नियमित क्लिनिकल जांच और सामान्य ब्लड टेस्ट के माध्यम से आसानी से मिल जाते हैं।
Q4: क्या यह सिस्टम अभी से सभी अस्पतालों में लागू हो चुका है?
उत्तर: नहीं, यह शोध का पहला चरण है। शोधकर्ताओं के अनुसार, नियमित क्लिनिकल उपयोग में लाने से पहले इसे बड़े पैमाने पर बहु-केंद्रित (Multicentre Prospective) परीक्षणों से गुजरना होगा।
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