नई स्टडी में सामने आया है कि महिलाओं में दिल की सेहत से जुड़ा पल्स प्रेशर 30 की उम्र के आखिरी सालों में ही बढ़ना शुरू हो सकता है। पुरुषों में यह बदलाव करीब 10 साल बाद दिखा। करीब 60 साल की उम्र तक महिलाओं में पल्स प्रेशर पुरुषों से ज्यादा पाया गया और यह बदलाव मेनोपॉज के समय से जुड़ा नहीं दिखा।
एक नई स्टडी में महिलाओं की दिल की सेहत को लेकर अहम बात सामने आई है। रिसर्च के मुताबिक महिलाओं में पल्स प्रेशर 30 की उम्र के आखिरी सालों में बढ़ना शुरू हो सकता है, जबकि पुरुषों में यह बदलाव आमतौर पर 40 की उम्र के आखिरी सालों में दिखाई देता है। यह बदलाव मेनोपॉज से काफी पहले शुरू हो सकता है। करीब 60 साल की उम्र तक महिलाओं में पल्स प्रेशर पुरुषों की तुलना में लगातार ज्यादा पाया गया।
क्या है पल्स प्रेशर? ब्लड प्रेशर में दो नंबर होते हैं। पहला ऊपर वाला नंबर और दूसरा नीचे वाला नंबर। इन दोनों नंबरों के बीच का अंतर पल्स प्रेशर कहलाता है। उम्र बढ़ने के साथ पल्स प्रेशर बढ़ना आम बात है। इसका एक कारण शरीर की सबसे बड़ी खून की नस, यानी महाधमनी (Aorta) का धीरे-धीरे सख्त होना हो सकता है।
जब यह नस पहले जैसी लचीली नहीं रहती, तो दिल को शरीर में खून पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। लंबे समय में इसका असर दिल और रक्त वाहिकाओं की सेहत पर पड़ सकता है।
9,500 से ज्यादा लोगों के आंकड़ों पर हुई स्टडी इस रिसर्च में 9,500 से ज्यादा लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों को देखा गया। इनमें 6,500 से अधिक महिलाएं और करीब 3,000 पुरुष शामिल थे।
ये सभी लोग Framingham Heart Study का हिस्सा थे। यह लंबे समय से चल रही हार्ट हेल्थ रिसर्च में से एक है। शोधकर्ताओं ने लोगों की तीन स्वास्थ्य जांचों के आंकड़ों को करीब 14 साल तक देखा। रिसर्च में पल्स प्रेशर में उम्र के साथ होने वाले बदलाव पर ध्यान दिया गया। इसमें महिलाओं और पुरुषों के बीच एक खास अंतर सामने आया।
महिलाओं में पल्स प्रेशर अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद करीब 30 की उम्र के आखिरी सालों में बढ़ना शुरू हुआ। पुरुषों में यह बदलाव करीब 40 की उम्र के आखिरी सालों में देखने को मिला। यानी महिलाओं में यह बदलाव पुरुषों के मुकाबले करीब 10 साल पहले शुरू होता दिखाई दिया।
60 की उम्र तक महिलाओं में ज्यादा रहा पल्स प्रेशर स्टडी के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ यह अंतर और साफ दिखाई देने लगा। करीब 60 साल की उम्र तक महिलाओं में पल्स प्रेशर पुरुषों से लगातार ज्यादा पाया गया।
शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि महिलाओं में मेनोपॉज किस उम्र में हुआ, इससे इस बदलाव की समय-सीमा में खास फर्क नहीं पड़ा। यानी किसी महिला को मेनोपॉज जल्दी हुआ या देर से, पल्स प्रेशर में बढ़ोतरी का पैटर्न उसी तरह बना रहा।
मेनोपॉज ही वजह नहीं है लंबे समय से महिलाओं की दिल की सेहत में होने वाले बदलावों को मेनोपॉज से जोड़कर देखा जाता रहा है। लेकिन इस स्टडी के नतीजे बताते हैं कि महिलाओं में पल्स प्रेशर का बढ़ना मेनोपॉज से काफी पहले शुरू हो सकता है।
Framingham Heart Study से जुड़े रिसर्चर Gary F. Mitchell ने कहा कि टीम को यह नतीजा उम्मीद से अलग लगा। उनके मुताबिक, मेनोपॉज के समय के अलावा भी कुछ दूसरे कारण महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ पल्स प्रेशर बढ़ने में भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, इस स्टडी में उन दूसरे कारणों की पूरी जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए सिर्फ इन नतीजों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि महिलाओं में यह बदलाव किस खास वजह से होता है।
महिलाओं की हार्ट हेल्थ को लेकर क्या समझ आया? इस रिसर्च से एक बात सामने आती है कि महिलाओं में दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़े कुछ बदलाव मेनोपॉज से कई साल पहले ही शुरू हो सकते हैं। खास तौर पर पल्स प्रेशर में बदलाव 30 की उम्र के आखिरी सालों से दिखाई देने लगा।
स्टडी में 14 साल तक लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों को देखा गया, जिससे उम्र के साथ पल्स प्रेशर में आने वाले बदलाव को समझने में मदद मिली।
रिसर्च का मुख्य फोकस महिलाओं और पुरुषों में पल्स प्रेशर के बदलने के समय को समझना था। इसमें महिलाओं में यह बदलाव पुरुषों की तुलना में करीब एक दशक पहले शुरू होने की बात सामने आई।
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