दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कक्षा 10 के टॉपर्स के घर जाकर ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम करने के आदेश पर कुछ शिक्षकों ने चिंता जताई है। शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा के दौरान निगरानी, कॉपी जांचने और दूसरे काम पहले से चल रहे हैं, ऐसे में फोटो-वीडियो बनाने और अपलोड करने की जिम्मेदारी से उनका काम और बढ़ गया है।
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कक्षा 10 के टॉप करने वाले छात्रों के घर जाकर उन्हें शुभकामनाएं देने के आदेश को लेकर कुछ शिक्षकों ने चिंता जताई है। शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा के समय पहले से ही कई जिम्मेदारियां हैं और ऐसे कार्यक्रम से उनका काम और बढ़ गया है।
शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल प्रमुखों को ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम कराने के लिए कहा गया था। इसके तहत स्कूल प्रमुख और दो शिक्षकों को 17 सितंबर की शाम 6 बजे से 7 बजे के बीच कक्षा 10 के टॉपर्स के घर जाना था। वहां दिया जलाकर छात्र को शिक्षा निदेशालय की ओर से शुभकामनाएं देनी थीं।
टॉपर्स के घर जाकर दिया जलाने का कार्यक्रम जोन स्तर पर जारी एक सरकारी सूचना के अनुसार, स्कूल प्रमुखों के साथ दो शिक्षकों को छात्रों के घर जाकर यह कार्यक्रम पूरा करना था। इस दौरान दिए जलाने के साथ छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए शुभकामनाएं देने को कहा गया।
स्कूलों को केवल कार्यक्रम करने के लिए ही नहीं कहा गया था, बल्कि इस पूरी गतिविधि की तस्वीरें और वीडियो भी बनाने के निर्देश दिए गए थे। इन तस्वीरों और वीडियो को तय किए गए Google Drive लिंक पर डालना था।
इसके अलावा, स्कूलों के आधिकारिक ग्रुप में भी कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी साझा करने को कहा गया था। क्लस्टर इंचार्ज को अलग से इन वीडियो और तस्वीरों को जमा करके तय समय में फोटो कोलाज और वीडियो तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
परीक्षा के बीच बढ़ा शिक्षकों का काम कुछ शिक्षकों का कहना है कि सितंबर में परीक्षाएं चल रही हैं और इस समय स्कूलों में पहले से ही काम का दबाव रहता है। शिक्षकों को परीक्षा में निगरानी करने, कॉपियां जांचने और दूसरे स्कूल के काम भी करने होते हैं।
एक शिक्षक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि परीक्षा के दौरान शिक्षकों की जिम्मेदारियां पहले से काफी होती हैं। ऐसे में शाम के समय घर जाकर कार्यक्रम करना उनके लिए अतिरिक्त काम बन गया है। शिक्षक का कहना है कि इससे पढ़ाई से जुड़े जरूरी कामों के लिए मिलने वाला समय भी कम हो सकता है।
शिक्षकों ने कार्यक्रम के समय को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर ऐसे कार्यक्रम परीक्षा के समय से अलग रखे जाएं तो स्कूल का काम संभालना आसान हो सकता है।
फोटो और वीडियो बनाने को लेकर भी चिंता शिक्षकों की एक और चिंता कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो बनाने को लेकर है। स्कूलों को हर दौरे की फोटो और वीडियो रिकॉर्ड करने और उन्हें तय जगह पर जमा करने के लिए कहा गया था।
शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा के समय इस तरह की जानकारी बार-बार जमा करने से काम बढ़ जाता है। एक अन्य शिक्षक ने कहा कि वीडियो अपलोड करने और किसी तरह की गलती न होने को लेकर लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं।
शिक्षक के अनुसार, इससे कई बार ध्यान पढ़ाने और परीक्षा से जुड़े काम के बजाय आदेश पूरा करने पर ज्यादा चला जाता है। शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा के समय स्कूलों में पढ़ाई और परीक्षा से जुड़े काम पहले से ही काफी होते हैं।
स्कूल प्रमुखों और शिक्षकों की जिम्मेदारी इस कार्यक्रम में स्कूल प्रमुखों की मुख्य भूमिका रखी गई थी। उन्हें दो शिक्षकों के साथ टॉपर्स के घर जाना था। इसके बाद कार्यक्रम की फोटो और वीडियो तैयार करके उन्हें तय माध्यम से भेजना था।
क्लस्टर स्तर पर भी इस कार्यक्रम की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी। क्लस्टर इंचार्ज को अलग-अलग स्कूलों से मिले वीडियो और तस्वीरों को जमा करना था और तय समय के अंदर उनका फोटो कोलाज और वीडियो तैयार करना था।
इस पूरी प्रक्रिया में स्कूलों को दिए गए समय का भी ध्यान रखना था। शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा के बीच ऐसी अतिरिक्त जिम्मेदारियां उनके रोज के काम को प्रभावित कर सकती हैं।
शिक्षकों ने क्या कहा? शिक्षकों के अनुसार, छात्रों को प्रोत्साहित करना अच्छी बात है, लेकिन इसके लिए समय भी सही होना चाहिए। परीक्षा के दौरान शिक्षक पहले से ही निगरानी, कॉपी जांचने और दूसरे जरूरी कामों में लगे रहते हैं। कुछ शिक्षकों ने यह भी कहा कि कार्यक्रम के साथ फोटो और वीडियो जमा करने की जिम्मेदारी ने काम को और बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि परीक्षा के समय स्कूलों का मुख्य ध्यान परीक्षा से जुड़े कामों पर होना चाहिए।
फिलहाल सामने आई जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग की ओर से ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम के तहत कक्षा 10 के टॉपर्स के घर जाने के निर्देश दिए गए थे। शिक्षकों ने इस कार्यक्रम के समय और इससे जुड़े अतिरिक्त काम को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है।
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