अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने से जुड़ा बिल पास किया है। इससे रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले भारत पर भी असर पड़ सकता है।
अमेरिका में एक नए कानून को लेकर भारत पर रूस से तेल खरीदने के कारण भारी टैरिफ लगने का खतरा बढ़ गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ऐसा बिल पास किया है, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिल सकता है।
रूस से सस्ता कच्चा तेल मिलने से भारत को पिछले चार साल में फायदा हुआ है, लेकिन अब यही तेल खरीद भारत और अमेरिका के बीच तनाव की वजह बन सकती है।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को रूस पर नए प्रतिबंध लगाने और रूस से तेल व गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने से जुड़ा कानून पास किया। अब यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा। अगर इसे कानून की मंजूरी मिलती है, तो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर इसका असर पड़ सकता है।
भारत और चीन इस मामले में खास तौर पर चर्चा में हैं, क्योंकि दोनों देश रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते हैं। Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2022 से अगस्त 2026 के बीच रूस के कच्चे तेल के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी करीब 50% रही। भारत करीब 37% हिस्से के साथ रूस के तेल का दूसरा बड़ा खरीदार रहा। इसके बाद तुर्की और यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी करीब 5-5% रही।
भारत के लिए क्यों अहम है रूसी तेल भारत दुनिया के बड़े तेल आयात करने वाले देशों में शामिल है। देश की तेल जरूरत का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा किया जाता है।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों की ओर से रूसी तेल पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं। इसके बाद रूस ने भारत जैसे देशों को ज्यादा तेल बेचना शुरू किया। कई मौकों पर यह तेल दूसरे बाजारों की तुलना में कम कीमत पर मिला।
भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के लिए यह एक बड़ा फायदा रहा। उन्हें कच्चे तेल की लगातार सप्लाई मिली और कम कीमत पर तेल मिलने से लागत को संभालने में मदद मिली।
Global Trade Research Initiative (GTRI) के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 30.3% थी। इस दौरान भारत ने रूस से करीब 40.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा। भारत का कुल कच्चा तेल आयात बिल 134.7 अरब डॉलर रहा।
जुलाई में रूस की हिस्सेदारी भारत के कच्चे तेल आयात में 50% से भी ज्यादा रही। यानी उस महीने भारत की तेल खरीद में रूस सबसे बड़ा सप्लायर था।
रूस के बाद कौन से देश भारत को तेल देते हैं जुलाई के आंकड़ों में रूस और दूसरे तेल सप्लायरों के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की हिस्सेदारी 10.8% रही, जबकि सऊदी अरब की हिस्सेदारी 9.6% थी।
इसके अलावा वेनेजुएला से भारत ने 6.3%, ब्राजील से 5.5% और ओमान से 5.3% कच्चा तेल खरीदा। अमेरिका की हिस्सेदारी 2.9% रही।
इन आंकड़ों के मुताबिक, रूस से भारत को मिलने वाला कच्चा तेल अकेले ही UAE, सऊदी अरब, वेनेजुएला, ब्राजील, ओमान और अमेरिका से मिलने वाले तेल के कुल हिस्से से ज्यादा था।
यही वजह है कि रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा भारत के लिए अहम माना जा रहा है। अगर 100% तक टैरिफ लगाया जाता है, तो रूस से तेल खरीदने से मिलने वाला कम कीमत का फायदा प्रभावित हो सकता है।
फिलहाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में बिल पास हुआ है और इसे आगे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। भारत पर इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कानून को किस रूप में मंजूरी मिलती है और रूस से तेल खरीदने वाले देशों के लिए इसमें क्या नियम रखे जाते हैं।
भारत के लिए रूसी कच्चा तेल पिछले कुछ वर्षों में तेल आयात का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। इसलिए अमेरिकी फैसले के आगे के कदम पर भारत की तेल खरीद और रूस से उसके कारोबार पर नजर रहेगी।
भारत रूस तेल, रूसी तेल, भारत अमेरिका, 100 प्रतिशत टैरिफ, अमेरिकी सदन, डोनाल्ड ट्रंप, नरेंद्र मोदी, रूस तेल खरीद Bharat Russia tel, rusi tel, Bharat America, 100 pratishat tariff, ameriki sadan, Donald Trump, Narendra Modi भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर 100 प्रतिशत टैरिफ का खतरा, अमेरिका में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ, India Russian oil 100 percent tariff threat भारत, रूस, अमेरिका, रूसी तेल, कच्चा तेल, डोनाल्ड ट्रंप, भारत अमेरिका संबंध, तेल आयात NetGramNews
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI. इस लेख में इस्तेमाल की गई तस्वीरें सिर्फ समझाने के लिए हैं। कुछ तस्वीरों को AI की मदद से एडिट किया गया है।
Published by: Ishrat. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.