बेंगलुरु में पानी के स्रोतों को प्रदूषित करने वाले अपार्टमेंट, घरों और उद्योगों पर कार्रवाई होगी। अधिकारियों को एक सप्ताह में रिपोर्ट देने और BWSSB व KSPCB को STP व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।
बेंगलुरु में नालों और जल स्रोतों में बिना उपचार का गंदा पानी छोड़ने वाली आवासीय और व्यावसायिक इकाइयों पर कार्रवाई की तैयारी है। अधिकारियों को एक सप्ताह में ऐसी इकाइयों की रिपोर्ट देने और BWSSB व KSPCB को एक महीने में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।
बेंगलुरु में पानी के स्रोतों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर कर्नाटक सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। वन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने गुरुवार को BWSSB और कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने अपार्टमेंट, अलग-अलग घरों, उद्योगों और व्यावसायिक संस्थानों से निकलने वाले बिना साफ किए गए पानी और कचरे को रोकने के निर्देश दिए।
मंत्री ने कहा कि ऐसे सभी संस्थानों की पहचान की जाएगी जो ड्रेनेज व्यवस्था से नहीं जुड़े हैं या तय नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर इन इकाइयों की पूरी रिपोर्ट देने को कहा गया है। इसके बाद नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सिर्फ 25 फीसदी STP ही सही तरीके से काम कर रहे रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि बेंगलुरु में काम कर रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति चिंता की बात है। उनके मुताबिक, केवल करीब 25 फीसदी STP ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों और तय मानकों के अनुसार काम कर रहे हैं। BWSSB को एक महीने के भीतर व्यवस्था सुधारने का समय दिया गया है। अगर तय समय में सुधार नहीं हुआ तो जिम्मेदार लोगों और संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बेंगलुरु में हर दिन करीब 2,580 मिलियन लीटर सीवेज निकलता है। अभी BWSSB के 37 STP काम कर रहे हैं, जिनकी कुल क्षमता 1,364.5 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। इसका मतलब है कि करीब 1,215.5 मिलियन लीटर सीवेज के उपचार की क्षमता की कमी बनी हुई है।
42 STP पर चल रहा काम सरकार ने BWSSB को 42 नए STP का काम तेजी से पूरा करने को कहा है। इनकी कुल क्षमता 1,147 मिलियन लीटर होगी। इसके साथ ही मौजूदा STP की क्षमता को 60 मिलियन लीटर तक बढ़ाने की योजना है। सात STP, जिनकी कुल क्षमता 51 मिलियन लीटर है, को दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं 17 और STP को दिसंबर 2027 तक पूरा करने की समय सीमा दी गई है। इन 17 प्लांट की कुल क्षमता 413 मिलियन लीटर होगी।
इसके अलावा नौ STP की 148 मिलियन लीटर क्षमता का काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। नौ अन्य STP के लिए दिसंबर 2029 की समय सीमा तय की गई है। इनकी कुल क्षमता 535 मिलियन लीटर होगी।
कावेरी और अर्कावती नदी पर भी असर बेंगलुरु से निकलने वाला गंदा पानी शहर के बाहर बहने वाले जल स्रोतों तक पहुंचता है। सरकार का कहना है कि इसका असर कावेरी और अर्कावती नदियों पर भी पड़ रहा है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब तमिलनाडु सरकार ने कावेरी नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला दायर किया है। मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर को होनी है। इसमें नदी में बढ़ते सीवेज, गाद और जमा हो रहे पदार्थों से पानी की गुणवत्ता खराब होने का मुद्दा उठाया गया है।
रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि कर्नाटक की ज्यादातर नदियां और जल स्रोत प्रदूषण से प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में केवल चार-पांच नदियां ही ऐसी हैं जिनमें प्रदूषण की स्थिति अपेक्षाकृत कम है। खराब STP और बिना उपचार छोड़ा गया गंदा पानी इसकी बड़ी वजह है।
वृशभवती और KC वैली का भी निरीक्षण मंत्री ने बेंगलुरु की वृशभवती और KC वैली में प्रदूषण की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वह अगले सप्ताह इन इलाकों का दौरा कर मौके की स्थिति देखेंगे।
सरकार ने शहर में चल रहे सभी STP और पानी को प्रदूषित करने वाले स्रोतों की जानकारी मांगी है। इसमें घरों के साथ-साथ व्यावसायिक और औद्योगिक इकाइयों को भी शामिल किया गया है। रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि प्रदूषण को रोकने के लिए सिर्फ नदी या जल स्रोत की सफाई काफी नहीं है। गंदगी जिस जगह से निकल रही है, वहीं उसे रोकना जरूरी है, क्योंकि बेंगलुरु का पानी आगे बहकर दूसरे इलाकों और लोगों को भी प्रभावित करता है।
पेनीय और जिगनी में भी होगी जांच मंत्री ने कहा कि वह पेनीय और जिगनी के औद्योगिक इलाकों का भी दौरा करेंगे। यहां उद्योगों से निकलने वाले ठोस और गंदे पानी की जांच की जाएगी।
KSPCB को खास तौर पर डाइंग और कपड़ा उद्योगों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इन उद्योगों से बिना साफ किया गया पानी जल स्रोतों में जाने की शिकायतों को देखते हुए जांच की जाएगी।
सरकार की ओर से BWSSB और KSPCB को तय समय में काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले दिनों में उन आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई की जा सकती है जो सीवेज और कचरे से जुड़े नियमों का पालन नहीं कर रही हैं।
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