Type 1 डायबिटीज से जूझ रहे कुछ लोगों के लिए खाने का समय बदलना ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है। University of Illinois Chicago (UIC) की एक नई छोटी स्टडी में पाया गया कि दिन में सिर्फ 8 घंटे के अंदर खाना, यानी दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक भोजन करना, कुछ ऐसे वयस्कों में ब्लड शुगर कंट्रोल बेहतर कर सकता है जिन्हें Type 1 डायबिटीज के साथ मोटापे की समस्या भी थी।
Type 1 डायबिटीज से जूझ रहे कुछ लोगों के लिए खाने का समय बदलना ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है। University of Illinois Chicago (UIC) की एक नई छोटी स्टडी में पाया गया कि दिन में सिर्फ 8 घंटे के अंदर खाना, यानी दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक भोजन करना, कुछ ऐसे वयस्कों में ब्लड शुगर कंट्रोल बेहतर कर सकता है जिन्हें Type 1 डायबिटीज के साथ मोटापे की समस्या भी थी।
इस तरीके को Time-Restricted Eating कहा जाता है। इसमें कैलोरी गिनने के बजाय खाने के लिए एक तय समय रखा जाता है। इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने 32 ऐसे लोगों को शामिल किया जिन्हें Type 1 डायबिटीज थी और वे मोटापे की श्रेणी में आते थे। सभी प्रतिभागियों को तीन समूहों में बांटा गया और करीब छह महीने तक उनका अध्ययन किया गया।
पहले समूह के लोगों को रोजाना सिर्फ दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक खाना खाने को कहा गया। उन्हें कैलोरी कम करने की जरूरत नहीं थी। दूसरे समूह ने अपनी रोजाना कैलोरी करीब 25 प्रतिशत कम की, जबकि तीसरे समूह ने अपनी सामान्य खान-पान की आदतों में कोई बदलाव नहीं किया।
छह महीने बाद 8 घंटे वाले खाने के समय का पालन करने वाले समूह में ब्लड शुगर कंट्रोल बेहतर दिखाई दिया। इस समूह में HbA1c का स्तर औसतन करीब 0.5 प्रतिशत कम हुआ। HbA1c एक ऐसा ब्लड टेस्ट है, जिससे पिछले कुछ महीनों के औसत ब्लड शुगर का पता चलता है।
स्टडी की एक अहम बात यह भी रही कि सीमित समय में खाना खाने वाले लोगों में बहुत ज्यादा या बहुत कम ब्लड शुगर का खतरा बढ़ा हुआ नहीं पाया गया। इसके अलावा Diabetic Ketoacidosis (DKA) का जोखिम भी नहीं बढ़ा। DKA एक गंभीर स्थिति है, जो शरीर में इंसुलिन की कमी होने पर हो सकती है और जानलेवा भी बन सकती है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह Type 1 डायबिटीज में Time-Restricted Eating के असर को देखने वाली पहली स्टडी है। इसके नतीजे जरूर उत्साहजनक हैं, लेकिन स्टडी में केवल 32 लोग शामिल थे। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह तरीका Type 1 डायबिटीज वाले सभी लोगों के लिए सुरक्षित या प्रभावी है।
शोध की प्रमुख वैज्ञानिक Krista Varady ने भी लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। Type 1 डायबिटीज में शरीर बहुत कम या बिल्कुल इंसुलिन नहीं बनाता, इसलिए खाने के समय में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या एंडोक्रिनोलॉजिस्ट की सलाह जरूरी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि आगे ज्यादा लोगों और अलग-अलग जगहों पर बड़ी स्टडी की जरूरत होगी।
इस रिसर्च से फिलहाल इतना संकेत मिलता है कि दिन में 8 घंटे की Eating Window कुछ लोगों में Type 1 डायबिटीज के दौरान ब्लड शुगर मैनेजमेंट का एक अतिरिक्त तरीका बन सकती है। हालांकि, इसे डॉक्टर की सलाह के बिना अपनाना सही नहीं होगा।
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