लियोनेल मेसी ने 2026 विश्व कप फाइनल में स्पेन के खिलाफ 1-0 की हार के बाद अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम से संन्यास ले लिया। 21 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने 207 मैचों में 125 गोल किए और अर्जेंटीना को दो कोपा अमेरिका खिताब, 2022 विश्व कप, फाइनलिसिमा और ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाया। अपने विदाई संदेश में मेसी ने पुराने संघर्षों और आलोचनाओं को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अर्जेंटीना की जर्सी के लिए अपना सब कुछ दिया।
लियोनेल मेसी ने अर्जेंटीना की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम से संन्यास का ऐलान कर दिया है। 2026 विश्व कप फाइनल में स्पेन के खिलाफ 1-0 की हार के बाद मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से विदाई लेने का फैसला किया। इस तरह 21 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत हुआ, जिसमें उन्होंने अर्जेंटीना को कोपा अमेरिका, फाइनलिसिमा और विश्व कप जैसी बड़ी ट्रॉफियां दिलाईं।
मेसी ने अपने विदाई संदेश में उन मुश्किल वर्षों को भी याद किया, जब अर्जेंटीना के लिए लगातार फाइनल हारने के कारण उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। उनके संदेश से यह भी संकेत मिला कि राष्ट्रीय टीम के साथ उनके शुरुआती दौर की आलोचनाएं आज भी उनके मन में कहीं न कहीं मौजूद हैं।
21 साल, 207 मैच और 125 गोल मेसी ने करीब 21 वर्षों तक अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उन्होंने अर्जेंटीना के लिए 207 मैच खेले और 125 गोल किए। पुरुष अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में गोल के मामले में वह दूसरे स्थान पर रहे। अर्जेंटीना के साथ मेसी ने दो कोपा अमेरिका खिताब, 2022 का विश्व कप, फाइनलिसिमा और ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता। राष्ट्रीय टीम के लिए उनके प्रदर्शन ने उन्हें अर्जेंटीना फुटबॉल इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। क्लब स्तर पर उनकी उपलब्धियां पहले ही असाधारण थीं। बार्सिलोना के साथ उन्होंने आठ ला लिगा खिताब और चार चैंपियंस लीग ट्रॉफियां जीतीं। व्यक्तिगत स्तर पर वह 29 साल की उम्र से पहले पांच बार बैलन डी'ओर भी जीत चुके थे।
कभी अर्जेंटीना के लिए ट्रॉफी नहीं जीत पाने का दर्द मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का शुरुआती दौर उपलब्धियों के बावजूद एक बड़ी कमी से जुड़ा रहा। अर्जेंटीना के लिए वह कई महत्वपूर्ण फाइनल तक पहुंचे, लेकिन वरिष्ठ स्तर की बड़ी ट्रॉफी उनके हाथ नहीं लगी। 2007, 2015 और 2016 में कोपा अमेरिका के निर्णायक मुकाबलों में हार के अलावा 2014 विश्व कप फाइनल में भी अर्जेंटीना को जर्मनी से हार मिली। लगातार नाकामियों ने मेसी पर व्यक्तिगत दबाव भी बढ़ाया। उस दौर में उनकी आलोचना सिर्फ मैदान पर प्रदर्शन को लेकर नहीं हुई। उन पर यह आरोप भी लगाया गया कि वह अर्जेंटीना से ज्यादा बार्सिलोना को महत्व देते हैं। उनकी शांत शैली को भी कई बार राष्ट्रीय टीम के प्रति कम जुनून के तौर पर देखा गया। यहां तक कहा गया कि उनमें डिएगो माराडोना जैसी ऊर्जा और अपने साथियों को प्रेरित करने की क्षमता नहीं है। उनके राष्ट्रीय गान को लेकर भी सवाल उठाए गए। बाद की उपलब्धियों को देखते हुए ये आलोचनाएं काफी अलग नजर आती हैं, लेकिन मेसी के विदाई संदेश से संकेत मिलता है कि उस दौर का असर उनके मन पर लंबे समय तक रहा।
2016 में पहली बार लिया था संन्यास 2016 कोपा अमेरिका सेंतेनारियो के फाइनल में चिली से हार मेसी के करियर का सबसे भावुक दौर लेकर आई। यह लगातार तीसरा साल था जब अर्जेंटीना किसी बड़े फाइनल में हार गया था। 24 जून 2016 को मेसी ने पहली बार अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम से संन्यास की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि वह राष्ट्रीय टीम के लिए सब कुछ करने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन चार फाइनल हारने के बाद उन्हें लगा कि शायद राष्ट्रीय टीम उनके लिए नहीं है। हालांकि, यह संन्यास ज्यादा समय तक नहीं चला। करीब दो महीने बाद उन्होंने अपना फैसला बदल लिया और अर्जेंटीना की टीम में वापसी की। इसके बाद मेसी और अर्जेंटीना की कहानी पूरी तरह बदल गई।
2021 में खत्म हुआ 28 साल का इंतजार 2016 के बाद अर्जेंटीना के साथ मेसी ने लगातार संघर्ष जारी रखा और आखिरकार 2021 में वह ट्रॉफी जीतने में सफल रहे, जिसका इंतजार लंबे समय से था। कोपा अमेरिका के फाइनल में अर्जेंटीना ने ब्राजील को 1-0 से हराया। रियो डी जेनेरियो के ऐतिहासिक माराकाना स्टेडियम में मिली इस जीत ने अर्जेंटीना के 28 साल लंबे सीनियर पुरुष खिताब के सूखे को खत्म कर दिया। मेसी के लिए यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि कुछ साल पहले इसी तरह की लगातार फाइनल हार ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से दूर जाने पर मजबूर कर दिया था।
2022 में मेसी ने पूरा किया विश्व कप का सपना 2022 विश्व कप मेसी के अर्जेंटीना करियर का सबसे बड़ा अध्याय बना। कतर में अर्जेंटीना ने फाइनल में फ्रांस को हराकर विश्व कप जीता और मेसी ने आखिरकार अपने करियर की सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी हासिल कर ली। फाइनल में मेसी ने नियमित समय में दो गोल किए और पेनल्टी शूटआउट में अर्जेंटीना की ओर से पहला पेनल्टी भी सफलतापूर्वक लिया। शूटआउट में गोंजालो मोंटिएल की निर्णायक पेनल्टी के बाद अर्जेंटीना विश्व चैंपियन बना। इस जीत के साथ मेसी ने उस सवाल का भी जवाब दे दिया जो उनके करियर के शुरुआती वर्षों में बार-बार उठाया जाता था—क्या वह अर्जेंटीना को किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी तक पहुंचा सकते हैं?
मेक्सिको के खिलाफ वह गोल, जिसने बदल दिया था सफर 2022 विश्व कप में मेक्सिको के खिलाफ मुकाबला अर्जेंटीना के लिए बेहद अहम था। टीम पर टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा था और पहले हाफ में मुकाबला गोलरहित रहा। 64वें मिनट में मेसी ने बाएं पैर से शानदार शॉट लगाकर स्कोर खोला। इसके बाद अर्जेंटीना ने 2-0 से मुकाबला जीता और टूर्नामेंट में अपनी स्थिति मजबूत की। आखिरकार यही अभियान अर्जेंटीना को विश्व कप ट्रॉफी तक ले गया।
2014 में विश्व कप फाइनल की हार मेसी इससे पहले 2014 में भी विश्व कप फाइनल खेल चुके थे। ब्राजील में हुए टूर्नामेंट के फाइनल में अर्जेंटीना का सामना जर्मनी से हुआ। मुकाबला निर्धारित समय में गोलरहित रहा, लेकिन अतिरिक्त समय में मारियो गोट्जे ने गोल करके जर्मनी को जीत दिलाई। अर्जेंटीना भले ही विश्व कप नहीं जीत सका, लेकिन मेसी को पूरे टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन के लिए गोल्डन बॉल मिली। उन्होंने सात मैचों में चार गोल और एक असिस्ट दर्ज किया। आठ साल बाद 2022 में उन्होंने वही ट्रॉफी जीत ली, जो 2014 में उनसे दूर रह गई थी।
2026 विश्व कप में भी बनाए कई रिकॉर्ड 39 साल की उम्र में 2026 विश्व कप में उतरने वाले मेसी के प्रदर्शन को लेकर सवाल थे। लेकिन टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने फिर साबित किया कि उम्र उनके प्रभाव को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकी है। ऑस्ट्रिया के खिलाफ ग्रुप मैच में दो गोल करने के बाद वह विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले पुरुष खिलाड़ी बने और उनके विश्व कप गोल की संख्या 18 तक पहुंची। मेसी टूर्नामेंट में 16 गोल के साथ पहुंचे थे। इससे पहले अल्जीरिया के खिलाफ शुरुआती मुकाबले में उन्होंने हैट्रिक लगाई थी। ऑस्ट्रिया के खिलाफ मैच में उन्होंने एक पेनल्टी मिस भी की, लेकिन बाद में दो गोल करके इसकी भरपाई कर दी। हालांकि टूर्नामेंट खत्म होने तक फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे ने मेसी को पीछे छोड़ते हुए विश्व कप में 22 गोल का आंकड़ा हासिल कर लिया।
इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में दो असिस्ट 2026 विश्व कप में अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच सेमीफाइनल भी मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर के यादगार मुकाबलों में शामिल हो गया। अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। मेसी ने इस मुकाबले में दो असिस्ट किए और टीम की वापसी में अहम भूमिका निभाई। यह जीत अर्जेंटीना के प्रशंसकों के लिए विशेष महत्व रखती थी, क्योंकि इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता से जुड़ा रहा है। इस जीत के साथ मेसी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंग्लैंड के खिलाफ अर्जेंटीना की एक और यादगार सफलता में योगदान दिया। यह मुकाबला 1986 विश्व कप के उस ऐतिहासिक मैच की 40वीं वर्षगांठ के आसपास भी आया, जिसमें माराडोना ने इंग्लैंड के खिलाफ 'हैंड ऑफ गॉड' और 'गोल ऑफ द सेंचुरी' जैसे ऐतिहासिक क्षण दिए थे।
स्पेन से हार के साथ खत्म हुआ अंतरराष्ट्रीय सफर मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मुकाबला 2026 विश्व कप का फाइनल रहा। अर्जेंटीना का सामना स्पेन से हुआ, जहां स्पेन ने 1-0 से जीत दर्ज की। मेसी ने 120 मिनट से अधिक चले मुकाबले में शारीरिक और भावनात्मक थकान के बावजूद खेलना जारी रखा। अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतने के लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका। फाइनल की हार ने मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी अध्याय भी लिख दिया।
विदाई संदेश में फिर लौटी पुरानी यादें संन्यास की घोषणा करते हुए मेसी ने हाथ से लिखे नोट्स के साथ सोशल मीडिया पर संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि यह फैसला उनकी आत्मा को गहराई से दुख देता है, लेकिन उन्हें लगता है कि अब समय आ गया है। अपने संदेश में उन्होंने इस बात पर खास जोर दिया कि उन्होंने अर्जेंटीना के लिए हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ उन वर्षों की बात नहीं है जब टीम ने ट्रॉफियां जीतीं, बल्कि मुश्किल समय में भी उन्होंने राष्ट्रीय टीम की जर्सी के लिए पूरी मेहनत की। मेसी ने अर्जेंटीना की टीम के साथ अपने रिश्ते को लेकर भी स्पष्ट भावनाएं जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनना हमेशा पसंद करते रहे हैं और आगे भी उससे प्यार करते रहेंगे। उन्होंने अपने साथियों के साथ अर्जेंटीना को ऐसे पल देने पर गर्व जताया, जिनका सपना देखा जा सकता था।
2016 का दर्द शायद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ मेसी के विदाई संदेश की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने अर्जेंटीना के लिए कभी प्रयास में कमी नहीं छोड़ी। यह उस दौर की याद दिलाता है जब लगातार फाइनल हारने के बाद उन पर राष्ट्रीय टीम के लिए पर्याप्त जुनून नहीं दिखाने के आरोप लगाए गए थे। 2016 में पहली बार संन्यास लेने के बाद वापसी करने वाले मेसी ने अगले वर्षों में अर्जेंटीना को दो कोपा अमेरिका खिताब और विश्व कप जिताया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय टीम के लिए 91 मैचों में 70 गोल भी किए। इन उपलब्धियों के बावजूद उनके विदाई संदेश में पुरानी आलोचनाओं का जिक्र यह बताता है कि वे अनुभव उनके लिए कितने व्यक्तिगत थे।
अर्जेंटीना के लिए मेसी की विरासत मेसी ने अर्जेंटीना के लिए सिर्फ गोल और ट्रॉफियां ही नहीं जीतीं, बल्कि एक लंबे दौर में राष्ट्रीय टीम के सबसे प्रमुख चेहरे की भूमिका निभाई। 2005 में उनका अंतरराष्ट्रीय पदार्पण बेहद खराब तरीके से हुआ था। हंगरी के खिलाफ मैच में 18 वर्षीय मेसी दूसरे हाफ में मैदान पर उतरे और कुछ ही सेकंड बाद सीधे लाल कार्ड के कारण बाहर भेज दिए गए। लेकिन उस निराशाजनक शुरुआत के बाद उन्होंने अगले दो दशकों में ऐसा करियर बनाया, जिसने अर्जेंटीना के फुटबॉल इतिहास को बदल दिया। 2006 विश्व कप में उन्होंने पहली बार विश्व कप में कदम रखा। सर्बिया और मोंटेनेग्रो के खिलाफ 6-0 की जीत में वह दूसरे हाफ में मैदान पर उतरे और कुछ ही मिनटों में अपना पहला विश्व कप गोल किया। उन्होंने उस मैच में एक असिस्ट भी किया। 2010 में वह अर्जेंटीना की उस टीम का हिस्सा रहे जिसके कोच डिएगो माराडोना थे। हालांकि टीम जर्मनी के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में हार गई, लेकिन माराडोना और मेसी का एक ही विश्व कप अभियान में साथ होना अर्जेंटीना फुटबॉल के लिए यादगार रहा। इसके बाद 2014 की फाइनल हार, 2016 का संन्यास, 2021 की कोपा अमेरिका जीत और 2022 का विश्व कप खिताब उनके अंतरराष्ट्रीय सफर के प्रमुख पड़ाव बने।
शब्दों से ज्यादा फुटबॉल ने कही कहानी मेसी मैदान पर अपने खेल के लिए जितने प्रसिद्ध रहे, उतने शब्दों के लिए नहीं। इसलिए उनकी विदाई में हाथ से लिखे नोट और अर्जेंटीना के लिए दिए गए उनके भावुक संदेश का महत्व और बढ़ जाता है। उनके करियर में क्लब स्तर की सफलता बहुत पहले आ चुकी थी, लेकिन अर्जेंटीना के साथ बड़ी ट्रॉफी जीतने के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा। इसी वजह से राष्ट्रीय टीम के साथ उनकी यात्रा सिर्फ रिकॉर्ड और खिताबों की कहानी नहीं रही, बल्कि आलोचना, निराशा, वापसी और आखिरकार ऐतिहासिक सफलता की कहानी भी बनी। अब 2026 विश्व कप फाइनल के बाद यह अध्याय बंद हो गया है। मेसी अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम को अलविदा कह चुके हैं, लेकिन उनके द्वारा छोड़ी गई विरासत में 207 मैच, 125 गोल, विश्व कप और दो कोपा अमेरिका खिताब सहित कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज हैं। उनका विदाई संदेश यह भी दिखाता है कि दुनिया के सबसे महान फुटबॉल खिलाड़ियों में गिने जाने वाले मेसी के लिए अर्जेंटीना की जर्सी सिर्फ एक टीम की जर्सी नहीं थी। उससे जुड़ी उपलब्धियां जितनी बड़ी थीं, उससे जुड़ी शुरुआती चोट और आलोचनाएं भी उनके लिए उतनी ही निजी रहीं।
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