इमरान ख़ान की जेल में सेहत को लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत की चिंता बढ़ गई है। 21 पूर्व क्रिकेट कप्तानों ने पाकिस्तान सरकार से उन्हें उचित और स्वतंत्र चिकित्सा सुविधा देने की अपील की है। पैट कमिंस के समर्थन, बेटों के स्काई स्पोर्ट्स इंटरव्यू और जावेद मियांदाद की भावुक अपील ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। हालांकि पाकिस्तान सरकार इमरान के साथ दुर्व्यवहार या इलाज में लापरवाही के आरोपों से इनकार करती है। फिलहाल सबसे बड़ी मांग उनकी स्वतंत्र मेडिकल जांच और बेहतर चिकित्सा सुविधा को लेकर है।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और 1992 विश्व कप विजेता कप्तान इमरान ख़ान की जेल में सेहत को लेकर चिंता अब पाकिस्तान की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रही। 21 पूर्व अंतरराष्ट्रीय कप्तानों की अपील, ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस का समर्थन, उनके बेटों क़ासिम और सुलेमान का स्काई स्पोर्ट्स पर इंटरव्यू और पूर्व पाकिस्तानी बल्लेबाज़ जावेद मियांदाद की भावुक अपील ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत के केंद्र में ला दिया है।
इमरान ख़ान अगस्त 2023 से जेल में हैं और भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद उनकी सज़ा जारी है। ख़ान और उनके समर्थक इन मामलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं। हाल के दिनों में विवाद का केंद्र उनकी कानूनी स्थिति से ज्यादा उनकी स्वास्थ्य स्थिति और जेल में उन्हें मिल रही चिकित्सा सुविधा बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी क्यों बढ़ा विवाद? अगस्त में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इमरान ख़ान की चिकित्सकीय जांच के लिए उन्हें इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाने और उनकी जांच ऐसे मेडिकल बोर्ड से कराने का निर्देश दिया था, जिसमें उनके निजी डॉक्टरों और उनकी बहन डॉ.
उज़मा ख़ान की भी भूमिका हो। लेकिन बाद में उन्हें सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया, जहां जांच के बाद उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट बताया गया और फिर वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। यही प्रक्रिया विवाद का बड़ा कारण बनी। इमरान ख़ान के परिवार और समर्थकों ने सवाल उठाया कि क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन हुआ। दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार ने जेल में उनके साथ दुर्व्यवहार या चिकित्सा सुविधा से वंचित किए जाने के आरोपों को खारिज किया है। सरकार के मुताबिक, अगस्त 2023 से अब तक परिवार के सदस्यों, वकीलों और डॉक्टरों की ओर से 900 से ज्यादा मुलाकातें हुई हैं।
21 पूर्व कप्तानों ने फिर लिखा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को पत्र इस विवाद के बीच क्रिकेट जगत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तेज हुई। 21 पूर्व अंतरराष्ट्रीय कप्तानों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को पत्र लिखकर इमरान ख़ान के लिए उचित चिकित्सा सुविधा और मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने की अपील की। इनमें भारत के सुनील गावस्कर, कपिल देव और दिलीप वेंगसरकर के अलावा ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज़, श्रीलंका और अन्य क्रिकेट देशों के पूर्व कप्तान शामिल हैं। यह पहली बार नहीं था जब पूर्व क्रिकेट कप्तानों ने इमरान के मामले में आवाज़ उठाई। इससे पहले फरवरी में 14 पूर्व कप्तानों ने पाकिस्तान सरकार को पत्र भेजा था। अगस्त की अपील उस पहले पत्र का अगला कदम थी, क्योंकि क्रिकेट दिग्गजों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी इमरान की चिकित्सा जांच को लेकर सवाल बने हुए थे। पत्र लिखने वाले क्रिकेटरों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे पाकिस्तान की घरेलू कानूनी प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते। उनका जोर इस बात पर था कि अदालत के आदेश के मुताबिक किसी कैदी को उचित और स्वतंत्र चिकित्सा जांच मिलना बुनियादी मानवीय जरूरत है।
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पैट कमिंस और दूसरे दिग्गज भी बोले मामले को तब और अंतरराष्ट्रीय ध्यान मिला जब ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा टेस्ट कप्तान पैट कमिंस ने भी इमरान ख़ान के साथ गरिमा और उचित व्यवहार की मांग का समर्थन किया। यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि अब आवाज़ केवल पूर्व खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नेतृत्व से भी समर्थन सामने आया है। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल एथर्टन भी उन पूर्व कप्तानों में शामिल हैं जिन्होंने पाकिस्तान सरकार को पत्र लिखा था। कुछ ही दिनों बाद उन्होंने लॉर्ड्स में इमरान के बेटों का इंटरव्यू भी किया। इसने पूरे मामले को क्रिकेट प्रसारण और अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंचा दिया।
लॉर्ड्स टेस्ट में इमरान के बेटों का इंटरव्यू बना बड़ा विवाद इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट के दौरान स्काई स्पोर्ट्स ने इमरान ख़ान के बेटों सुलेमान और क़ासिम ख़ान का माइकल एथर्टन के साथ इंटरव्यू प्रसारित किया। दोनों ने अपने पिता की सेहत, जेल की परिस्थितियों और परिवार की उनसे मुलाकात को लेकर गंभीर चिंताएं जाहिर कीं। सुलेमान ने दावा किया कि उनके पिता की एक आंख की दृष्टि में लगभग 80 प्रतिशत तक कमी आई है और उनकी आंखों तथा ब्लड प्रेशर को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। क़ासिम ने आरोप लगाया कि उनके पिता को लंबे समय तक लगभग 23 घंटे या उससे अधिक समय तक अलग रखा जा रहा है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। क़ासिम ने यह भी आरोप लगाया कि परिवार के लिए जेल में उनसे मिलना बेहद मुश्किल रहा है। उनके मुताबिक, परिवार को कई महीनों तक मुलाकात का अवसर नहीं मिला। दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार ने परिवार और वकीलों की मुलाकातों को लेकर अलग तस्वीर पेश की है और कहा है कि इमरान से बड़ी संख्या में लोगों ने मुलाकात की है।
PCB ने स्काई स्पोर्ट्स से की शिकायत इंटरव्यू के प्रसारण से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) नाराज़ हो गया। बोर्ड ने स्काई स्पोर्ट्स के सामने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। रिपोर्टों के मुताबिक, PCB ने प्रसारण से पहले भी चैनल से संपर्क किया था और कथित तौर पर यह चेतावनी दी थी कि अगर इंटरव्यू प्रसारित हुआ तो पाकिस्तान की टीम लंच के बाद मैदान पर वापस नहीं लौट सकती है। हालांकि इंटरव्यू प्रसारित हुआ और पाकिस्तान की टीम लंच के बाद मैदान पर उतरी। इस मामले में इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) की भूमिका से विवाद को शांत करने में मदद मिलने की भी रिपोर्टें सामने आईं। पाकिस्तान की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि खिलाड़ियों को इस कथित विरोध की जानकारी नहीं थी। पाकिस्तान के मुख्य कोच सरफराज़ अहमद ने कहा कि वह और खिलाड़ी टीम को मैदान से हटाने की किसी योजना से अवगत नहीं थे।
जावेद मियांदाद की आंखों से निकले आंसू इस पूरे घटनाक्रम में सबसे भावुक प्रतिक्रिया पाकिस्तान के पूर्व महान बल्लेबाज़ जावेद मियांदाद की रही। इमरान ख़ान के लंबे समय के साथी और 1992 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य मियांदाद एक इंटरव्यू के दौरान रो पड़े और अपने पूर्व कप्तान की रिहाई की अपील की। मियांदाद ने इमरान को ईमानदार बताते हुए सवाल किया कि अगर उन्हें रिहा कर दिया जाए तो इससे क्या नुकसान होगा। उनकी प्रतिक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पाकिस्तान के भीतर इमरान के मामले पर क्रिकेट जगत के कई बड़े नाम सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से बचते रहे हैं। पूर्व विकेटकीपर मोइन ख़ान ने भी इमरान की सेहत और उनके अधिकारों को लेकर चिंता जताई है। इस तरह पाकिस्तान के अंदर से भी क्रिकेट से जुड़े पूर्व खिलाड़ियों की आवाज़ अब ज्यादा स्पष्ट होती दिखाई दे रही है।
क्या यह सचमुच पाकिस्तान पर 'अंतरराष्ट्रीय दबाव' है? इसे अभी किसी औपचारिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध या सरकारों के स्तर पर दबाव के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि इमरान ख़ान का मामला अब एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक बहस में बदल गया है। पहले जहां मामला पाकिस्तान की राजनीति, अदालतों और जेल प्रशासन से जुड़ा था, वहीं अब इसमें भारत के पूर्व कप्तानों, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के क्रिकेट दिग्गजों, मौजूदा ऑस्ट्रेलियाई कप्तान और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रसारण संस्थानों की भूमिका सामने आ चुकी है। सबसे अहम बदलाव यह है कि बहस का केंद्र फिलहाल इमरान ख़ान की राजनीतिक विचारधारा या उनके खिलाफ मामलों की वैधता नहीं, बल्कि जेल में उनकी चिकित्सा, स्वतंत्र मेडिकल जांच और परिवार से संपर्क बन गया है। यही वह मुद्दा है जिस पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समुदाय पाकिस्तान सरकार से लगातार जवाब मांग रहा है।
पाकिस्तान सरकार के सामने क्या स्थिति है? पाकिस्तान सरकार का रुख इन आरोपों से अलग है। सरकार ने कहा है कि इमरान को जेल में आवश्यक चिकित्सा सुविधा मिल रही है और उनके परिवार, वकीलों तथा डॉक्टरों को उनसे मिलने के पर्याप्त अवसर मिले हैं। इसलिए इस समय दो अलग-अलग दावे सामने हैं—इमरान के परिवार और समर्थक बेहतर तथा स्वतंत्र चिकित्सा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार किसी तरह की जानबूझकर लापरवाही या दुर्व्यवहार से इनकार कर रही है। इसी विरोधाभास के कारण स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच की मांग इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। यदि ऐसी जांच पारदर्शी तरीके से होती है, तो इमरान की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चल रही अटकलों और राजनीतिक आरोपों के बीच अधिक स्पष्टता आ सकती है। फिलहाल इतना जरूर है कि इमरान ख़ान की जेल और स्वास्थ्य से जुड़ा विवाद पाकिस्तान की घरेलू राजनीति की सीमा पार कर चुका है। 21 पूर्व कप्तानों की अपील से लेकर पैट कमिंस के समर्थन, लॉर्ड्स में बेटों के इंटरव्यू और जावेद मियांदाद की भावुक अपील तक घटनाक्रम लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत का ध्यान खींच रहा है।
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