नस में चोट लगने के बाद कई बार दर्द जल्दी खत्म नहीं होता। कुछ मामलों में हल्का स्पर्श, दबाव या गर्मी भी तेज दर्द महसूस करा सकती है। अब वैज्ञानिकों ने इस लंबे समय तक रहने वाले न्यूरोपैथिक पेन के पीछे काम करने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया का पता लगाया है, जिसमें BRAF प्रोटीन की भूमिका सामने आई है।
नस में चोट लगने के बाद कई बार दर्द जल्दी खत्म नहीं होता। कुछ मामलों में हल्का स्पर्श, दबाव या गर्मी भी तेज दर्द महसूस करा सकती है। अब वैज्ञानिकों ने इस लंबे समय तक रहने वाले न्यूरोपैथिक पेन के पीछे काम करने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया का पता लगाया है, जिसमें BRAF प्रोटीन की भूमिका सामने आई है।
दर्द को बढ़ाने में BRAF का क्या काम? शोधकर्ताओं के मुताबिक, नस में चोट लगने के बाद BRAF नसों के रास्ते रीढ़ की हड्डी के उस हिस्से तक पहुंच सकता है, जहां दर्द के संकेतों की प्रक्रिया होती है। यहां BRAF ऐसे संकेतों को सक्रिय करता है, जिससे NMDA receptors ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। इसका सीधा असर दर्द के संकेतों पर पड़ता है और वे ज्यादा मजबूत हो जाते हैं।
यानी आसान भाषा में: नस की चोट → BRAF सक्रिय → NMDA receptors सक्रिय → दर्द के संकेत बढ़े।
कैंसर की दवाओं से कम हुई दर्द की संवेदनशीलता इस खोज को परखने के लिए शोधकर्ताओं ने BRAF से जुड़ी प्रक्रिया को रोकने वाली दो दवाओं का परीक्षण किया—Vemurafenib और Selumetinib।
पशु मॉडलों में इन दवाओं से नस की चोट के बाद होने वाली छूने, दबाव और गर्मी के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता कम हुई। खास बात यह रही कि बिना नस की चोट वाले मॉडलों में सामान्य दर्द प्रतिक्रिया पर इन दवाओं का असर नहीं पड़ा।
BRAF को हटाने पर भी मिला असर शोधकर्ताओं ने Braf जीन से जुड़े प्रयोग भी किए। जब Braf जीन को हटा दिया गया, तो लंबे समय तक बनी रहने वाली दर्द-संवेदनशीलता कम हो गई।
वहीं, BRAF को सीधे सक्रिय करने पर बिना नस की चोट के भी दर्द के प्रति संवेदनशीलता बढ़ गई। इससे BRAF की भूमिका को लेकर मिले संकेत और मजबूत हुए।
क्या अब इंसानों के लिए मिलेगा नया इलाज? अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। यह शोध फिलहाल प्रीक्लिनिकल स्तर पर है और इसके प्रमुख परिणाम प्रयोगशाला तथा पशु मॉडलों में मिले हैं। इसलिए कैंसर में इस्तेमाल होने वाली इन दवाओं को नसों के दर्द के इलाज के लिए खुद से लेना सही नहीं है। इंसानों में इनके इस्तेमाल से पहले उनकी सही मात्रा, असर और संभावित दुष्प्रभावों की जांच जरूरी होगी।
फिलहाल इस शोध की अहमियत इतनी है कि वैज्ञानिकों को न्यूरोपैथिक पेन की एक नई कड़ी समझ में आई है। अगर आगे के अध्ययनों में BRAF की भूमिका और दवाओं की सुरक्षा साबित होती है, तो भविष्य में BRAF को निशाना बनाने वाला इलाज लंबे समय से परेशान कर रहे नसों के दर्द के लिए नया विकल्प बन सकता है।
न्यूरोपैथिक पेन, नसों का दर्द, नस की चोट, BRAF प्रोटीन, BRAF जीन, NMDA receptors, दर्द की संवेदनशीलता, पुराने दर्द का इलाज, न्यूरोपैथिक दर्द का इलाज
neuropathic pain, naso ka dard, nas ki chot, BRAF protein, BRAF gene, dard ki sensitivity, purane dard ka ilaj, nerve pain treatment
नस की चोट के बाद दर्द, न्यूरोपैथिक पेन का नया इलाज, BRAF प्रोटीन और नसों का दर्द, नसों के पुराने दर्द का इलाज, BRAF और neuropathic pain, new treatment for neuropathic pain
Neuropathic Pain, BRAF, Nerve Pain, NMDA Receptors, Health News, Medical Research, Pain Treatment, NetGramNews, NetGram News
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI. इस लेख में इस्तेमाल की गई तस्वीरें सिर्फ समझाने के लिए हैं। कुछ तस्वीरों को AI की मदद से एडिट किया गया है।
Published by: Zoya. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.