देश के कई सरकारी स्कूलों में टूटी इमारत, गंदे टॉयलेट और शिक्षकों की कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर CJP ने SchoolThikKaro अभियान शुरू किया है। अभियान के जरिए स्कूलों की समस्याओं को सामने लाकर बच्चों के लिए बेहतर सुविधाओं और पढ़ाई का माहौल देने की मांग की जा रही है।
देश के कई सरकारी स्कूलों में खराब इमारत, गंदे टॉयलेट, पीने के पानी की कमी और शिक्षकों की कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP ने SchoolThikKaro अभियान शुरू किया है। इस अभियान के जरिए सरकारी स्कूलों की हालत दिखाकर सरकार से जरूरी सुविधाएं देने की मांग की जा रही है।
दिल्ली के पास हरियाणा के फरीदाबाद जिले के खेड़ी कलां गांव का सरकारी बालिका प्राथमिक विद्यालय इसका एक उदाहरण है। बाहर से स्कूल की इमारत ठीक दिखाई देती है, लेकिन अंदर कई कमरों की हालत खराब है। छत से प्लास्टर गिर रहा है और नौ में से चार कमरे इतने खराब हैं कि उनका इस्तेमाल बंद कर दिया गया है।
बारिश में कक्षाओं में भर जाता है पानी स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सतपाल नरवत के मुताबिक बारिश के समय स्कूल के कमरों में पानी भर जाता है। इससे बच्चों के बैठने की जगह तक कम पड़ जाती है। स्कूल के आठ में से चार टॉयलेट भी कचरे से भरे हुए बताए गए हैं।
खेड़ी कलां के इस स्कूल में करीब पांच साल पहले एक इमारत को असुरक्षित बताकर गिरा दिया गया था। उस समय नई इमारत बनाने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक नया भवन नहीं बन पाया है। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई दो कमरों और एक बरामदे में चल रही है।
देश के सरकारी स्कूलों पर भी सवाल सरकारी स्कूलों की खराब हालत सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 2014-15 से 2024-25 के बीच देश में करीब 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए। इनमें कुछ स्कूलों को दूसरे स्कूलों के साथ मिला दिया गया था।
सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होना और निजी स्कूलों की ओर बढ़ता रुझान भी इसकी एक वजह बताई गई है। भारत में शिक्षा पर GDP का करीब 4.1 फीसदी खर्च होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा पर GDP का 6 फीसदी खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
CJP ने शुरू किया SchoolThikKaro अभियान सरकारी स्कूलों की हालत को लेकर CJP ने SchoolThikKaro यानी FixTheSchool अभियान शुरू किया है। यह ऑनलाइन चलाया जा रहा एक अभियान है, जिसमें स्कूलों की समस्याओं को सामने लाया जा रहा है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के मुताबिक गांवों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को शहरों के बच्चों जैसी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। अभियान से जुड़े लोगों ने कई गांवों के स्कूलों का दौरा किया और वहां की समस्याओं के वीडियो सोशल मीडिया पर डाले। CJP की मांग है कि बच्चों को अच्छी बेंच, साफ टॉयलेट, पीने का साफ पानी और पढ़ाई के लिए डिजिटल सुविधाएं मिलनी चाहिए।
छात्र भी सोशल मीडिया पर उठा रहे आवाज इस अभियान के दौरान कई छात्र अपने स्कूलों की समस्याओं के वीडियो सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं। महाराष्ट्र के रायगढ़ में छात्राओं ने स्कूल तक जाने वाली खराब सड़क का वीडियो बनाया था। वीडियो सामने आने के बाद वहां सड़क की मरम्मत कराई गई।
उत्तर प्रदेश से भी ऐसे वीडियो सामने आए, जिनमें छात्रों ने स्कूल तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़क की मांग की। इससे पता चलता है कि सोशल मीडिया के जरिए छात्र और स्थानीय लोग अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं।
शिक्षकों की कमी भी बड़ी परेशानी सरकारी स्कूलों की समस्या सिर्फ टूटी इमारत या गंदे टॉयलेट तक सीमित नहीं है। शिक्षकों की कमी भी बड़ी परेशानी है। फरीदाबाद के अतमादपुर गांव के एक सरकारी स्कूल में 910 बच्चों के लिए 40 शिक्षक हैं। स्कूल के एक दौरे के दौरान 30 शिक्षक मतदाता सूची के काम में लगाए गए थे, जबकि चार शिक्षक बीमारी के कारण स्कूल में नहीं थे। उस दिन सिर्फ छह शिक्षक बच्चों को संभाल रहे थे। स्कूल के प्रधानाध्यापक चतर सिंह के मुताबिक शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा चुनाव ड्यूटी, जनगणना और दूसरे सरकारी काम भी करने पड़ते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता है।
निजी स्कूलों की ओर बढ़ रहा रुझान सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी का असर बच्चों के स्कूल चुनने पर भी पड़ रहा है। सतपाल नरवत ने बताया कि उन्होंने खुद सरकारी स्कूल में पढ़ाई की थी, लेकिन बाद में अपने बच्चों को निजी स्कूल में भेजा।
उनका कहना है कि निजी स्कूलों की फीस ज्यादा है, लेकिन वहां लाइब्रेरी, प्रयोगशाला और दूसरी सुविधाएं मिलती हैं। गांवों में निजी स्कूलों की बढ़ती संख्या भी इसी बदलाव की ओर इशारा करती है।
अभियान से लोगों को उम्मीद सतपाल नरवत ने स्कूलों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री, सांसदों और अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने की कोशिश की है। उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी पत्र लिखा। उनके मुताबिक अब तक ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है।
SchoolThikKaro अभियान के जरिए सरकारी स्कूलों की टूटी इमारत, गंदे टॉयलेट, शिक्षकों की कमी और दूसरी समस्याओं को सामने लाया जा रहा है। इन समस्याओं का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। अभियान के जरिए अब स्कूलों में बेहतर सुविधाओं और पढ़ाई का माहौल देने की मांग तेज हुई है।
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