चांद की सतह को इंसानों के लिए बेहद कठिन माना जाता है, लेकिन धरती के कुछ सूक्ष्मजीव इन परिस्थितियों में पूरी तरह खत्म हों, यह जरूरी नहीं है। एक नई स्टडी में संकेत मिला है कि कुछ बैक्टीरिया और फंगस चांद के कुछ सुरक्षित हिस्सों में निष्क्रिय अवस्था में लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। शोधकर्ताओं ने 3 बैक्टीरिया और 2 फंगस के पहले से मौजूद सर्वाइवल डेटा का अध्ययन किया। इसके बाद इस जानकारी की तुलना चांद की सतह पर मौजूद परिस्थितियों से की गई। इसमें खास तौर पर पराबैंगनी किरणों और तापमान जैसी स्थितियों को ध्यान में रखा गया।
चांद की सतह को इंसानों के लिए बेहद कठिन माना जाता है, लेकिन धरती के कुछ सूक्ष्मजीव इन परिस्थितियों में पूरी तरह खत्म हों, यह जरूरी नहीं है। एक नई स्टडी में संकेत मिला है कि कुछ बैक्टीरिया और फंगस चांद के कुछ सुरक्षित हिस्सों में निष्क्रिय अवस्था में लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। शोधकर्ताओं ने 3 बैक्टीरिया और 2 फंगस के पहले से मौजूद सर्वाइवल डेटा का अध्ययन किया। इसके बाद इस जानकारी की तुलना चांद की सतह पर मौजूद परिस्थितियों से की गई। इसमें खास तौर पर पराबैंगनी किरणों और तापमान जैसी स्थितियों को ध्यान में रखा गया। चांद पर कैसे जिंदा रह सकते हैं सूक्ष्मजीव?
चांद पर धरती जैसी हवा, पानी और सामान्य वातावरण नहीं है। वहां की सतह पर सूक्ष्मजीवों के लिए परिस्थितियां काफी कठिन हैं। इसके बावजूद कुछ सूक्ष्मजीव बेहद खराब परिस्थितियों में अपने शरीर की गतिविधियों को लगभग रोक सकते हैं। इसे क्रिप्टोबायोसिस कहा जाता है। इस अवस्था में सूक्ष्मजीव सक्रिय रूप से बढ़ते या प्रजनन नहीं करते। वे लगभग निष्क्रिय स्थिति में चले जाते हैं और बेहतर परिस्थितियों का इंतजार कर सकते हैं। स्टडी में पाया गया कि चांद के कुछ क्षेत्रों में ऐसे स्थान हो सकते हैं जहां इन सूक्ष्मजीवों को बाहरी परिस्थितियों से कुछ सुरक्षा मिल सकती है। खास तौर पर चांद के ध्रुवीय इलाकों को इस नजर से महत्वपूर्ण माना गया है। छोटा-सा निशान भी बन सकता है सुरक्षित जगह इस शोध की सबसे दिलचस्प बात यह है कि सूक्ष्मजीवों को सुरक्षित रहने के लिए किसी बड़े आश्रय की जरूरत जरूरी नहीं हो सकती। शोधकर्ताओं के अनुसार, अंतरिक्ष यात्री के जूते का निशान या रोवर के पहिए का निशान भी एक छोटा सुरक्षित स्थान बना सकता है। ऐसे निशानों में आसपास की सतह की तुलना में कुछ अलग परिस्थितियां बन सकती हैं। इससे वहां मौजूद सूक्ष्मजीवों को चांद की कठोर परिस्थितियों से कुछ हद तक बचाव मिल सकता है। इसका मतलब यह है कि भविष्य के चंद्र अभियानों के दौरान धरती से ले जाए गए सूक्ष्मजीव अनजाने में चांद की सतह पर पहुंच सकते हैं और कुछ सुरक्षित स्थानों में टिके रह सकते हैं। भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए क्यों जरूरी है यह बात?
चांद के दक्षिणी ध्रुव को भविष्य के कई मिशनों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है। ऐसे में वहां वैज्ञानिक उपकरण, रोवर और इंसानों से जुड़े मिशन पहुंचेंगे। इन मिशनों के साथ धरती के सूक्ष्मजीव भी अनजाने में चांद तक पहुंच सकते हैं। इसलिए चंद्र मिशनों में केवल उपकरणों और इंसानों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि धरती के सूक्ष्मजीवों से होने वाले अनजाने संक्रमण को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा। वैज्ञानिकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि धरती के कौन से सूक्ष्मजीव चांद जैसी परिस्थितियों में कितने समय तक टिक सकते हैं। क्या चांद पर जीवन मिल गया है?
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इस स्टडी को चांद पर जीवन मिलने का सबूत नहीं माना जा सकता। शोधकर्ताओं ने चांद पर किसी जीवित सूक्ष्मजीव को खोजा नहीं है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि धरती के कुछ मजबूत सूक्ष्मजीव चांद की सतह पर मौजूद कठिन परिस्थितियों में किस तरह जीवित रह सकते हैं। इसलिए फिलहाल यह कहना सही होगा कि चांद पर एलियन जीवन या किसी दूसरी दुनिया की जिंदगी मिलने का कोई सबूत नहीं है। यह शोध केवल धरती के सूक्ष्मजीवों के संभावित अस्तित्व की संभावना पर आधारित है। क्या धरती से चांद तक पहले भी सूक्ष्मजीव पहुंचे होंगे?
शोधकर्ताओं ने एक और संभावना का जिक्र किया है। पुराने समय में अंतरिक्ष में बड़े टकरावों के कारण धरती की कुछ चट्टानें अंतरिक्ष में उछली हों और उनके साथ सूक्ष्मजीव भी चांद तक पहुंच गए हों, ऐसा संभव हो सकता है। हालांकि, यह अभी केवल एक संभावना या परिकल्पना है। इस बात का कोई पक्का प्रमाण नहीं है कि धरती के सूक्ष्मजीव इस तरह चांद तक पहुंचे थे। कुल मिलाकर, यह शोध चांद पर जीवन मिलने की खबर नहीं है, बल्कि यह बताता है कि धरती के कुछ बेहद मजबूत सूक्ष्मजीव चांद की कठिन परिस्थितियों में भी पूरी तरह खत्म नहीं हों। अगर उन्हें किसी तरह का सुरक्षित स्थान मिल जाए, तो वे निष्क्रिय अवस्था में टिके रह सकते हैं। भविष्य के चंद्र अभियानों में इस संभावना को ध्यान में रखना इसलिए जरूरी होगा, ताकि धरती के सूक्ष्मजीव अनजाने में चांद के वातावरण को प्रभावित न करें।
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