सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने ‘Industry’ की परिभाषा पर बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि Industrial Disputes Act के तहत लंबित मामलों में Bangalore Water Supply का पुराना Triple Test ही लागू रहेगा। वहीं नया नियम भविष्य के मामलों तक सीमित रहेगा और Industrial Relations Code, 2020 पर यह फैसला सीधे लागू नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने ‘Industry’ की परिभाषा को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। 5:4 के बहुमत से कोर्ट ने 1978 के Bangalore Water Supply फैसले में बताए गए Triple Test में बदलाव किए हैं, लेकिन पुराने कानून के तहत चल रहे लंबित मामलों में पुराना Triple Test ही लागू रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि नया तरीका पुराने मामलों पर लागू नहीं होगा। वहीं Industrial Relations Code, 2020 में ‘Industry’ की परिभाषा इस फैसले के आधार पर तय नहीं की जाएगी।
लंबित मामलों पर पुराना नियम ही लागू State of U.P. v. Jai Bir Singh मामले में 9 जजों की पीठ ने माना कि Bangalore Water Supply फैसले में तय किए गए नियम को कुछ हद तक और साफ किया जा सकता है। इसके बाद कोर्ट ने Industry की पहचान के लिए Triple Test को नए तरीके से समझाया।
लेकिन इस बदलाव का असर Industrial Disputes Act, 1947 के तहत पहले से चल रहे मामलों पर नहीं पड़ेगा। अदालत, ट्रिब्यूनल, Labour Authorities या दूसरे मंचों पर लंबित मामलों का फैसला Bangalore Water Supply में तय पुराने Triple Test के आधार पर ही किया जाएगा।
जिन मामलों में फैसला पहले ही अंतिम हो चुका है, उन्हें नए फैसले के कारण दोबारा नहीं खोला जाएगा। पुराने फैसले, समझौते और ऐसे मामले जिन पर अब चुनौती नहीं दी जा सकती, पहले की तरह ही मान्य रहेंगे।
Industrial Relations Code पर लागू नहीं होगा फैसला सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसका यह फैसला Industrial Relations Code, 2020 में दी गई ‘Industry’ की परिभाषा की व्याख्या नहीं करता।
यानी नए Code के तहत आने वाले मामलों में Industry का मतलब उसके अपने कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होगा। पुराने Industrial Disputes Act की अदालतों द्वारा की गई व्याख्या को सीधे नए कानून पर लागू नहीं किया जा सकता।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने भी इस बात पर जोर दिया कि नए Code की व्याख्या उसके अपने प्रावधानों के आधार पर होनी चाहिए।
Bangalore Water Supply का Triple Test क्या है? 1978 में Bangalore Water Supply and Sewerage Board v. A. Rajappa मामले में सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की पीठ ने Industry शब्द का व्यापक मतलब बताया था।
इसके तहत किसी काम को Industry मानने के लिए मुख्य रूप से तीन बातें देखी जाती हैं। पहली, काम व्यवस्थित और नियमित तरीके से होना चाहिए। दूसरी, उसमें Employer और Employee के बीच मिलकर काम करना होना चाहिए। तीसरी, उस काम से लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सामान या सेवाओं का उत्पादन या वितरण होना चाहिए।
इस फैसले के बाद केवल मुनाफा कमाने वाली संस्थाएं ही नहीं, बल्कि कई गैर-मुनाफे वाली और जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियां भी Industrial Disputes Act के दायरे में आ सकती थीं।
मामले में कैसे आया Reference? State of Uttar Pradesh v. Jai Bir Singh मामला 2002 की एक अपील से जुड़ा है। 2005 में 5 जजों की पीठ ने Bangalore Water Supply फैसले को दोबारा देखने के लिए मामला बड़ी पीठ के पास भेजा था।
इसके बाद 2017 में 7 जजों की पीठ ने इसे 9 जजों की संविधान पीठ के सामने भेज दिया। सुनवाई के दौरान यह सवाल भी सामने आया कि सरकारी विभागों और सरकारी संस्थाओं की सामाजिक कल्याण योजनाओं को Industry माना जा सकता है या नहीं। साथ ही State के कौन से काम Sovereign Functions माने जाएंगे, इस पर भी विचार हुआ।
जजों की राय में मतभेद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 5:4 के बहुमत से Reference को सही माना। बहुमत ने माना कि पुराने Triple Test को कुछ हिस्सों में बेहतर तरीके से समझाने की जरूरत थी।
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इससे अलग राय दी। उन्होंने Reference को जरूरी नहीं माना। उनके अनुसार Bangalore Water Supply का फैसला उस समय की आर्थिक और औद्योगिक स्थिति को देखते हुए दिया गया था और उसमें बदलाव की जरूरत नहीं थी। फिर भी उन्होंने माना कि Industrial Disputes Act के तहत लंबित मामलों में पुराना Triple Test ही लागू होना चाहिए।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने बहुमत की राय से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि अब Industrial Disputes Act की संबंधित व्यवस्था खत्म हो चुकी है और पुराने कानून से जुड़े मामलों के लिए Bangalore Water Supply का फैसला ही आधार रहेगा।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस उज्जल भुइयां ने Reference को सही नहीं माना। उनके अनुसार 2005 में मामला बड़ी पीठ को भेजते समय पुराने महत्वपूर्ण फैसलों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया था। उन्होंने Bangalore Water Supply में दिए गए Triple Test को सही माना।
इस फैसले का सीधा असर पुराने Industrial Disputes Act के लंबित मामलों पर पड़ेगा, लेकिन वहां भी नया नियम नहीं बल्कि 1978 का Bangalore Water Supply Triple Test ही लागू रहेगा। नए Industrial Relations Code, 2020 के मामलों में ‘Industry’ की अलग कानूनी व्याख्या करनी होगी।
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