NASA के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) ने चांद की सतह पर उस जगह की साफ तस्वीरें जारी की हैं, जहां SpaceX के Falcon 9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा टकराया था। तस्वीरों में टक्कर के बाद बना करीब 18 मीटर चौड़ा नया क्रेटर और उसके आसपास फैली सामग्री साफ दिखाई दे रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह घटना चांद की सतह पर मानव निर्मित अंतरिक्ष मलबे के प्रभाव को समझने का एक महत्वपूर्ण मौका देती है। LRO ने टक्कर के लगभग एक सप्ताह बाद इस जगह की तस्वीरें लीं।
NASA के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) ने चांद की सतह पर उस जगह की साफ तस्वीरें जारी की हैं, जहां SpaceX के Falcon 9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा टकराया था। तस्वीरों में टक्कर के बाद बना करीब 18 मीटर चौड़ा नया क्रेटर और उसके आसपास फैली सामग्री साफ दिखाई दे रही है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह घटना चांद की सतह पर मानव निर्मित अंतरिक्ष मलबे के प्रभाव को समझने का एक महत्वपूर्ण मौका देती है। LRO ने टक्कर के लगभग एक सप्ताह बाद इस जगह की तस्वीरें लीं। चांद की सतह पर बना 18 मीटर चौड़ा क्रेटर
NASA के Lunar Reconnaissance Orbiter से मिली तस्वीरों के आधार पर वैज्ञानिकों ने बताया कि Falcon 9 रॉकेट के ऊपरी चरण के टकराने से चांद पर करीब 60 फीट यानी 18 मीटर चौड़ा गड्ढा बना है। इसकी गहराई 3 मीटर से कम बताई गई है।
टक्कर के बाद क्रेटर से निकली सामग्री आसपास के क्षेत्र में फैल गई। तस्वीरों में गड्ढे के चारों ओर तितली के पंखों जैसी गहरी और चमकीली धारियां दिखाई देती हैं।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, गहरी धारियां चांद की सतह के ऊपरी हिस्से से निकली पुरानी सामग्री को दिखाती हैं, जबकि चमकीली धारियां सतह के नीचे मौजूद नई चट्टानों और मिट्टी के बाहर आने का संकेत देती हैं। 8,700 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हुई टक्कर
Falcon 9 रॉकेट का ऊपरी चरण करीब 5,400 मील प्रति घंटा यानी 8,700 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चांद की सतह से टकराया था। यह रॉकेट जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था। इसके जरिए Firefly Aerospace के दो निजी Moon landers, वैज्ञानिक उपकरण और एक छोटे rover को चांद की दिशा में भेजा गया था। मिशन के बाद रॉकेट का ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में घूमता रहा और बाद में चांद से टकरा गया। NASA के LRO ने छह दिन बाद ली तस्वीर
टक्कर वाली जगह की तस्वीर लेने के लिए Lunar Reconnaissance Orbiter को अपनी स्थिति बदलनी पड़ी। LRO उस समय चांद की सतह से करीब 96 किलोमीटर ऊपर था और लगभग 1 मील प्रति सेकंड की गति से चांद की परिक्रमा कर रहा था।
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चांद के घूमने और अंतरिक्ष यान की स्थिति के कारण टक्कर वाली जगह को LRO के कैमरे के सामने आने में करीब छह दिन लगे। हालांकि, इस स्थान की तस्वीर लेने वाला पहला अंतरिक्ष यान NASA का LRO नहीं था। दक्षिण कोरिया का Danuri spacecraft सबसे पहले घटनास्थल की तस्वीरें भेज चुका था।
अंतरिक्ष मलबे से चांद की सतह पर असर को समझने में मदद यह घटना वैज्ञानिकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिलती है कि मानव निर्मित अंतरिक्ष वस्तुओं के चांद से टकराने पर किस तरह के गड्ढे और सतही बदलाव पैदा होते हैं। NASA का Lunar Reconnaissance Orbiter वर्ष 2009 से चांद की कक्षा में काम कर रहा है। यह लगातार चांद की सतह की निगरानी करता है और भविष्य के lunar missions के लिए जरूरी जानकारी उपलब्ध कराता है। चांद की सतह की ऐसी तस्वीरें वैज्ञानिकों को वहां मौजूद चट्टानों, मिट्टी और भूगर्भीय बदलावों को बेहतर तरीके से समझने में मदद करती हैं।
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