पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट्स का काम आसान नहीं होता। उन्हें बार-बार और लंबे समय तक विमान में रहना पड़ता है। नई रिसर्च में बताया गया है कि लंबे समय तक उड़ान भरने वाले इन लोगों में कुछ तरह के कैंसर का खतरा ज्यादा हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका एक कारण कॉस्मिक रेडिएशन हो सकता है। यह रेडिएशन अंतरिक्ष से पृथ्वी की तरफ आता है। जमीन पर हमें हवा की मोटी परत से काफी सुरक्षा मिलती है, लेकिन बहुत ऊंचाई पर यह सुरक्षा कम हो जाती है।
पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट्स का काम आसान नहीं होता। उन्हें बार-बार और लंबे समय तक विमान में रहना पड़ता है। नई रिसर्च में बताया गया है कि लंबे समय तक उड़ान भरने वाले इन लोगों में कुछ तरह के कैंसर का खतरा ज्यादा हो सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका एक कारण कॉस्मिक रेडिएशन हो सकता है। यह रेडिएशन अंतरिक्ष से पृथ्वी की तरफ आता है। जमीन पर हमें हवा की मोटी परत से काफी सुरक्षा मिलती है, लेकिन बहुत ऊंचाई पर यह सुरक्षा कम हो जाती है।
विमान में रेडिएशन क्यों ज्यादा मिलता है? जब विमान आसमान में बहुत ऊपर उड़ता है, तो वहां अंतरिक्ष से आने वाली रेडिएशन ज्यादा पहुंचती है। आम यात्री साल में कुछ ही बार विमान में बैठता है। लेकिन पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट्स अपने काम के कारण हर दिन या हर हफ्ते उड़ान भर सकते हैं।
इस वजह से उनके शरीर को लंबे समय तक थोड़ी-थोड़ी रेडिएशन मिलती रहती है। कितनी रेडिएशन मिलती है? रिसर्च के अनुसार, एयरक्रू को एक साल में करीब 3 से 6 mSv तक कॉस्मिक रेडिएशन मिल सकती है।
वहीं, आम यात्री को साल भर में इससे काफी कम रेडिएशन मिलती है। इसका सीधा मतलब है कि जितना ज्यादा कोई व्यक्ति विमान में काम करता है, उतना ज्यादा समय वह इस रेडिएशन के संपर्क में रह सकता है।
क्या रेडिएशन से कैंसर हो सकता है? बहुत ज्यादा रेडिएशन शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। यह शरीर के DNA को भी नुकसान पहुंचा सकती है। DNA को आसान भाषा में शरीर की कोशिकाओं का नक्शा या निर्देश समझ सकते हैं। DNA को नुकसान होने से कुछ मामलों में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि विमान में काम करने वाले हर व्यक्ति को कैंसर होगा। किन कैंसर पर ध्यान दिया गया? इस रिसर्च में कई तरह के कैंसर को देखा गया। इनमें शामिल हैं: ब्रेस्ट कैंसर ल्यूकेमिया दिमाग और नसों से जुड़े कुछ कैंसर मल्टीपल मायलोमा दूसरे कुछ कैंसर रिसर्च में करीब 14 हजार पायलट और 7 हजार फ्लाइट अटेंडेंट्स के रिकॉर्ड देखे गए।
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लंबी उड़ानों में खतरा ज्यादा हो सकता है हर उड़ान में रेडिएशन की मात्रा एक जैसी नहीं होती। जो लोग बहुत लंबी दूरी की उड़ानों में काम करते हैं, उन्हें ज्यादा समय तक आसमान में रहना पड़ता है। इसलिए उनका रेडिएशन एक्सपोजर भी ज्यादा हो सकता है।
कुछ ध्रुवीय इलाकों के पास से गुजरने वाली उड़ानों में भी रेडिएशन ज्यादा हो सकती है। क्या आम यात्रियों को डरना चाहिए? नहीं। इस रिसर्च का मतलब यह नहीं है कि विमान में बैठने से हर किसी को कैंसर हो जाएगा।
आम लोग साल में कुछ ही बार विमान से सफर करते हैं। इसके मुकाबले पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट्स अपने काम के कारण बहुत ज्यादा उड़ान भरते हैं। इसलिए इस रिसर्च में मुख्य चिंता लगातार उड़ान भरने वाले एयरक्रू को लेकर है।
क्या रेडिएशन ही कैंसर की वजह है? अभी यह बात पूरी तरह साबित नहीं हुई है। रिसर्च में एयरक्रू के काम और कुछ कैंसर के बीच संबंध देखा गया है। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि कैंसर सिर्फ रेडिएशन की वजह से हुआ।
कैंसर होने के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, जैसे उम्र, परिवार में बीमारी का इतिहास, जीवनशैली और दूसरे स्वास्थ्य कारण। इसलिए वैज्ञानिकों को इस बारे में और रिसर्च करने की जरूरत है। एयरक्रू के लिए क्या जरूरी है?
पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट्स की नियमित स्वास्थ्य जांच होनी चाहिए। उनके उड़ान के घंटों और लंबे समय तक होने वाले रेडिएशन एक्सपोजर पर भी नजर रखी जा सकती है। एयरलाइन कंपनियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को ऐसे कर्मचारियों की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है, जो लगातार और लंबे समय तक उड़ान भरते हैं।
आसान भाषा में समझें पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट्स रोज-रोज आसमान में रहते हैं। आसमान में जमीन की तुलना में अंतरिक्ष से आने वाली रेडिएशन ज्यादा होती है। लंबे समय तक इस रेडिएशन के संपर्क में रहने से कुछ कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। लेकिन अभी यह साबित नहीं हुआ है कि रेडिएशन ही कैंसर की सीधी वजह है।
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