अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया से ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में मदद मांगी, लेकिन सियोल ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने दक्षिण कोरिया में तैनात करीब 39,000 अमेरिकी सैनिकों और अमेरिका के भारी रक्षा खर्च का हवाला देते हुए सहयोग को लेकर सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यासों का स्तर कम करने का निर्देश दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ रक्षा संबंधों और अमेरिकी सैन्य खर्च को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्यंग से ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में मदद करने को कहा था, लेकिन सियोल ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने इसके बाद दक्षिण कोरिया में तैनात करीब 39,000 अमेरिकी सैनिकों और अमेरिका पर पड़ने वाले भारी रक्षा खर्च का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब अमेरिका दक्षिण कोरिया की सुरक्षा में मदद करता है, तो संकट की स्थिति में दक्षिण कोरिया अमेरिका का साथ क्यों नहीं देगा।
ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने हाल ही में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्यंग से बात की थी। उन्होंने ली से ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियान में कुछ मदद देने की इच्छा के बारे में पूछा था। ट्रंप के अनुसार, ली ने मदद से इनकार कर दिया और कहा कि दक्षिण कोरिया ईरान संघर्ष में शामिल नहीं होना चाहता। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां लगभग 39,000 अमेरिकी सैनिक उत्तर कोरिया से सुरक्षा के लिए तैनात हैं। ट्रंप ने इस व्यवस्था की आर्थिक लागत पर भी सवाल उठाया और कहा कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा है। ट्रंप ने नाटो का उदाहरण देते हुए भी कहा कि अमेरिका गठबंधन पर सैकड़ों अरब डॉलर खर्च करता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह दक्षिण कोरिया का समर्थन करना चाहते हैं, लेकिन सहयोगी देशों की सुरक्षा का आर्थिक बोझ अमेरिका के लिए बहुत अधिक हो गया है।
अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास पर भी ट्रंप का रुख ईरान को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद के बीच ट्रंप ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास का स्तर घटाने का आदेश भी दिया है। ट्रंप ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को इन अभ्यासों को काफी हद तक कम करने का निर्देश दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह पहले से तय संयुक्त सैन्य अभ्यासों से खुश नहीं हैं। उन्होंने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि इन सैन्य अभ्यासों को बड़े स्तर पर आयोजित करना उत्तर कोरिया के लिए अनुचित और शत्रुतापूर्ण संकेत देता है। हालांकि, ट्रंप ने कहा कि अभ्यासों को पूरी तरह रद्द करने में देर हो चुकी है। इसलिए उन्होंने इनके स्तर को काफी कम करने का निर्देश दिया है।
दक्षिण कोरिया ने रक्षा क्षमता मजबूत करने पर दिया जोर दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्यंग ने अपने देश की स्वतंत्र रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है। दक्षिण कोरिया ने अमेरिका के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों और अपने नागरिक सुरक्षा अभ्यासों को रक्षात्मक गतिविधियां बताया है और कहा है कि इनका उद्देश्य उत्तर कोरिया को धमकाना नहीं है। दक्षिण कोरिया ने साथ ही कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव कम करने के लिए अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच कूटनीतिक बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद भी जताई है।
ईरान संघर्ष को लेकर सियोल की अलग भूमिका दक्षिण कोरिया ने सोमवार को यह भी कहा कि वह ईरान में संघर्षविराम और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में व्यावहारिक और सैन्य योगदान के तरीकों पर अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। यानी सियोल ने अमेरिकी सैन्य अभियान में सीधे शामिल होने से इनकार किया है, लेकिन ईरान संघर्ष से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में अपनी संभावित भूमिका को लेकर वॉशिंगटन के साथ संपर्क बनाए रखा है।
ट्रंप की ताजा टिप्पणियों से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सुरक्षा सहयोग को लेकर आर्थिक जिम्मेदारी और क्षेत्रीय सैन्य रणनीति पर मतभेद सामने आए हैं। एक ओर अमेरिका दक्षिण कोरिया की सुरक्षा के लिए अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है, वहीं सियोल ईरान संघर्ष में सीधे शामिल होने से बचना चाहता है और कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ते पर जोर दे रहा है।
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