आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए संदीप पाठक को पार्टी संगठन में अहम जिम्मेदारी मिली है। वहीं, राघव चड्ढा समेत AAP के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में जाने के बाद चड्ढा को केंद्रीय कैबिनेट में जगह मिलने की अटकलें तेज हैं। हालांकि, मंत्री पद को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए संदीप पाठक को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। अप्रैल 2026 में राघव चड्ढा के नेतृत्व में AAP के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में जाने के बाद अब पाठक की नई भूमिका सामने आई है। इस बीच राघव चड्ढा को केंद्र सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की अटकलें भी तेज हो गई हैं।
संदीप पाठक को भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलने को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह लंबे समय तक आम आदमी पार्टी के संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़े रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा ने उन्हें दिल्ली में पार्टी को मजबूत करने और AAP के खिलाफ संगठनात्मक रणनीति तैयार करने से जुड़ी जिम्मेदारी भी दी है।
AAP में कैसे मजबूत हुए थे संदीप पाठक? संदीप पाठक मूल रूप से अकादमिक क्षेत्र से राजनीति में आए नेता हैं। वह IIT दिल्ली में प्रोफेसर रह चुके हैं और इससे पहले कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पीएचडी, ऑक्सफोर्ड में पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च और MIT से जुड़े शोध कार्य कर चुके हैं। IIT दिल्ली के आधिकारिक प्रोफाइल में भी उनके कैंब्रिज, ऑक्सफोर्ड और MIT से जुड़े अकादमिक अनुभव का उल्लेख है। राजनीति में आने के बाद पाठक को आम आदमी पार्टी के रणनीतिकारों में गिना जाने लगा। वह संगठन के विस्तार और चुनावी रणनीति तैयार करने में सक्रिय रहे। 2022 में उन्हें AAP का राष्ट्रीय महासचिव संगठन बनाया गया था। उस समय पार्टी ने देश के अलग-अलग राज्यों में अपना संगठन मजबूत करने के लिए उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका दी थी। AAP में रहते हुए संदीप पाठक का नाम खास तौर पर पंजाब की चुनावी रणनीति से जुड़ा रहा। बाद में वह पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के संगठनात्मक कामकाज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।
अप्रैल में AAP में हुई थी बड़ी टूट 24 अप्रैल 2026 को आम आदमी पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब राज्यसभा में पार्टी के कुल 10 सांसदों में से सात सांसद भाजपा के साथ चले गए। इस समूह का नेतृत्व राघव चड्ढा ने किया था। उनके साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल के नाम शामिल थे। राघव चड्ढा ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि सात सांसदों ने राज्यसभा में AAP की कुल संख्या के दो-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हुए भाजपा के साथ विलय का फैसला किया है। इस घटनाक्रम के बाद AAP की राज्यसभा में संख्या प्रभावी रूप से तीन सांसदों तक रह गई। बाद में राज्यसभा सभापति की मंजूरी और नोटिफिकेशन के बाद इन सात नेताओं को भाजपा के सांसदों की सूची में शामिल किया गया। इस घटनाक्रम से राज्यसभा में भाजपा की संख्या भी बढ़ी।
राघव चड्ढा और AAP के बीच क्या हुआ था? भाजपा में जाने से कुछ सप्ताह पहले ही राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया था। 2 अप्रैल 2026 को पार्टी ने उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी थी। AAP ने इस बदलाव को संगठनात्मक फैसला बताया था, जबकि घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर मतभेद की चर्चा तेज हो गई थी। AAP की ओर से यह भी कहा गया था कि चड्ढा को पार्टी के कोटे से राज्यसभा में बोलने का समय नहीं दिया जाए। दूसरी तरफ चड्ढा ने अपनी संसदीय गतिविधियों और सार्वजनिक मुद्दों पर अपने काम का हवाला देते हुए पार्टी के आरोपों का जवाब दिया था। 17 अप्रैल को राज्यसभा में भी चड्ढा ने पार्टी नेतृत्व पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि वह हाल में उपनेता पद से हटाए जाने के बावजूद सदन में मौजूद हैं, जबकि पार्टी के नेता और नए उपनेता मौजूद नहीं थे। इस घटनाक्रम ने AAP और चड्ढा के बीच बढ़ती दूरी की चर्चा को और हवा दी।
अब BJP में संदीप पाठक की क्या भूमिका है? भाजपा में शामिल होने के बाद संदीप पाठक को संगठन में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दी गई है। रिपोर्टों में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बताया गया है और दिल्ली से जुड़ी संगठनात्मक रणनीति में उनकी भूमिका की चर्चा की गई है। उन्हें AAP की रणनीति और संगठन की अंदरूनी कार्यप्रणाली की अच्छी समझ रखने वाले नेता के तौर पर देखा जा रहा है। यह जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाठक लंबे समय तक AAP के संगठनात्मक ढांचे और चुनावी रणनीति से जुड़े रहे हैं। भाजपा में आने के बाद उनके पुराने राजनीतिक अनुभव का इस्तेमाल पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने और AAP को चुनौती देने के लिए कर सकती है। रिपोर्टों में इसे भाजपा के 'मिशन दिल्ली' से भी जोड़ा गया है। हालांकि, किसी भी विशेष चुनावी रणनीति या जिम्मेदारी के बारे में पार्टी की ओर से जारी विस्तृत आधिकारिक आदेश उपलब्ध नहीं है, इसलिए इस हिस्से को रिपोर्टों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
राघव चड्ढा को लेकर क्यों बढ़ीं अटकलें? संदीप पाठक को भाजपा संगठन में जिम्मेदारी मिलने के साथ ही राघव चड्ढा के अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चड्ढा को केंद्र सरकार में बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी मिल सकती है और उनका नाम संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़ा जा रहा है। राघव चड्ढा पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और भाजपा में शामिल होने वाले सात AAP सांसदों के समूह में प्रमुख चेहरा रहे। उनकी उम्र, संसदीय अनुभव और सार्वजनिक पहचान को देखते हुए उन्हें भाजपा के लिए पंजाब की राजनीति में भी उपयोगी चेहरा माना जा सकता है। हालांकि, राघव चड्ढा को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए मंत्री पद से जुड़ी खबरों को फिलहाल अटकल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पंजाब की राजनीति में भी असर इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक असर पंजाब में दिखाई दे सकता है। आम आदमी पार्टी की पंजाब में सरकार है और 2027 में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। AAP के सात राज्यसभा सांसदों का भाजपा के साथ जाना पार्टी के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा बदलाव है। संदीप पाठक का AAP से अलग होना भी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पार्टी के शुरुआती दौर से रणनीतिक और संगठनात्मक काम में सक्रिय रहे थे। वहीं राघव चड्ढा लंबे समय तक पार्टी के प्रमुख युवा चेहरों में शामिल रहे। अब दोनों नेताओं का भाजपा में जाना पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना को बढ़ाता है। खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा इन नेताओं के अनुभव और राजनीतिक नेटवर्क का इस्तेमाल किस तरह करती है, इस पर नजर रहेगी।
AAP के सामने अब क्या चुनौती? सात राज्यसभा सांसदों के जाने के बाद AAP की संसद में स्थिति पहले की तुलना में कमजोर हुई है। राज्यसभा में अब पार्टी के पास संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल जैसे तीन सांसद रह गए हैं। AAP के लिए चुनौती केवल सांसदों की संख्या तक सीमित नहीं है। पार्टी को अपने संगठन को एकजुट रखने, पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भरोसा बनाए रखने और पंजाब में अपनी सरकार के पक्ष में राजनीतिक माहौल बनाए रखने पर भी ध्यान देना होगा। दूसरी ओर भाजपा के लिए AAP के सात सांसदों का साथ आना राज्यसभा में संख्या बढ़ने के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। संदीप पाठक जैसे संगठनात्मक अनुभव वाले नेता और राघव चड्ढा जैसे चर्चित युवा नेता का भाजपा में होना पार्टी को पंजाब और दिल्ली की राजनीति में अतिरिक्त विकल्प देता है। फिलहाल संदीप पाठक की भाजपा में संगठनात्मक भूमिका तय हो चुकी है, जबकि राघव चड्ढा को लेकर केंद्रीय मंत्री पद की चर्चा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले समय में भाजपा इन नेताओं को किस राजनीतिक जिम्मेदारी में आगे बढ़ाती है, यह इस पूरे घटनाक्रम का अगला महत्वपूर्ण पहलू होगा।
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