भारत में Space Weather Forecasting को बेहतर बनाने की दिशा में वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान (IIA) के शोधकर्ताओं और उनके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों ने सूर्य से निकलने वाले Coronal Mass Ejections (CMEs) को समझने के लिए एक नया 3D कंप्यूटर सिमुलेशन मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल वैज्ञानिकों को CME के बनने और सूर्य से बाहर निकलने की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकता है।
भारत में Space Weather Forecasting को बेहतर बनाने की दिशा में वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान (IIA) के शोधकर्ताओं और उनके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों ने सूर्य से निकलने वाले Coronal Mass Ejections (CMEs) को समझने के लिए एक नया 3D कंप्यूटर सिमुलेशन मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल वैज्ञानिकों को CME के बनने और सूर्य से बाहर निकलने की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकता है।
CME सूर्य से निकलने वाला बहुत बड़ा विस्फोट होता है, जिसमें भारी मात्रा में plasma और magnetic field अंतरिक्ष में बाहर निकलते हैं। अगर कोई CME पृथ्वी की दिशा में आता है, तो इसका असर satellite communication, radio communication और power grids जैसी महत्वपूर्ण प्रणालियों पर पड़ सकता है। अंतरिक्ष में मौजूद astronauts और spacecraft के लिए भी ऐसे घटनाक्रम जोखिम बढ़ा सकते हैं। CME की भविष्यवाणी क्यों जरूरी है?
Space Weather यानी अंतरिक्ष मौसम का संबंध सूर्य की गतिविधियों और उसके कारण अंतरिक्ष में होने वाले बदलावों से है। सूर्य पर होने वाली कुछ शक्तिशाली घटनाएं पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्ष के वातावरण को प्रभावित कर सकती हैं।
CME के मामले में वैज्ञानिकों के लिए सिर्फ यह जानना पर्याप्त नहीं है कि सूर्य पर विस्फोट हुआ है। यह समझना भी जरूरी है कि CME किस दिशा में आगे बढ़ेगा, उसकी गति कैसी होगी और पृथ्वी के magnetic field के साथ उसकी interaction कितनी प्रभावी हो सकती है। इसी वजह से CME के बनने और उसके बाद अंतरिक्ष में फैलने की प्रक्रिया को सही तरीके से समझना Space Weather Forecasting के लिए महत्वपूर्ण है।
नए 3D मॉडल में Magnetic Flux Rope की भूमिका IIA के शोधकर्ताओं ने अपने मॉडल में Magnetic Flux Rope (MFR) को शामिल किया है। इसे आसान भाषा में सूर्य के magnetic field का एक मुड़ा हुआ और twisted ढांचा समझा जा सकता है। यह सूर्य के plasma के भीतर मौजूद रहता है और CME के बनने तथा उसके बाहर निकलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मॉडल के अनुसार, जब magnetic flux rope ऊपर की तरफ उठता है तो वह आसपास मौजूद magnetic field को खींचता और दबाता है। इसके कारण एक पतली electric-current layer बनने लगती है। इसके बाद magnetic reconnection की प्रक्रिया तेज होती है। आखिरकार magnetic flux rope एक विस्फोट के रूप में सूर्य से बाहर निकल सकता है और CME का रूप ले सकता है।
विस्फोट अचानक नहीं होता इस मॉडल की एक खास बात यह है कि इसमें magnetic reconnection को शुरुआत से ही अचानक होने वाली प्रक्रिया के रूप में नहीं दिखाया गया है। मॉडल में पहले एक पतली और मजबूत electric-current layer बनने की प्रक्रिया दिखाई गई है।
इस layer के बनने के बाद magnetic reconnection तेजी पकड़ती है और उसके साथ flux rope के बाहर निकलने की प्रक्रिया भी तेज हो जाती है। इससे वैज्ञानिकों को CME के eruption को अधिक वास्तविक तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।
दो लगातार Flux-Rope Eruptions का किया गया Simulation शोधकर्ताओं ने अपने 3D मॉडल में दो लगातार flux-rope eruptions को simulate किया। इसके बाद कंप्यूटर सिमुलेशन से मिले परिणामों की तुलना सूर्य से मिले वास्तविक observational data से की गई। इस analysis में NASA के HMI और AIA instruments से मिले सूर्य के observational data का इस्तेमाल किया गया। इस तुलना से शोधकर्ताओं ने यह देखने की कोशिश की कि उनका मॉडल सूर्य पर देखी गई वास्तविक गतिविधियों से कितना मेल खाता है।
अध्ययन में भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान की Piyali Chatterjee, Samriddhi Sankar Maity और Ijas S. Mytheen के साथ University of Helsinki के Ranadeep Sarkar शामिल रहे। यह अध्ययन Astrophysical Journal में प्रकाशित हुआ है।
सैटेलाइट और कम्युनिकेशन के लिए महत्वपूर्ण बड़े CME अगर पृथ्वी की ओर आते हैं तो उनका असर आधुनिक तकनीक पर पड़ सकता है। इनमें satellite communication, radio communication और power grids जैसी प्रणालियां शामिल हैं। इसके अलावा, अंतरिक्ष में काम कर रहे astronauts और spacecraft के लिए भी सूर्य की ऐसी शक्तिशाली गतिविधियां जोखिम बढ़ा सकती हैं। इसलिए CME की दिशा और उसके व्यवहार को पहले से समझना महत्वपूर्ण है।
बेहतर मॉडल वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि सूर्य पर CME किस तरह बनता है और उसके बाद वह किस तरह विकसित होता है। ऐसी वैज्ञानिक समझ भविष्य में Space Weather की निगरानी और Early Warning System को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकती है।
अभी हर CME की सटीक भविष्यवाणी का दावा नहीं नए मॉडल को लेकर यह दावा करना सही नहीं होगा कि इससे अभी हर CME के पृथ्वी तक पहुंचने का समय या उससे होने वाले नुकसान की बिल्कुल सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है। इस शोध का मुख्य योगदान CME के बनने और सूर्य से erupt होने की प्रक्रिया को अधिक वास्तविक तरीके से model करना है। इससे वैज्ञानिकों की समझ बेहतर हो सकती है और भविष्य में Space Weather Forecasting को और मजबूत करने के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं।
भारत में Space Weather Forecasting को बेहतर बनाने की दिशा में वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान (IIA) के शोधकर्ताओं और उनके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों ने सूर्य से निकलने वाले Coronal Mass Ejections (CMEs) को समझने के लिए एक नया 3D कंप्यूटर सिमुलेशन मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल वैज्ञानिकों को CME के बनने और सूर्य से बाहर निकलने की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकता है।
CME सूर्य से निकलने वाला बहुत बड़ा विस्फोट होता है, जिसमें भारी मात्रा में plasma और magnetic field अंतरिक्ष में बाहर निकलते हैं। अगर कोई CME पृथ्वी की दिशा में आता है, तो इसका असर satellite communication, radio communication और power grids जैसी महत्वपूर्ण प्रणालियों पर पड़ सकता है। अंतरिक्ष में मौजूद astronauts और spacecraft के लिए भी ऐसे घटनाक्रम जोखिम बढ़ा सकते हैं। CME की भविष्यवाणी क्यों जरूरी है?
Space Weather यानी अंतरिक्ष मौसम का संबंध सूर्य की गतिविधियों और उसके कारण अंतरिक्ष में होने वाले बदलावों से है। सूर्य पर होने वाली कुछ शक्तिशाली घटनाएं पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्ष के वातावरण को प्रभावित कर सकती हैं।
CME के मामले में वैज्ञानिकों के लिए सिर्फ यह जानना पर्याप्त नहीं है कि सूर्य पर विस्फोट हुआ है। यह समझना भी जरूरी है कि CME किस दिशा में आगे बढ़ेगा, उसकी गति कैसी होगी और पृथ्वी के magnetic field के साथ उसकी interaction कितनी प्रभावी हो सकती है। इसी वजह से CME के बनने और उसके बाद अंतरिक्ष में फैलने की प्रक्रिया को सही तरीके से समझना Space Weather Forecasting के लिए महत्वपूर्ण है।
नए 3D मॉडल में Magnetic Flux Rope की भूमिका IIA के शोधकर्ताओं ने अपने मॉडल में Magnetic Flux Rope (MFR) को शामिल किया है। इसे आसान भाषा में सूर्य के magnetic field का एक मुड़ा हुआ और twisted ढांचा समझा जा सकता है। यह सूर्य के plasma के भीतर मौजूद रहता है और CME के बनने तथा उसके बाहर निकलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मॉडल के अनुसार, जब magnetic flux rope ऊपर की तरफ उठता है तो वह आसपास मौजूद magnetic field को खींचता और दबाता है। इसके कारण एक पतली electric-current layer बनने लगती है। इसके बाद magnetic reconnection की प्रक्रिया तेज होती है। आखिरकार magnetic flux rope एक विस्फोट के रूप में सूर्य से बाहर निकल सकता है और CME का रूप ले सकता है।
विस्फोट अचानक नहीं होता इस मॉडल की एक खास बात यह है कि इसमें magnetic reconnection को शुरुआत से ही अचानक होने वाली प्रक्रिया के रूप में नहीं दिखाया गया है। मॉडल में पहले एक पतली और मजबूत electric-current layer बनने की प्रक्रिया दिखाई गई है। इस layer के बनने के बाद magnetic reconnection तेजी पकड़ती है और उसके साथ flux rope के बाहर निकलने की प्रक्रिया भी तेज हो जाती है। इससे वैज्ञानिकों को CME के eruption को अधिक वास्तविक तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।
दो लगातार Flux-Rope Eruptions का किया गया Simulation शोधकर्ताओं ने अपने 3D मॉडल में दो लगातार flux-rope eruptions को simulate किया। इसके बाद कंप्यूटर सिमुलेशन से मिले परिणामों की तुलना सूर्य से मिले वास्तविक observational data से की गई। इस analysis में NASA के HMI और AIA instruments से मिले सूर्य के observational data का इस्तेमाल किया गया। इस तुलना से शोधकर्ताओं ने यह देखने की कोशिश की कि उनका मॉडल सूर्य पर देखी गई वास्तविक गतिविधियों से कितना मेल खाता है।
अध्ययन में भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान की Piyali Chatterjee, Samriddhi Sankar Maity और Ijas S. Mytheen के साथ University of Helsinki के Ranadeep Sarkar शामिल रहे। यह अध्ययन Astrophysical Journal में प्रकाशित हुआ है। सैटेलाइट और कम्युनिकेशन के लिए महत्वपूर्ण बड़े CME अगर पृथ्वी की ओर आते हैं तो उनका असर आधुनिक तकनीक पर पड़ सकता है। इनमें satellite communication, radio communication और power grids जैसी प्रणालियां शामिल हैं।
इसके अलावा, अंतरिक्ष में काम कर रहे astronauts और spacecraft के लिए भी सूर्य की ऐसी शक्तिशाली गतिविधियां जोखिम बढ़ा सकती हैं। इसलिए CME की दिशा और उसके व्यवहार को पहले से समझना महत्वपूर्ण है।
बेहतर मॉडल वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि सूर्य पर CME किस तरह बनता है और उसके बाद वह किस तरह विकसित होता है। ऐसी वैज्ञानिक समझ भविष्य में Space Weather की निगरानी और Early Warning System को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकती है।
अभी हर CME की सटीक भविष्यवाणी का दावा नहीं नए मॉडल को लेकर यह दावा करना सही नहीं होगा कि इससे अभी हर CME के पृथ्वी तक पहुंचने का समय या उससे होने वाले नुकसान की बिल्कुल सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है। इस शोध का मुख्य योगदान CME के बनने और सूर्य से erupt होने की प्रक्रिया को अधिक वास्तविक तरीके से model करना है। इससे वैज्ञानिकों की समझ बेहतर हो सकती है और भविष्य में Space Weather Forecasting को और मजबूत करने के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं।
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